September 23, 2018

अजब परवीन की गजब कहानी

By wmadmin123 - Wed Feb 26, 10:32 am

26bhrPAMANULLAHबिहार सरकार की समाज कल्याण मंत्राी ; अब पूर्व  परवीन अमानुल्लाह नीतीश से नाता तोड़कर अब ‘आप की हो गर्इ हैं। ‘आप अर्थात आम आदमी पार्टी की। लिहाजा, अब वे ‘झाड़ू लेकर नीतीश सरकार के सिस्टम को सुधरने के लिए अभियान चलाएंगी। ‘झाड़ू थामते ही उनके तेवर भी बदल गए हैं। अब उनकी नजरों में नरेंद्र मोदी, नीतीश कुमार तथा लालू यादव सभी एक जैसे हैं। गौरतलब है कि परवीन को नीतीश ने ही बीते विधनसभा चुनाव में पार्टी में लाकर विधयक और मंत्राी बनाया था। करीब तीन वर्षों तक मंत्राी की कुर्सी संभालने के बाद उन्हें अचानक ‘दिव्य ज्ञान प्राप्त हुआ कि नीतीश की सुशासन सरकार के सिस्टम में कर्इ खामियां हैं। व्यूरोक्रेसी और भ्रष्टाचार कापफी बढ़ गये हैं। लिहाजा, परवीन ने बीते 04 पफरवरी 2014 को सरकार और पार्टी से इस्तीपफा देकर आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया तथा वे अब ‘आप के भ्रष्टाचार विरोध्ी अभियान को गति देगी। परवीन अमानुल्लाह कहती हैं-’मैं बेबी सीटर बनकर नहीं रह सकती। सिस्टम में कमी है। सरकारी कामकाज में पारदर्शिता का अभाव है। अपफसरशाही और भ्रष्टाचार कापफी बढ़ गए हंै। लोग शिकायत करते हैं तो शिकायतकर्ता को ही दोषी बना दिया जाता है। इस सिस्टम में काम करना कठिन हो गया था। लेकिन जदयू सांसद अली अनवर परवीन को लेकर कुछ अलग ही राय रखते हैं। वे विहंसते हुए कहते हैं-’प्रवासी पक्षी ऐसे ही आती है और चली जाती है। संयोग से परवीन अमानुल्लाह जिस विधनसभा से चुनी गर्इ थी, वह बेगूसराय जिले में है। बेगूसराय जिले में ही कांवरझील भी है। इध्र परवीन के आम आदमी पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने के बाद सूबे की सड़कों पर यह सवाल तैरने लगा है कि जो परवीन अमानुल्लाह बियाडा जमीन प्रकरण में आरोप के घेरे में रही हैं उन्हें अरविंद केजरीवाल ने ‘आप में शामिल कैसे कर लिया? परवीन अमानुल्लाह पर आरोप लगा था कि उन्हाेंने मंत्राी रहते बेटी को बियाडा की करोड़ों की जमीन कौडि़यों के भाव में दिलाया। इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय में एक पीआर्इएल भी दर्ज है जिसपर हाल ही में सुनवार्इ होनी है। इतना ही नहीं, इनपर बदमिजाजी और खुलेआम रिश्वत मांगने के मुकदमे भी दर्ज हैं। वैशाली जिला के विदुपुर ब्लाक की सीडीपीओ कविता कुमारी ने यह मुकदमा दर्ज करवा रखा है। दर्ज मुकदमें में कहा गया है कि परवीन अमानुल्लाह तथा उनके सहयोगियों ने 10 लाख रिश्वत मांगा तथा उनके साथ मारपीट की। अब सवाल उठता है कि आखिर परवीन जदयू को नमस्कार कर अलग क्यों हो गर्इ? उन्होंने जो इस्तीपफे के कारण बताए हैं वह सही है या बातें कुछ और है?
यूं तो इसकी पृष्ठभूमि में कर्इ कारण बताए जाते हैं मसलन, नीतीश के करीबी एवं उनके प्रिय अनंत सिंह से परवीन की चल रही अदावत और उस प्रसंग में परवीन को नीतीश से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलना, पति अपफजल अमानुल्लाह को सूबे का मुख्य सचिव नहीं बनाया जाना, समाज कल्याण विभाग के एक के बाद एक विभिन्न प्रधन सचिवों से परवीन की पटरी न बैठना आदि। लेकिन इनमें से महत्वपूर्ण कारण बताया जाता है उनका संसद में जाने का वह सपना जो जदयू में रहकर पिफलहाल पूरा होने वाला नहीं था। पहले इन्हें उम्मीद थी कि अल्पसंख्यक होने के नाते नीतीश इन्हें राज्यसभा भेज देंगे। लेकिन इनकी जगह एक दूसरी परवीन ;कहंकशा परवीनद्ध ने ले ली। पिफर उम्मीद थी कि लोकसभा चुनाव लड़कर संसद पहुंच जाएगी, पर इस बार नीतीश की यह लाचारी है कि वे अपने किसी विधयक को शायद लोकसभा चुनाव में नहीं उतार पाएंगे। क्योंकि बिहार में उनकी सरकार खुद अल्पमत का संकट झेल रही है। यदि किसी विधयक को चुनाव में उतारेंगे तो चुनाव जीतने के बाद उन्हें विधनसभा की सीट खाली करनी होगी। ऐसा करने से बिहार सरकार पर संकट के बादल छा जाएंगे और नीतीश विधयक की संख्या को कम कर यह संकट बढ़ाना नहीं चाहेंगे। हां, भीतर ही भीतर किसी दूसरे दल के विधयक को पटा लें तो दूसरी बात है। ;अभी विधनसभा में जदयू के 116 सदस्य बचे हैं। परवीन इस्तीपफा दे चुकी हैं और महाराजगंज के विधयक दामोदर सिंह स्वर्गवासी हो गए हैं।द्ध कुल मिलाकर परवीन ने जदयू में रहते लोकसभा का टिकट मिलना संदिग्ध् था। कुछ क्षण के लिए यह मान भी लिया जाए कि टिकट मिल भी जाता तो परवीन को लग रहा होगा कि जदयू का टिकट इसबार जीत की गारंटी नहीं है। हाल में हुए ओपिनियन पोल के रिजल्ट भी उत्साहबर्(क नहीं है। ओपिनियन पोल में कहा गया है कि बिहार के 62 प्रतिशत लोग नीतीश को मुख्यमंत्राी के रूप में चाहते हैं। इनमें से 54 प्रतिशत लोग अपना मत विधनसभा के अगले चुनाव में जदयू को देना चाहते हैं। लेकिन लोकसभा चुनाव में मात्रा 5-7 सीट ही मिलेंगे। उफपर से नीतीश अपने संकल्प रैली में यह कहते पिफर रहे हैं कि यदि हम लोेकसभा चुनाव में हार गए तो हमारी सरकार 10 दिन भी नहीं चलेगी। उध्र अरविंद केजरीवाल की पार्टी ‘आप सियासी दलों में एक उगता हुआ सूरज है। परवीन के नजदीकी के अनुसार यदि श्री केजरीवाल दिल्ली की शीला दीक्षित सरकार को èवस्त कर वहां सत्ता में काबिज हो सकते हैं तो यह प्रयोग आने वाले दिनों में बिहार मेें भी किया जा सकता है। बिहार में ‘आप पार्टी का कोर्इ नामदार नेता भी नहीं है। मंत्राी बनने से पूर्व परवीन अमानुल्लाह भी आरटीआर्इ कार्यकर्ता थीं और अलग-अलग मुíों को लेकर सरकार पर प्रहार करती रहती थीं। मतलब इस प्रकरण में यह भी संकेत छुपा हुआ है कि अगले विधनसभा चुनाव में परवीन अमानुल्लाह बिहार से ‘आप के मुख्यमंत्राी पद के उम्मीदवार हो सकती हैं।
उध्र परवीन अमानुल्लाह ने नीतीश मंत्रिमंडल से इस्तीपफा देने का जो कारण बताया है उस पर सभी विपक्षी दल जहां नीतीश सरकार को घेरने लगे हैं वहीं आम आदमी पार्टी के बिहार-झारखंड प्रभारी सोमनाथ त्रिपाठी ने यह दावा कर इन सियासी दलों में खलबली मचा दी है कि सत्ता और विपक्ष के कर्इ और नेता ‘आप का दामन थामने के इच्छुक हैं। उध्र परवीन अमानुल्लाह को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर जदयू के प्रदेश अèयक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह कहते हैं-’परवीन अमानुल्लाह को पार्टी ने सम्मान दिया, बदले में उन्होंने क्या दिया, यह कहने की चीज नहीं है। वह झाड़ू थामे या कुछ और उससे जदयू की सेहत पर कोर्इ पफर्क नहीं पड़ेगा।
दरअसल, सवाल यह नहीं है कि परवीन अमानुल्लाह के इस्तीपफे से जदयू का अल्पसंख्यक वोट कितना प्रभावित होगा, सवाल यह है कि परवीन अमानुल्लाह ने इस्तीपफे का कारण सिस्टम की गड़बड़ी को बताया है तो आखिर सिस्टम की कमी को दूर करेगा कौन? जब सत्ता में बैठ कर वे सिस्टम को सुधर नहीं सकी तो सत्ता से बाहर आकर सिस्टम को सुधरेगी, यह बात गले से नीचे नहीं उतरती। यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि जो तेवर ये आज दिखा रही हंै वह तेवर मंत्राी रहते हुए इन्होंने क्यों नहीं दिखाया? सवाल इतना ही नहीं है, जब परवीन मंत्राी हुआ करती थीं तो ये नीतीश सरकार और अपने विभाग का गुणगान करते नहीं थकती थीं। तो क्या पूर्व में इनके द्वारा किए गए वह गुणगान झूठे थे? यदि हां, तो अब तक जनता को भरमाने का अपराध् परवीन ने क्यों किया? यदि नहीं, तो आज जो कुछ परवीन कह रही हैं वह सब झूठ है। परवीन के अनुसार यहां अपफसरशाही और भ्रष्टाचार भी बढ़े हैं। अब परवीन से लोग सवाल करने लगे हैं कि उनके पति भी वरिष्ठ आर्इएएस अपफसर हैं। कुछ माह पूर्व तक नीतीश सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर काबिज भी थे, उस समय परवीन अमानुल्लाह अपफसरशाही के विरू( आवाज उठाने वालों के साथ क्यों नहीं खड़ी हुर्इ? गौरतलब है कि परवीन अमानुल्लाह पूर्व सांसद शहाबुíीन की बेटी और वरिष्ठ आइएएस अधिकारी अपफजल अमानुल्लाह की पत्नी हैं। अपफजल अमानुल्लाह और नीतीश की गहरी दोस्ती थी। इसी दोस्ती के कारण नीतीश ने परवीन को विधयक और पिफर मंत्राी भी बनाया था। लेकिन पिछले वर्ष कर्इ कारणों से नीतीश और श्री अमानुल्लाह के संबंध् में खटास आ गए। लिहाजा, वे केंद्रीय प्रतिनियुकित पर दिल्ली चले गए। बताया जाता है अमानुल्लाह की नजर सूबे में मुख्य सचिव की कुर्सी पर लगी हुर्इ थी। ;विस्तार से जानने के लिए पढ़ें-श्यामाकांत झा की स्टोरी : ‘इतने हुए करीब कि वे दूर हो गएद्ध। इध्र बियाडा का भूत भी परवीन का लगातार पीछा कर रहा है।
सबसे पहले बियाडा प्रकरण है क्या? दरअसल, बियाडा अर्थात बिहार इंडसिट्रयल एरिया डेवलपमेंट आथरिटी का गठन सूबे में औधोगिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए किया गया था। सूबे में इसकी स्थापना 1974 में एक एक्ट के तहत हुर्इ थी। बिहार में निवेश को इच्छुक व्यकितयों को उधोग-ध्ंध्े लगाने हेतु सरकार के द्वारा पटना सहित विभिन्न जिलों में अधिग्रहित की गर्इ जमीन देने का प्रावधन किया गया। इस प्रावधन के तहत तीन वर्ष पूर्व कर्इ प्रमुख आवंटियों को कौडि़यों के भाव में आनन-पफानन में जमीन दी गर्इ। हैरत की बात यह है कि इसकी अधिकांश जमीन उधोगपतियों की जगह रसूखदार लोगों के बच्चों के नाम आवंटित कर दी गर्इ। तत्कालीन मंत्राी परवीन अमानुल्लाह की बेटी रहमत पफातिमा भी इनमें से एक हैं। रहमत पफातिमा को भी 87,120 वर्गपफुट जमीन दी गर्इ थी। उन्हें भी कौडि़यों के दाम में ही यह जमीन मिली। गौरतलब है कि इसमें जिन-जिन लोगों को जमीन दी गर्इ उनमें से बड़ी संख्या में उस वक्त के नीतीश सरकार में शामिल नेताओं के नजदीकी रिश्तेदार शामिल हैं। जमीन आवंटन के बाद बिहार की राजनीति में तब कापफी बवाल भी मचा था। विरोध् में लोग सड़क पर उतर आए थे। तब लोगों ने इसे बिहार का 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाला करार दिया था। इस घोटाले के खुलासे के बाद इसकी जांच सीबीआर्इ से कराने की मांग विपक्षी दलों ने की थी। लेकिन नीतीश की ‘सुशासन सरकार ने उनकी मांग खारिज कर तत्कालीन मुख्य सचिव अनूप मुखर्जी को जांच करने को कहा। पिफर वही हुआ जो प्राय: विभागीय जांचों का हश्र होता है। चीपफ सेक्रेटरी  अनूप मुखर्जी ने सभी आरोपियों को क्लीन चिट दे दिया। इतना ही नहीं, मुख्य सचिव ने अपने प्रतिवेदन में प्रेस को ही षडयंत्राकर्ता बताकर कार्रवार्इ करने के संकेत दिए थे। दरअसल, 2003 में बनायी गर्इ बियाडा की नियमावली को परिवर्तित कर मनमानी का यह खेल खेला गया था। हालांकि इस मामले में एक पीआर्इएल देश की सबसे बड़ी कचहरी ;सर्वोच्च न्यायालयद्ध में दर्ज है। यह पीआर्इएल पूर्व विधन पार्षद पीके सिन्हा ने दाखिल की है। एक समय था जब पीके सिन्हा नीतीश के कापफी करीबी हुआ करते थे। आइपीएल में श्री सिन्हा ने दो लोगों के खिलापफ सीध्े मुकदमा चलाने की मांग की है। वे हैं-शिक्षा मंत्राी पीके शाही तथा परवीन अमानुल्लाह। ये दोनों जमीन आवंटन के साथ नीतीश सरकार के मंत्राी रहे हैं। हालांकि, परवीन नीतीश से नाता तोड़ चुकी हैं लेकिन पीके शाही आज भी नीतीश सरकार में ‘सुशासन स्थापित करने में जुटे हुए हैं। पीके सिन्हा कहते हैं-’दोनों मंत्रियों ने अपने-अपने पद का दुरूपयोग कर अपनी-अपनी बेटी को पफायदा पहुंचाया था। पद का दुरूपयोग बहुत बड़ा अपराध् है। हैरत की बात यह भी है कि इनके बेटियों को उधोग चलाने का कोर्इ खास अनुभव भी नहीं है। श्री सिन्हा आगे कहते हैं-’इन लाभार्थियों को 13.31 लाख रुपये एक एकड़ के देने पड़े जबकि इसका मार्केट वैल्यू करोड़ों में है। इसके लिए 24 मर्इ 2011 को पिटिशन पड़ा और उसी दिन सैग्शन हो गया। कुछ इसी तरह के मामले का खुलासा उत्तर प्रदेश में भी हुआ था। पाठकों को याद होगा नीरा यादव प्रकरण। नीरा यादव भी अपनी बेटियों के नाम जमीन एलाट करवार्इ थी। उस मामले की जांच सीबीआर्इ से करवार्इ गर्इ। सीबीआर्इ ने नीरा यादव को दोषी पाया। लिहाजा, उन्हें सलाखों के पीछे ध्केल दिया गया था।
बियाडा प्रकरण को लेकर आज भी अलग-अलग दलों एवं व्यकितयों के द्वारा सीबीआर्इ जांच की मांग की जा रही है। अब सवाल उठता है कि सियासत में शु(ता और र्इमानदारी की बात करने वाले अरविंद केजरीवाल जिस कोल ब्लाक आवंटन तथा 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन में शामिल हर शख्स को डंके की चोट पर चोर कहते हैं, उसी तरह बिहार का 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला के नाम से मशहूर बियाडा जमीन आवंटन मामला में आरोपों के घेरे में रही परवीन अमानुल्लाह को उन्होंने आखिर ‘आप में कैसे शामिल कर लिया? 2जी घोटाला और कोयला ब्लाक आवंटन घोटाला में भी तो यही हुआ था। पिफर बियाडा जमीन आवंटन मामले में आरोप के घेरे में रही मां उन आरोपियों से अलग कैसे हो गर्इ? दूसरी पार्टी के दागदार नेता दागी हैं और उनकी पार्टी के दागी नेता स्वच्छ और र्इमानदार? क्या उनकी पार्टी में शामिल होने वाले दागी, शामिल होते ही पवित्रा हो जाते हैं? यह अलग बात है कि परवीन अमानुल्लाह अपने उफपर लगे तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करती रही हंै। बहरहाल, परवीन बिहार में ‘आप की कमान मोटे तौर पर संभाल चुंकीं हैं तथा पिफर से भ्रष्टाचारियों के विरू( अपनी आवाज बुलंद करने लगी हैं।

Leave a Reply

Powered By Indic IME