October 21, 2017

आपराधिक छवि वाले युवा राहुल गांधी के आर्इकन

By wmadmin123 - Sat Mar 01, 1:41 pm

 

कांग्रेस महासचिव राहुल गांध्ी का सपना है कि पार्टी की राजनीति में युवाओं की पफौज खड़ी हो एवं स्वच्छ छवि तथा जमीन से जुड़े युवाओं को कांगे्रस में नेतृत्व प्रदान की जाए। राहुल के इस विचार को देश भर में सराहा गया। खासकर बिहार में कांगे्रस के हितैषियों के बीच उम्मीद की एक किरण प्रस्पफुटित हुर्इ कि अब यहां कांग्रेस नेतृत्व में चरित्रावान युवाओं की भागीदारी बढ़ेगी। चरित्रावान युवाओं के जरिए वर्षों से ‘कोमा में पड़ी कांगे्रस में प्राण पफूंके जाएंगे। इसी के तहत युवाओं के बीच सदस्यता अभियान चलाने तथा चुनाव के जरिए प्रदेश युवा कांग्रेस को चयनित करने की नींव डाली गर्इ।  जनवरी 2013 में बिहार प्रदेश युवा कांग्रेस का दूसरी बार चुनाव होने जा रहा है। इसी के जरिए बिहार प्रदेश युवा कांग्रेस का नया चेहरा सामने आएगा। दावेदार कर्इ हैं, लेकिन इनमें से प्रमुख दावेदार ऐसे हैं जिनकी छवि आपराधिक रही है। आपराधिक गतिविधि में शामिल होने के कारण जेल भी गये हैं। ऐसे हीं प्रमुख दावेदारों में से एक हैं बिहार प्रदेश युवा कांगे्रस के वर्तमान उपाèयक्ष कुमार आशीष। कुमार आशीष पर पूर्व में पटना के विभिन्न थानों में कर्इ आपराधिक मुकदमें दर्ज किये गये थे। 19 मार्च 2005 को पटना पुलिस ने इंटरमीडिएट का प्रश्नपत्रा लीक करने तथा उसका प्रश्नोत्तरी तैयार कर बेचने के आरोप में इन्हें रंगेहाथों गिरफ्रतार किया था। इस मामले की प्राथमिकी श्रीकृष्णपुरी थाने में दर्ज करार्इ गर्इ। ;प्राथमिकी संख्या-4805,धराएं- 420406409120;बीद्धभा.द.वि.द्ध कुमार आशीष के हाथों में लगी हथकड़ी वाली वह तस्वीर उन दिनों के कर्इ अखबारों में भी प्रकाशित हुर्इ थी। हालांकि जब ये गिरफ्रतार किए गए थे तब के समय में भी ये प्रदेश युवा कांग्रेस के उपाèयक्ष तथा मगध् विश्वविधालय के सिनेट के तत्कालीन सदस्य थे। श्रीकृष्णापुरी थाना के तत्कालीन थाना प्रभारी मदन मोहन प्रसाद तथा तत्कालीन सचिवालय डीएसपी अशरद जमा ने तब कहा था कि कुमार आशीष ने इससे पूर्व भी रसायन शास्त्रा विषय का प्रश्नपत्रा आउफट करवाया था। उस घटना के बाद बिहार कांग्रेस में खलबली मच गर्इ थी। अपनी नाक बचाने के लिए तब कांग्रेस ने कुमार आशीष को पार्टी से निकाल दिया था। पार्टी के तत्कालीन मुख्य प्रवक्ता प्रेमचंद्र मिश्र ने तब कहा था-’कुमार आशीष ने गिरफ्रतारी के बाद पुलिस के समक्ष अपना अपराध् कबूल कर लिया है। चूंकि कांग्रेस पार्टी में आपराधिक मामलों में लिप्त लोगों के लिए कोर्इ जगह नहीं है। इसीलिए पार्टी की परंपरा का पालन करते हुए कुमार आशीष को पार्टी से निकाल दिया गया है। कुमार आशीष के आपराधिक मामले में नाम आने की यह पहली घटना नहीं है, इससे पूर्व भी इनके उपर आपराधिक मामले दर्ज हुए थे। बात 3 अक्टूबर 1998 की है। रंजीत कुमार ;पिता-सदन राय, इंæपुरी, पटनाद्ध ने कुमार आशीष एवं उनके दोस्तों के विरु( पाटलिपुत्रा थाना में एक मुकदमा दर्ज कराया था।;प्राथमिकी संख्या 14498, धराएं -341323337 भा.द.वि.द्ध इसके अलावा जूली नाम की एक लड़की ने पूर्व के वर्षों में कुमार आशीष पर सदाकत आश्रम में शराब पीकर छेड़खानी करने का आरोप भी लगार्इ थी। उस समय यह मामला कापफी चर्चित हुआ था। बताया जाता है कि सदाकत आश्रम के दबाव में यह मामला थाना तक नहीं पहुंचा। आज यही कुमार आशीष बिहार में राहुल गांध्ी के आर्इकन बने हुए हैं। हैरत की बात यह है कि इस बार ये बिहार में सदस्यता अभियान के प्रभारी भी बनाए गए थे। बिहार प्रदेश युवा कांग्रेस के अèयक्ष ललन कुमार ने अपनी मनमानी करते हुए बिना हार्इकमान की अनुमति के कुमार आशीष को सदस्यता अभियान का प्रभारी बना दिया। हालांकि बिहार युवा कांग्रेस में कुमार आशीष अकेले ऐसे दागदार छवि वाले व्यकित नहीं हैं बलिक इसमें और भी कर्इ ऐसे चेहरे हैं जो राहुल गांध्ी की टीम के सदस्य बने हुए हैं। ऐसे ही एक सदस्य हैं ललित कुमार जो बिहार प्रदेश युवा कांग्रेस के वर्तमान महासचिव हैं। श्री कुमार कबूतरबाजी में करीब एक वर्ष पूर्व जेल की हवा खा चुके हैं।
एक हैं विभूति झा। ये मध्ुबनी विधनसभा कांगे्रस के अèयक्ष हैं। इनपर मध्ुबनी कांग्रेस लोकसभा अèयक्ष प्रदीप झा की हत्या करने का आरोप है। ऐसे दागदार छवि वाले लोगों से बिहार प्रदेश युवा कांग्रेस पटा हुआ है। ये सारे राहुल गांध्ी की टीम के सदस्य हैं। इनमें से कर्इ जनवरी 2013 में होने वाले प्रदेश युवा कांग्रेस के प्रबल दावेदार हैं। सवाल उठता है कि आखिर राहुल गांध्ी ऐसे ही दागी युवाओं के बूते बिहार में ‘कोमा में पड़ी कांग्रेस में प्राण पफूंक पायेंगे? हालांकि वर्तमान प्रदेश युवा कांग्रेस अèयक्ष ललन कुमार, दागी विभूति झा और ललित कुमार के बारे में कहते हैं-’इन लोगों को विरोधियों के द्वारा राजनीतिक षडयंत्रा के तहत पफंसाया गया है। जहां तक कुमार आशीष की बात है, संभव है शुरू में इनसे कुछ गलतियां हुर्इ हो लेकिन इन्होंने बीते दो वर्षों तक मेरे साथ भी काम किया है। इस अवधि में इनका आचरण संतोषप्रद था। वहीं दूसरी ओर कुमार आशीष भी कहते रहे हैं कि वे  राजनीतिक षडयंत्रा के शिकार हुए थे। अब इससे मुक्त हैं। उध्र पूर्व प्रदेश युवा महासचिव शम्मी कपूर कहते हैं -’आपराधिक छवि वाले व्यकितयों को संगठन के चुनाव से वंचित किया जाना चाहिए। उन्हें किसी सांगठनिक पद पर नहीं बिठाया जाना चाहिए। मैं किसी एक पार्टी की बात नहीं कर रहा हूं बलिक यहां जितनी भी राजनीतिक पार्टियां हैं उन सबों को इसपर èयान देना होगा। यदि ऐसा नहीं किया गया तो एक स्वच्छ और स्वस्थ समाज की कल्पना नहीं की जा सकती।
बड़ा सवाल यह है कि कुमार आशीष विभूति झा, ललित कुमार जैसे दागी युवा जो राहुल गांध्ी की टीम के सदस्य बने हुए हैं, क्या ऐसे युवा नर्इ पीढ़ी के आदर्श हो सकते हैं? यह सवाल अपना जवाब ढूंढ ही रहा है, लेकिन इस सवाल से इतर एक दूसरा सवाल यह कि आखिर राहुल गांध्ी के उस सपने की भ्रूण हत्या करने पर कौन तुले हैं? बताया जाता है कि ऐसे दागी युवा नेताओं के पीछे कोर्इ न कोर्इ वरिष्ठ कांगे्रसी नेता ही खड़े हैं। तो क्या माना जाए कि राहुल गांध्ी के उस सपने को विखंडित करने में यहां के वरिष्ठ कांगे्रस नेता ही जुटे हुए हैं?
पहले प्रदेश युवा कांग्रेस का चुनाव नहीं होता था। पहले मनोनीत किए जाते थे। प्रदेश युवा कांग्रेस का पहला चुनाव 3 अगस्त 2010 में हुआ था। ललन कुमार चुनाव के माèयम से बिहार प्रदेश युवा कांग्रेस के प्रथम अèयक्ष बने। इसमें दो राय नहीं कि ललन कुमार के अèयक्ष बनने से पहले प्रदेश युवा कांग्रेस मृतप्राय थी। इसकी अपनी कोर्इ स्वतंत्रा सियासत नहीं थी। प्राय: प्रभावशाली कांग्रेस के नेता अपने किसी खास बंदे को प्रदेश युवा कांग्रेस की कुर्सी पर बिठा कर अपनी राजनीति, पर्दे के पीछे से करते रहते थे। चुनावी प्रक्रिया के तहत प्रदेश कमिटी का चुनाव शुरू हुआ और ललन कुमार पहले चयनित युवा कांग्रेस अèयक्ष बने। हालांकि ललन कुमार जब प्रदेश युवा कांग्रेस अèयक्ष की कुर्सी पर काबिज हुए थे उस समय इनके पीछे पप्पू यादव की ‘युवा शकित का हाथ बताया गया था। लेकिन बाद के दिनों में ललन ने अपने क्रियाकलाप से यह सि( करने का प्रयास भी बेशक किया कि वे किसी कि ‘शकित से नहीं बलिक अपनी ‘शकित की बदौलत इस पद पर आये हैं। लेकिन इस बार ललन कुमार चुनाव लड़ने नहीं जा रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि कौन होगा प्रदेश युवा कांग्रेस का नया कप्तान? कैसा होगा बिहार प्रदेश युवा कांग्रेस का नया चेहरा? क्योंकि यह चेहरा बिहार में ‘कोमा में पड़ी कांग्रेस पार्टी के स्वास्थ्य को प्रभावित करेगा। यदि स्वच्छ छवि और वजूद वाले युवा इस पद पर चुन कर आते हैं तो बेजान हो चुकी कांग्रेस में उफर्जा का संचार करने के लिए एक सार्थक भूमिका निभा सकते हैं। लेकिन यदि दुर्भाग्य से कोर्इ दागदार व्यकित इस पद पर चुन कर आ गया तो ‘कोमा में पड़ी कांग्रेस को भगवान भरोसे ही रहना होगा। जहां तक इस बार अèयक्ष पद के दावेदारों की बात है, मुख्य रूप से दो नाम उभर कर सामने आये हैं। वे हैं कुमार आशीष और इंजीनियर संजीव सिंह। कुमार आशीष वर्तमान प्रदेश कांग्रेस कमिटी में युवा कांग्रेस के उपाèयक्ष पद पर काबिज हैं, जबकि इंजीनियर संजीव सिंह सचिव पद पर। इंजीनियर संजीव की पहचान एक मेधवी युवा के रूप में की जाती है। ये बिहार-झारखंड संयुक्त इंजीनियरिंग परीक्षा के टापर रहे हैं। एनआर्इटी जमशेदपुर से इन्होंने इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की। पिफर न्यू जर्सी ;यूएसद्ध में सिस्को सिस्टम में तीन साल तक काम किया तथा एक्सएलआरआर्इ जमशेदपुर से मैनेजमेंट की परीक्षा पास की। पिफर बैंगलोर के वोलेंट्री आर्गेनाइजेशनस में कन्सलटेंट के रूप में कार्य किया। यहीं काम करते हुए एक घटना ने इंजीनियर संजीव की दिशा बदल दी। दरअसल, उन दिनों राहुल गांध्ी बैंगलोर में प्रोपफेशनल्स को संबोधित करने आये हुए थे। इंजीनियर संजीव भी वहीं मौजूद थे। राहुल गांध्ी के भाषण से इतने प्रभावित हुए कि इन्होंने जाब छोड़कर कांग्रेस की राजनीति में आने का पफैसला कर लिया। 2010 में इन्होंने कांग्रेस के टिकट पर विक्रम विधनसभा क्षेत्रा से चुनाव भी लड़ा था, लेकिन उसमें सपफलता नहीं मिली। कांग्रेस संगठन में शुरू से ही इनकी रुचि रही है। लिहाजा, ललन कुमार की टीम में ये सचिव पद पर काबिज हुए। इस बार प्रदेश युवा कांग्रेस के अèयक्ष पद के लिए चुनावी मैदान में हैं। इनके पक्ष में वर्तमान प्रदेश युवा कांग्रेस अèयक्ष ललन कुमार बताए जाते हैं।
उध्र कुमार आशीष को एक पूर्व केन्द्रीय मंत्राी का आशीर्वाद प्राप्त है। पूर्व में जब शकील अहमद बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अèयक्ष थे, उन्हीं के समय में कुमार आशीष को मगध् विश्वविधालय के तत्कालीन सीनेट का मनोनीत सदस्य भी बनाया गया था। हालांकि, आशीष ने राजनीति का ककहारा सीखना पूर्व प्रदेश कांग्रेस अèयक्ष सदानंद सिंह के दरबार से शुरू किया था। सदानंद सिंह जब प्रदेश अèयक्ष थे उनके दूसरे कार्यकाल में इन्हें प्रदेश कांग्रेस कमिटी का सहप्रवक्ता भी बनाया गया था। ललन कुमार से पूर्व तरुण कुमार मनोनीत प्रदेश युवा कांग्रेस अèयक्ष हुआ करते थे, उनके समय में भी कुमार आशीष महासचिव पद पर काबिज थे। यह अलग बात है कि उस समय युवा कांग्रेस प्रदेश में मृतप्राय थी। कुमार आशीष सदस्यता अभियान समिति के प्रभारी भी रहे। अब सवाल उठता है कि इन दोनों में किनका पलड़ा भारी रहेगा। पहले वर्तमान प्रदेश युवा कांग्रेस की टीम पर एक नजर डाल लें कि इस टीम के किन-किन सदस्यों का समर्थन किसे प्राप्त है। अèयक्ष ललन कुमार इस बार चुनाव नहीं लड़ रहे हैं और इंजीनियर संजीव के पक्ष में मतदाताओं को गोलबंद करने में जुटे हुए हैं। कहना न होगा कि प्रदेश कांगे्रस युवा अèयक्ष रहने के कारण ललन कुमार का पूरे बिहार में युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच अपनी पहचान है। अतिरेक कुमार महासचिव पद पर काबिज हैं। ये भी चुनाव नहीं लड़ने जा रहे हैं। अतिरेक कुमार भी कुमार आशीष के विरोध्ी हैं। दरअसल, श्री कुमार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डा. अशोक कुमार के पुत्रा हैं। पिछले विधनसभा चुनाव में डा. अशोक कुमार तथा प्रेमचंद्र मिश्र ने टिकट वितरण में प्रमुख भूमिका निभाया था। कुमार आशीष दीघा विधनसभा क्षेत्रा से चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला। कुमार आशीष इसका जिम्मेदार डा.अशोक कुमार तथा प्रेमचंद मिश्र को ही मानते हैं। तब कुमार आशीष ने इन दोनों नेताओं पर विधनसभा चुनाव में टिकट बेचने का भी आरोप लगाया था। लिहाजा, अतिरेक कुमार और डा. अशोक कुमार कुमार आशीष से उखड़े हुए हैं। पर इसका अर्थ यह कदापि नहीं है कि ये इंजीनियर संजीव को मदद करेंगे। दूसरे वर्तमान महासचिव डा. राशिद पफाकरी भी इस बार चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। डा. पफाकरी की पहचान वरिष्ठ कांग्रेसी नेता प्रेमचंद्र मिश्र के खासमखास के रूप में की जाती है। चूंकि प्रेमचंद्र मिश्र के संबंध् डा. शकील अहमद से कटू हैं और कुमार आशीष डा. शकील अहमद के आदमी हैं लिहाजा, डा. राशिद पफाकरी भी कुमार आशीष के विरोध्ी को ही अपना समर्थन देंगे। इस समीकरण के तहत इनका समर्थन भी इंजीनियर संजीव को ही प्राप्त होगा। एक महासचिव हैं डा. शशि शेखर।  डा. शशि शेखर गया मुपफसिसल के पूर्व विधयक अवध्ेश कुमार सिंह के सुपुत्रा हैं। इनका समर्थन कुमार आशीष को प्राप्त है। आरक्षित कोटे से आने वाले एक महासचिव हैं ललित कुमार। ललित कुमार इस बार स्वयं उम्मीदवार हैं। कटिहार और किशनगंज के कुछ क्षेत्राों में इनके वोटर हैं। प्रदेश युवा कांग्रेस में शेष उस हैसियत के नहीं हैं कि मतदाताआें के एक बड़े हिस्से को प्रभावित कर सके। उध्र ललन कुमार से पूर्व मनोनीत अèयक्ष तरुण कुमार भी कुमार आशीष के विरोध्ी हैं। जहां तक प्रदेश कमिटी से पर्चा दाखिल करने वाले अन्य लोगों की बात है इसमें डा. आशुतोष कुमार, मो. रिजवान, रंजीत कुमार झा आदि का नाम लिया जाता है। डा. आशुतोष कुमार वरिष्ठ कांग्रेसी नेता रामजतन सिन्हा के करीबी बताये जाते हैं। डा. कुमार पटना विश्वविधालय की राजनीति में कापफी समय से सक्रिय हैं। मो. रिजवान सीवान लोकसभा कांग्रेस के अèयक्ष पद पर काबिज हैं। ये पूर्व सांसद रंजीता रंजन के करीबी बताये जाते हैं। सीवान लोकसभा क्षेत्रा के अèयक्ष होने के कारण इस क्षेत्रा में इनका प्रभाव है। रंजीत कुमार झा एनएसयूआर्इ एवं युथ कमिटी में करीब 7-8 वर्षों से सक्रिय हैं। पिछले चुनाव में ये डेलीगेट थे। इसके अलावा एक पप्पू यादव ग्रुप से भी उम्मीदवार खड़ा होगा। इन तमाम गतिविधियाें के बीच बड़ा सवाल यह है कि कौन बनेगा प्रदेश युवा कांग्रेस का नया कप्तान? इस मुतलिलक जो सबसे बड़ी चिंता का विषय है वह यह कि इस पद पर क्या सापफ-सुथरी छवि वाले लोग बैठ पाएंगे या किसी दागी का हो जाएगा इसपर कब्जा? सवाल यह भी है कि क्या राहुल गांध्ी का वह सपना पूर्ण हो पाएगा कि युवा कांग्रेस की कमान वैसे व्यकितयों को दिया जाए जिनकी छवि स्वच्छ हो, चरित्रा निष्कलुष हो और वह जमीन से जुड़ा हुआ व्यकित हो? हालांकि युवा कांग्रेस चुनाव को स्वच्छ बनाए रखने की जिम्मेदारी पूर्व चुनाव आयुक्त क्रमश: केजे राव तथा जेएम लिंगदोह द्वारा संचालित संस्था पफेम ;पफाउंडेशन पफार एडवांस्ड मैनेजमेंट आपफ इलेक्शन्सद्ध को दी गर्इ है। बावजूद इसके वर्तमान प्रदेश युवा कांग्रेस में दागी युवाओं की पफौज खड़ी है। और मजे की बात यह है कि ये दागी और अपराध्ी छवि के युवा खम ठोककर चुनाव लड़ते भी रहे हैं। ऐसे में राहुल के इस नये अभियान का मतलब क्या रह जाता है? त्र

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