December 12, 2017

अब भी सिसक रहा सासाराम

Photo GalleryBy wmadmin123 - Tue Oct 22, 10:55 am

बिहार के रोहतास जिले के बड~डी गांव के महादलितों के उफपर बरपाये गए कहर की घटना को यूं तो अब करीब दो महीने होने वाले हैं लेकिन उस घटना से जन्मा खौपफ आज भी सासाराम की सड़कों पर तैर रहा है। इस घटना को लेकर एक ओर जहां विभिन्न राजनीतिक दल वोटों की राजनीति करते नजर आ रहे हैं वहीं दूसरी ओर नक्सली संगठन भाकपा माओवादी को अपनी खोयी हुई जमीन मिलने की आशंका प्रबल हो गई है।
आशंका है कि नक्सली संगठन कहीं पीड़ित महादलितों के जख्म को सहलाकर जहां उनसे अपना जुड़ाव न स्थापित कर ले वहीं महादलितों पर हमला करने वाले को निशाने पर लेकर नये सिरे से खूनी रंजिश का सिलसिला न शुरू हो जाए। हालांकि इस आशंका को रोकने के लिए पुलिस हर संभव प्रयास करती दिख रही है। इसके लिए पुलिस प्रशासन ने घटना स्थल के नजदीक एक पुलिस पिकेट बना दिया है तथा रात में इन क्षेत्राों में पुलिस गश्ती तेज कर दी गई है, बावजूद इसके बड़ा सवाल यह है कि स्वतंत्रा भारत में दबे-कुचले इन वर्गों के उफपर हो रहे अत्याचार पर कब लगेगा विराम? गौरतलब है कि बीते 15 अगस्त 2013 को रोहतास जिले के बड~डी गांव के महादलित समुदाय के लोगों पर उसी गांव के एक खास जाति के लोगों के द्वारा हमला किया गया था। हमलावरों ने क्या महिला, क्या पुरुष, क्या बच्चे किसी को भी नहीं छोड़ा।

कैमूर पहाड़ी की तलहटी में बसे बड~डी गांव की यह घटना अचानक नहीं घटी। इस लोमहर्षक घटना की पृष्ठभूमि है-संत रैदास के मंदिर के अगz भाग की भूमि। उस भूमि पर शहीद निशान सिंह समारक समिति के सदस्य स्वाध्ीनता दिवस के दिन तिरंगा पफहराना चाह रहे थे, लेकिन महादलित समुदाय को यह स्वीकार्य नहीं था। पुलिस-प्रशासन को दोनों पक्षों के बीच तनाव की सूचना थी, इसीलिए बड~डी थाना के प्रभारी ने दोनों पक्षों को बुलाकर बैठक की थी। बैठक में तय हुआ था कि प्रशासन की देखरेख में झंडोत्तोलन होगा। रैदास मंदिर में महादलित समुदाय के लोग जुटकर प्रशासनिक अध्किारी के आने की बाट जोह रहे थे। इसी बीच शहीद निशान सिंह स्मारक समिति के लोग दल-बल के साथ झंडोत्तोलन करने आ पहुंचे। महादलितों ने विरोध् किया तो वे भाग खड़े हुए, लेकिन कुछ देर बाद हरबे-हथियार के साथ आ ध्मके और कहर बरपाना शुरू कर दिया। इस तांडव में राम विलास राम की मौत हो गयी। सुखिया देवी, चंपा देवी, सहतु राम, राहुल राम, दीपक राम सहित पचास से अध्कि लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को सासाराम लाकर सदर अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां डाWक्टरों ने करीब दो दर्जन घायलों को पीएमसीएच रेपफर कर दिया। पुलिस ने काशीनाथ राम के बयान के आधर पर एपफआईआर दर्ज की, जिसमें डाW. शंभू सिंह, शैलेन्दz सिंह, आकाश सिंह, अक्षयवर सिंह, भूषण सिंह, शेखर सिंह, विनोद सिंह, रामाशीष सिंह, उमाकांत सिंह, डब्लू सिंह, बब्लू सिंह, दीपू सिंह, श्री राम सिंह, छोटू सिंह, त्राफृषु सिंह, नथुनी सिंह, विश्वरंजन सिंह, मुन्ना सिंह, बिट~टू सिंह, चन्दzशेखर सिंह, लड~डू सिंह, प्रकाश सिंह, जय प्रकाश सिंह, सोनू सिंह, प्रकाश सिंह, रामप्रवेश सिंह सहित 40 नामजद व 35 अज्ञात लोगों को अभियुक्त बनाया गया।

पुलिस को दिए गए बयान में काशीनाथ राम ने यह भी कहा कि बड~डी गांव के एक खास तबके के लोग संत रैदास के मंदिर परिसर में ही शहीद निशान सिंह की प्रतिमा स्थापित करना चाहते हैं। बिहार सरकार की जमीन में संत रैदास का मंदिर और एक सामुदायिक भवन है। यह मंदिर 1980 मंे स्थापित हुआ। मंदिर के आगे थोड़ी सी जमीन है जहां एक खास तबके के लोग शहीद निशान सिंह की प्रतिमा स्थापित करना चाहते हैं। हालांकि मंदिर के बगल में शहीद निशान सिंह के नाम पर हाई स्कूल है। स्कूल परिसर में करीब तीन डिसमिल जमीन प्रतिमा स्थापित करने के लिए उपलब्ध् है लेकिन वे लोग मंदिर परिसर में ही झंडोत्तोलन और शहीद की प्रतिमा स्थापित करने की कोशिश कर रहे थे। एक मानवाध्किार संगठन जन हस्तक्षेप के प्रतिनिध् िएवं दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. ईश मिश्र और राजेश कुमार ने बड~डी गांव का दौरा करने के बाद जिले के पत्राकारों को बताया कि संत रैदास के अनुयायियों ने बिहार सरकार की जमीन पर मंदिर निर्माण के लिए प्रशासन से एनओसी हासिल कर लिया है। सासाराम के एसडीएम नलिन कुमार इस बात की तस्दीक भी करते हैं। बड~डी कांड के मामले में सुशासन का दावा करने वाली नीतीश सरकार के एक मंत्राी जो रोहतास जिले के प्रभारी मंत्राी भी हैं की क्रियाकलाप हैरत में डालने वाला है। दरअसल, जिस दिन यह घटना घटी उस दिन अर्थात 15 अगस्त 2013 को राज्य सरकार के गzामीण कार्य मंत्राी सह रोहतास जिला के प्रभारी मंत्राी डा. भीम सिंह सासाराम में मौजूद थे। जिला मुख्यालय स्थित पफजलगंज स्टेडियम में प्रभारी मंत्राी ने ध्वजारोहण किया और सरकार की उपलब्ध्यिों का बखान करते हुए उन्होंने समाज के अति पिछड़ी जातियों खासतौर से महादलितों के उत्थान एवं कल्याण के लिए किए जा रहे कार्यों का ब्योरा भी पेश किया। बड~डी गांव में खूनी तांडव की खबर मिलने पर जिलाध्किारी डा. संदीप कुमार और एसपी विकास बर्मन घटना स्थल की ओर कूच कर गए, लेकिन खुद को अतिपिछड़े समुदाय के सपूत कहने वाले डाW. भीम सिंह परिसदन में आराम पफरमाते रहे और पिफर राजधनी की ओर प्रस्थान कर गए। हैरत की बात यह है कि उन्होंने सदर अस्पताल जाकर घायल महादलितों से मिलना भी मुनासिब नहीं समझा। बड~डी कांड को लेकर लोजपा भी दो खेमों में बंट गयी है। लोजपा के एक वरिष्ठ नेता डीएन सिंह एक ओर हैं तो दल के पूर्व जिलाध्यक्ष शिवशंकर सिंह दूसरे खेमे में। लोजपा नेता डीएन सिंह शहीद निशान सिंह स्मारक समिति के सचिव भी बताए जाते हैं। शहीद निशान सिंह स्मारक समिति के बैनर तले करीब पांच हजार लोगों ने डीएन सिंह की अगुवाई में 23 अगस्त को जिला मुख्यालय में प्रदर्शन किया था। बड~डी के हथियार धरकों की अनुज्ञप्ति रí करने की कार्रवाई के विरोध् में हुए प्रदर्शन के बाद हुई जनसभा को पूर्व सांसद लवली आनंद ने भी संबोध्ति किया। दूसरी तरपफ लोजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष शिवशंकर सिंह कुशवाहा वामदलों और अन्य राजनीतिक-सामाजिक संगठनों के साझा मोर्चा में शामिल हो गए। बड~डी कांड विरोध्ी जन संघर्ष मोर्चा के जरिये लोजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष शिवशंकर कुशवाहा तथा भोले शंकर, रविशंकर राम, अब्दुल सत्तार अंसारी, शिवाजी राय, संजय कुमार यादव, अंकुर पासवान आदि वामदलों के नेता बड~डी गांव के दबंग परिवारों के हथियारों की अनुज्ञप्ति रí करने, नामजद अभियुक्तों की शीघz गिरÝतारी और महादलितों के जान-माल की सुरक्षा की मांग की है। सीपीआई एमएल ने भी बड~डी कांड के खिलापफ आंदोलन शुरू कर दिया है। युवा राजद के जिलाध्यक्ष भी शहीद निशान सिंह स्मारक समिति के समर्थन में हैं, लेकिन राजद के तमाम जिला स्तरीय बड़े नेता इस मुíे पर मौन हैं। कांगzेस नेत्राी एवं सासाराम संसदीय क्षेत्रा से निर्वाचित लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार का जिले में पदार्पण हुआ, लेकिन वो घटना स्थल पर नहीं गयीं। हां, सासाराम के अस्पताल व पटना के पीएमसीएच में जाकर घायल महादलितों से जरूर मिलीं। जब बड~डी कांड को लेकर विपक्षी दलों की सक्रियता बढ़ी तो सूबे की एक मंत्राी रेणु कुशवाहा और पिफर राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष विद्यानंद विकल, भाजपा अनुसूचित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संजय पासवान, मानवाध्किार कार्यकर्ता संतोष उपाध्याय, अन्तर्राष्ट्रीय मानवाध्किार संगठन के मदन कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता संजय पासवान तथा राज्यसभा सदस्य उपेन्दz कुशवाहा ने उस गांव का दौरा किया। आयोग के अध्यक्ष ने माना कि संत रविदास के मंदिर के अगले हिस्से में दूसरे पक्ष के लोग जबरन झंडोत्तोलन करने और उक्त भूमि पर कब्जा कर के शहीद निशान सिंह की प्रतिमा स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका यह कृत्य शहीद के नाम को भी ध्ूमिल कर रही हैं। पुलिस प्रशासन ने गांव में तनाव की स्थिति को देखते हुए घटना स्थल के निकट पुलिस कैंप बना दिया है। पुलिस ने कुछ अभियुक्तों की गिरÝतारी भी की है। मुख्य अभियुक्त डा. शंभू सिंह ने सासाराम न्यायालय में आत्म समर्पण कर दिया है। पुलिस अध्ीक्षक विकास बर्मन का कहना है कि कांड के मुख्य अभियुक्त डा. शंभू सिंह ने पुलिस की दबिश के कारण कोर्ट में सरेंडर किया है।

उध्र श्री बर्मन ने बड~डी थाना के थानायक्ष बलवंत सिंह को लापरवाही बरतने के आरोप में लाइन हाजिर करके पुलिस अध्किारी अनिल कुमार सिन्हा को नया थानाध्यक्ष बनाया है। एएसपी अभय कुमार लाल व एएसपी अभियान मो. सुहैल, एसटीएपफ के डीएसपी बमबम चौध्री ने बड~डी गांव में पुलिस पफोर्स के साथ पांच-छ: दिनों तक कैम्प कर शांति बहाल करने का काम किया। एएसपी का कहना है कि शांति-व्यवस्था के मíेनजर दोनों पक्षों पर 107 के तहत कार्रवाई की गयी है।

बड~डी कांड को लेकर पुलिस की परेशानी यह भी है कि घटना नक्सली संगठन भाकपा माओवादी को खोयी हुई आधर भूमि उपलब्ध् कराने का सबब बन सकती है। यही कारण है कि पुलिस प्रशासन ने घटना स्थल के पास एक पुलिस पिकेट बना दिया है ताकि पीड़ित महादलितों और नक्सली संगठन का जुड़ाव नहीं हो सके। एसटीएपफ और सैप के जवान इलाके में खासतौर से रात्रिा में गश्ती करते रहते हैं। महादलितों पर हमला करने वाले समुदाय के लोगों को भी नक्सली संगठन का खौपफ अब सताने लगा है। यही कारण है कि वे परोक्ष व प्रत्यक्ष तरीके से अपने हथियार का लाइसेंस होने से बचाने की मुहिम में जुटे हुए हैं। 23 अगस्त को जिला मुख्यालय में किए गए प्रदर्शन तथा डीएम को सौंपे गए ज्ञापन में भी हथियारों की अनुज्ञप्ति र नहीं करने की मांग प्रमुखता से की गयी थी। बताया जाता है कि एपफआईआर के नौ नामजद अभियुक्तों के हथियार की अनुज्ञप्ति र हो जाएगी। इस संभावना को एक वरीय पुलिस पदाध्किारी भी कबूल करते हैं। हालांकि बड~डी गांव के कुल 23 व्यक्तियों के पास लाइसेंसी आग्नेयास्त्रा है। नि:संदेह उपरी तौर पर बड~डी गांव मेंे पिफलहाल शांति दिखाई पड़ रही है, लेकिन पुलिस प्रशासन को भी यह अहसास है कि नेपथ्य में ज्वालामुखी ध्ध्क रही है। यही वजह है कि पुलिस ने पहल करके मृतक महादलित राम विलास राम के परिजनों को चार लाख रुपये की अनुगzह राशि तथा हरेक घायल व्यक्ति को 50-60 हजार रुपये का मुआवजा जिला प्रशासन से दिलाया है। राष्ट्रीय मानवाध्किार आयोग ने भी बड~डी कांड पर संज्ञान लिया है और राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है। जिले में सीपीआईएमएल, भाकपा माले, भाकपा माले न्यू डेमोक्रेसी, कम्युनिस्ट सेंटर आWपफ इंडिया, भाकपा, समाजवादी जन परिषद सहित कई राजनीतिक दल व सामाजिक संगठन ने बड~डी गांव के पीड़ित महादलितों को न्याय की मांग को लेकर आंदोलनात्मक कार्रवाई करने को तुले हुए हैं। होता क्या है यह तो आनेवाला वक्त ही बताएगा।

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