December 12, 2017

ईं. सच्चिदानंद राय ने दिया नीतीश को करारा जवाब

By wmadmin123 - Fri Aug 21, 7:40 am

दिलीप कुमार झा

ईंजीनियर सच्चिदानंद राय नाम है एक ऐसे आईआईटीएन ईंजीनियर का जिनके पास सारी सुख-सुविधएं मौजूद हैं लेकिन उनपर जनसेवा का ऐसा जुनून चढ़ा कि इन तमाम सुख- सुविधओं को छोड़कर वे जनता की व्यथा को समझने उनके बीच पहुंच गये। सारण के गांव-गांव एवं गली-गली में घूमते रहे। कच्ची सड़कों की ध्ूल और जेठ की भरी दुपहरी भी ईं. सच्चिदानंद के कदम को रोक नहीं पाये। वे आगे बढ़ते गये और कारवां बनता गया। विनम्र स्वभाव और दृढ़ इच्छा शक्ति के मालिक ईं. सच्चिदानंद राय यहां के लोगों पर अपना प्रभाव छोड़ने में कामयाब हो गये। लिहाजा, बीते विधनपरिषद चुनाव में सारण की जनता ने इन्हें विजयी माला पहना दी। ईं. राय ने यहां से अपनी जीत दर्ज कराकर विधनपरिषद की एक सीट मात्रा नहीं जीती बल्कि नीतीश कुमार को भी करारा जवाब दिया है। ऐसा जवाब जिसे नीतीश सालों-साल याद रखेंगे।
दरअसल, नीतीश को यह वहम हो गया था कि उनके आगे किसी और का कोई अस्तित्व नहीं है। सारण की जीत को नीतीश ने अपनी प्रतिष्ठा का विषय बना दिया था। ईं. राय ने उनका यह वहम तो तोड़ ही दिया साथ ही उन्होंने यह भी सि( कर दिया कि वे एक व्यक्ति मात्रा नहीं हैं बल्कि एक जमात का नाम है ईंजीनियर सच्चिदानंद राय। महज दूसरे प्रयास में बड़े अंतर से उन्होंने यह जीत हासिल की। इससे पूर्व 2010 के विधनसभा चुनाव में ई. सच्चिदानंद बतौर निर्दलीय प्रत्याशी चुनावी संग्राम में कूदे थे। यह अलग बात है कि उसमें इन्हें सपफलता नहीं मिली। बीते विधनपरिषद चुनाव में इन्होंने भाजपा समर्थित उम्मीदवार के रुप में जदयू के सलीम परवेज को 916 मतों से पराजित किया। ई. सच्चिदानंद को कुल 2589 मत मिले जबकि विधन परिषद के हाल तक उपसभापति रहे सलीम परवेज को मात्रा 1673 मत मिले। जिलाध्किारी दीपक आनंद से विजेता का प्रमाणपत्रा हासिल कर ई. सच्चिदानंद ने अध्किृत रूप से समाजसेवा का वह अवसर प्राप्त किया जिसकी तमन्ना में वे 2010 में कोलकाता से सीध्े स्वग्राम बड़ा लौवां ;बनियापुरद्ध पहुंचे थे। कोलकाता के प्रख्यात इडेन ग्रुप के प्रबंध् निदेशक व मशहूर बिजनेसमैन ने अपने बिजनेस का विस्तार बिहार में भी किया और सारण मंे अपनी सक्रियता लगातार बरकरार रखी। अचानक आये इस अनजान चेहरे से तब इलाके के मतदाता परिचय नहीं थे बावजूद इसके इन्होंने तकरीबन 7 हजार वोट हासिल किया। चुनावी मैदान में इनकी उपस्थिति के कारण ही जदयू का ब्रह्मर्षि समाज का उम्मीदवार वीरेन्द्र ओझा साढ़े तीन हजार मतों से परास्त हो गये थे। इनके बढ़ते प्रभाव को देखते हुए जदयू से इन्हें पार्टी में शामिल होने का आॅपफर मिला। पिफर नीतीश कुमार से नजदीकी हुई और वे उनके दल जदयू में शामिल हो गये। जदयू के दलीय कार्यक्रमों में बढ़कर हिस्सा लेने वाले ई. सच्चिदानंद ने विशेष राज्य के दर्ज के मुद्दे पर अध्किार रैली में अपनी जोरदार उपस्थिति दर्ज करायी थी। पर लोकसभा चुनाव 2014 के करीब वर्ष भर पहले कतिपय मतभेदों की वजह से जदयू छोड़ ये भाजपा में शामिल हो गये। पिफर वर्ष 2013 के अक्टूबर माह की 27 तारीख को हुई भाजपा की हुंकार रैली में अपनी पूरी ताकत झोंक दी। रैली के प्रचार से लेकर उसकी पूर्णता तक ई. सच्चिदानंद ने अपनी क्षमता से भाजपा के शीर्ष नेताओं को प्रभावित किया जिसका परिणाम यह हुआ कि वे जल्द ही भाजपा आलाकमान के नजदीकी हो गये। हालांकि इन्हें लोकसभा चुनाव 2014 में कतिपय कारणों से टिकट नहीं मिला लेकिन भाजपा आलाकमान ने उसी समय यह संकेत दे दिया था कि वे आगामी विधन परिषद चुनाव के लिए तैयार रहे। पिफर क्या था ई. सच्चिदानंद अपने गांव में ही रच बस गये। वे अपने सहयोगी अंजेश शांडिल्य के साथ पंचायत प्रतिनिध्यिों के बीच रहकर उनसे निकटता बढ़ायी। ठाठ-बाट में रहने वाला शख्स ग्रामीण परिवेश में लगातार रह कर यह साबित कर दिया कि जनता के बीच रहकर वे जनता के लिए काम करने का माद्दा रखते हैं।

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