September 24, 2018

अर्थ एडुविजन एन्सेंबल : लड़कियों को बराबरी का दर्जा दिलाना हमारा उददेश्य

By wmadmin123 - Wed Mar 18, 10:37 am

लोक प्रसंग : देश अब लड़कियों की शिक्षा की बात कर रहा है, लेकिन आपने लड़कियों पर आधरित कार्यक्रम की शुरूआत भारत सरकार की इस उदघोषणा के दो महीने पहले ही कर दी। यह कैसे संभव हो पाया?
के. सि(ार्थ : देश अब लड़कियों की शिक्षा पर बल देने की बात कर रहा है। सरकार ने भी इस दिशा में पहल की है। लेकिन इससे पहले ही म्म्म् ने बिहार में कन्याओं की शिक्षा के लिए एक बड़ी पहल शुरू कर दी है। कोर्इ भी संवेदनशील व्यकित आसानी से यह महसूस कर सकता है कि लड़कियों को बराबरी का दर्जा नहीं हासिल है। शिक्षा के जो भी अवसर उनको उपलब्ध् हुए हैं वो पर्याप्त नहीं है। विशेष रूप से उच्च शिक्षा तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उनको पर्याप्त मौके नहीं मिलते हैं। इसी बात को èयान में रखकर म्म्म् ने बिहार में इस कार्यक्रम की शुरूआत की। यह बात तो थी ही परंतु इस संकल्पना की पहल बिहार के माननीय शिक्षा मंत्राी वृशिण पटेल के अनुरोध् पर किया गया, और जिस समय यह पहल की गयी, उस समय भारत में यह अपने किस्म का सबसे अनूठा और अद्वितीय कार्यक्रम बना है। समाज को ऐसे विषयों पर आगे आकर पहल करनी चाहिए। जो लोग समाज में आगे बढ़ चुके हैं उनको अपने गृह प्रदेश या पूर्वजों की ध्रती पर अवश्य ही कुछ योगदान देना चाहिए। इन्हीं सब बातों को èयान में रखकर बिहार में बालिका शिक्षा का यह कार्यक्रम शुरू किया गया। इसके माèयम से बालिकाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष रूप से तैयार किया जाएगा।
लोक प्रसंग : पहली बात यह कि लड़कियों को चुनने का विशेष कारण क्या है? और दूसरा कि इसके लिए आपने बिहार को ही क्यों चुना?
के. सि(ार्थ : बिहार में समाज का स्वरूप जिस प्रकार सामंती है और यहां दहेज प्रथा कापफी व्यापक है। ऐसे स्थान पर महिलाओं की शिक्षा में किया गया थोड़ा निवेश समाज को बहुआयामी लाभ पहुंचा सकता है। लड़कियों को उच्च शिक्षित करने से उनके आत्म सम्मान में वृ(ि होगी। बिहार को इस कार्यक्रम के लिए चुनने का सर्वप्रथम कारण अपनी जड़ों को समृ( करने का विचार है। बिहार में लड़कियों की शिक्षा पर अभी बहुत कार्य किया जाना बाकी है। लड़कों को बाहर जाकर उच्च शिक्षा हासिल करने की आजादी है जबकि इस मामले में लड़कियां पीछे छूट जाती हैं। इसलिए बिहार में लड़कियों को उच्च शिक्षित करने और करियर निर्माण के बेहतरीन अवसर उपलब्ध् कराने का विचार किया गया।
इसके साथ ही लड़कों की तुलना में लड़कियों के अंदर बदलावों को ग्रहण करने की क्षमता भी अधिक होती है। इससे उनके अंदर परिवर्तन शीघ्र ही दृषिटगोचर होने लगता है और इचिछत परिणाम भी हासिल किए जा सकते हैं।लड़कों की तुलना में लड़कियां अधिक मूल्यवान सामाजिक संपत्ति है। लड़कों की तुलना में लड़कियों को साथ लेकर इस कार्यक्रम को और अधिक सपफल बनाया जा सकता है। बिहार की लड़कियां बिहार में सामाजिक बदलावों का भी प्रतीक है। वे समाज को आगे बढ़ाने का एक सशक्त माèयम भी हैं। इन सभी बातों को देखते हुए बिहार को और वहां की लड़कियों को इस कार्यक्रम के लिए चुना गया।
लोक प्रसंग : यह बात वास्तव में कैसे सुनिशिचत की जा सकती है, कि इन चुने हुए अभ्यार्थियों का परीक्षापफल सुनिशिचत किया जाये?
के. सि(ार्थ : सभी अभ्यार्थियों का उच्च स्तरीय करियर सुनिशिचत करने के लिए व्यापक प्रयास किए जाएंगे। सभी छात्रााओं का मनोवैज्ञानिक परीक्षण किया जाएगा। उनके मन में कार्य को लेकर गंभीरता पैदा की जाएगी जिससे कि इस महत्वाकांक्षा को आगे बढ़ा सकें। छात्रााओं के भीतर सपफलता हासिल करने की आकांक्षा को जगाना ही एक ऐसा कार्य होगा जिसके लिए कड़ा संघर्ष करना होगा। इसके बाद छात्रााएं स्वत: ही अपने करियर के प्रति जागरूक होकर कार्य करने लगेंगी। उनको उचित मार्गदर्शन उपलब्ध् कराने का कार्य म्म्म् करेगा। छात्रााओं के समक्ष करियर के कर्इ विकल्प उपलब्ध् होंगे। उनमें से वे किसी भी क्षेत्रा में उच्च सपफलता प्राप्त कर सकती है। सिविल सेवा के अतिरिक्त व्यापार प्रबंध्न, पत्राकारिता, उच्च शिक्षा आदि क्षेत्राों में छात्रााएं सपफलता प्राप्त करेंगी।
उनकी शिक्षा में हुर्इ सभी खामियाें को पूरा करके उनकी नींव को मजबूत किया जाएगा कि छात्रााओं को सीखने के लिए कम से कम प्रयास करना पड़ेगा। सिविल सेवा की तैयारी के लिए अèययन, प्रशिक्षण और कोचिंग तीनों के समनिवत प्रयास की जरूरत होती है। इसके लिए दिल्ली, हैदराबाद, इलाहाबाद से सुप्रसि( अèयापकों का सहयोग लिया जाएगा।
म्म्म् की कक्षाओं में छात्रााओं को कल्पनाशीलता और व्याख्या पर जोर देना सिखाया जाएगा। उन्हें केवल निर्देशित करने के स्थान पर उनकी बहुमुखी प्रतिभा के विकास पर बल दिया जाएगा। इसके साथ ही बिहार की छात्रााओं के मनोविज्ञान के हिसाब से तैयार विशेष पाठयक्रम से उनको मदद मिलेगी।
छात्रााओं और अभिभावकों को विशेष रूप से प्रेरणाप्रद प्रशिक्षण भी उपलब्ध् कराया जाएगा जिससे वे घर में भी सीखने का वातावरण तैयार कर सकें। उन्हें धरणा आधरित दृषिटकोण के स्थान पर वास्तविकता आधरित दृषिटकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। छात्रााओं को अèययन के लिए जो पुस्तकें उपलब्ध् करार्इ जाएंगी उसके अतिरिक्त उन्हें किसी पाठयसामग्री की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके साथ ही छात्रााओं के विश्वविधालयी परीक्षाओं की भी बेहतर तैयारी करार्इ जाएगी। सिविल सर्विसेेज से संबंधित छात्राा विशेष की समस्याओं को भी दूर करने में सहायता उपलब्ध् करार्इ जाएगी।
लोक प्रसंग : आपको क्या लगता है, बिहार में यह कार्यक्रम कितना सपफल हो पाएगा? इसे क्रियानिवत करने में आपको क्या-क्या समस्याएं आ रही हैं?
के. सि(ार्थ : बिहार में इस कार्यक्रम के सपफल होने की संभावना बहुत ही अधिक है। इस कार्यक्रम को तैयार करने के पीछे विशेषज्ञों के कर्इ समूहों ने कठिन परिश्रम किया है। इसके लिए एक विशेष पाठयक्रम तैयार किया गया है। इस पाठयक्रम को पूरा करने के बाद छात्रााओं की योग्यता में इतनी अधिक वृ(ि होगी कि न उनके व्यकितत्व का पूर्ण कायाकल्प हो जाएगा, बलिक वे किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सपफलता हासिल करने में सपफल होंगी।
इस कार्यक्रम को क्रियानिवत करने की सर्वप्रमुख समस्या इसके प्रति लोगों का नजरिया है। बिहार में कोचिंग की परंपरा है, लोगों की मानसिकता कोचिंग या उसके तरह के क्रियाकलाप से प्रभावित है, और निर्धरित भी। लोगों की सोच भी एकांगी है, संकीर्ण है। उन्हें कोचिंग, ट्रेनिंग, टीचिंग और उमदजवतपदह के बीच अंतर नहीं मालूम है जिसके कारण इसमें निहित बहुआयामी परिदृश्य को लोग समझ नहीं पा रहे हैं। लोगों के दृषिटकोण को सकारात्मक बनाने के लिए कठिन और दीर्घकालिक प्रयास की जरूरत है। इसके साथ ही कार्यक्रम को सपफल बनाने के लिए अभिभावकों को भी आगे आना होगा।
लोक प्रसंग : बिहार के लोगों से कितना सहयोग मिल रहा है?
के. सि(ार्थ : इस कार्यक्रम को सपफल बनाने में सरकार और शिक्षण संस्थाओं का योगदान सराहनीय है। माननीय शिक्षा मंत्राी श्री वृशिण पटेल जी ने इस पहल को अपना पूरा समर्थन और सहयोग दिया। कर्इ शिक्षा संस्थाएं जैसे पटना वीमेंस कालेज, पटना साइंस कालेज, जेडी वीमेंस कालेज मगध् महिला एवं इनके प्राचार्य इस कार्य में स्वैचिछक सहयोग देने के लिए आगे आए। बिहार में हमें अपने गुरुजनों- डा. शमशाद हुसैन ;टण्ब् पटना एवं मगध् विश्वविधलयद्ध, डा. रास बिहारी सिंह ;टण्ब् नालन्दा ओपन विश्वविधालयद्ध, डा. सुदीप्त अधिकारी ;च्तव.टण्ब् पटना विश्वविधालयद्ध, डा. इमितयाज अहमद, ;इतिहासविदद्ध, डा. कमर एहसान, ;टण्ब् दुमका विश्वविधालयद्ध, गुरुतुल्य मित्राों जैसे डा. नीलरतन ;ए. एन. सिन्हा इंसिटटयूटद्ध, अपने मित्राों जैसे डा. अतुल आदित्य पाण्डेय ;भूविज्ञान व्याख्याताद्ध, पूरे संकल्पना एवं परियोजना में कंध्े से कंध मिलाकर चलने वाले डवजपअंजवत श्री विवेकानन्द विवेक, श्री अभयानंद जी ;बिहार के भूतपूर्व डी.जी. पी.द्ध और सबसे ऊपर श्र(ेय श्री वृशिण पटेल जी बिहार के शिक्षा मंत्राी इन सभी का साथ, इनकी सलाह, एवं स्नेह जो अतुलनीय है।
कुछ समाजसेवियों ने भी इसमें अपना योगदान दिया है। इस प्रकार समाज के सभी वर्गों का सहयोग हमें प्राप्त हो रहा है।
लोक प्रसंग : जाहिर है सभी लड़कियाें में यह प्रतिभा नहीं होगी कि वह प्।ै बन सकें, उनके लिए भी आपने कुछ सोचा है?
के. सि(ार्थ : यह सही है कि सभी लड़कियों का चयन प्।ै में नहीं हो सकता। पाठयक्रम के एक स्तर पर पहुंच जाने के उपरांत, उनकी बुनियाद तैयार हो जाने के उपरांत, उनके नजरिये का संतुलित प्रबंध्न होने के पश्चात उनकी मनोवृत्ति की जांच की जाएगी, और उन्हें सलाह दी जाएगी कि कौन-सा कैरियर उनके लिए सबसे उपयुक्त है। ऐसी बालिकाओं के समक्ष राज्यों की लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं के अलावा उच्च शिक्षा, व्यापार प्रबंध्न, लेखन, पत्राकारिता और राजनीति में जाने का विकल्प खुलेगा। म्म्म् इन क्षेत्राों में करियर बनाने के लिए भी छात्रााओं को प्रशिक्षित करेगा।
लोक प्रसंग : बिहार के आर्थिक विकास में ऐसे योजनाओं की क्या भूमिका होगी, और कैसे?
के. सि(ार्थ : बिहार के 20 वषो± के कुशासन ने भी यहां के लोगों के संस्कार को प्रभावित नहीं कर सका है। संस्कार और सत्यनिष्ठा की सामाजिक पूंजी किसी भी विकास का आधर होता है। लड़कियों का यह संस्कार उनकी बौ(िक क्षमता, उनके अपने कार्य करने के पर्यावरण को निर्धरित ही नहीं करता बलिक उसे स्वस्थ, पवित्रा और पारदर्शी भी बनाता है।
यह कहा जाता है कि किसी देश को शिक्षित और सशक्त बनाने का सबसे सरल मार्ग उस देश की महिलाओं को शिक्षित और सशक्त बनाना है। इसलिए यदि बिहार की लड़कियां करियर के विभिन्न क्षेत्राों में सपफल होकर आत्मनिर्भर होंगी तो उनका परिवार, प्रदेश और हमारा देश स्वत: ही आर्थिक विकास के मार्ग पर चल पड़ेगा। ऐसा विकास जो बहुआयामी होगा, विश्व के विकास का पदचिà होगा।

Leave a Reply

Powered By Indic IME