October 21, 2017

एलएनएमयू दरभंगा ः घोटाले का जिन्न

By wmadmin123 - Fri Aug 21, 7:37 am

रामकुमार झा

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में इन दिनांे परीक्षा के दौरान कदाचार करते छात्रा-छात्राओं के चलते जहां विश्वविद्यालय प्रशासन को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है वहीं नित्य नये हो रहे भ्रष्टाचार के खुलासे से विश्वविद्यालय के पूर्व के कई पदाध्किारियों का चेहरा भी बेनकाब होता जा रहा है। इन बेनकाब होते चेहरों में कुछ चेहरे ऐसे भी हैं जो अब इस नश्वर संसार को छोड़कर परम धम को जा चुके हैं लेकिन उनके किये अनैतिक कार्यों की छाया अभी भी विश्वविद्यालय की दबी पफाईलों से निकलकर चिख-चिखकर उनके कारनामांे का ऐलान कर रही है। वैसे तो आध्किारिक रूप से उन नामांें का खुलासा विश्वविद्यालय प्रशासन के द्वारा नहीं किया गया है लेकिन इसके कुछ पदाध्किारियों की मानें तो इस सूची में कुछ वैसे भी नाम शामिल हैं जो अपने समय में लोगों के बीच खासे लोकप्रिय एवं आदरणीय हुआ करते थे। इसमें कुछ भूतपूर्व कुलपति, भूतपूर्व कुलसचिव, विश्वविद्यालय के पदाध्किारी एवं कुछ महाविद्यालय के वरीय शिक्षकों के नाम भी शामिल है जिनके द्वारा कई कार्यों के नाम पर लोगों को दिये गये अग्रिम एवं स्वयं के लिए अग्रिम राशि के सम्बंध् में किसी प्रकार का लेखा, जोखा उपलब्ध् नहीं हो पा रहा है जिसे सत्यापन के लिए वर्तमान विश्वविद्यालय पदाध्किारियांे के द्वारा जोर-शोर से छानबीन की जा रही है। इसी वजह से कई लोगों के नाम को उजागर भी नहीं किया जा रहा है। ऐसा नहीं कि इस बात की जानकारी वर्तमान कुलपति को ही हुआ है। पूर्व के कुलपति डाॅ. समरेन्द्र प्रसाद सिंह के सेवानिवृति से कुछ दिन पूर्व के उनके वक्तव्यों को अगर याद किया जाय तो वर्तमान के इन घपले, घोटालें की अंदेशा का अनुभव किया जा सकता है जिसमें उन्हांेने कहा था कि ‘कुलपति को वित्तीय अध्किार से अलग कर केवल शैक्षणिक कार्य की जबाबदेही होनी चाहिए जिससे विश्वविद्यालय में स्वच्छ, शैक्षणिक वातावरण स्थापित किया जा सके’। वर्तमान में विश्वविद्यालय के अध्निस्थ संचालित एवं विश्वविद्यालय परिसर में ही अवस्थित दुरस्थ शिक्षा निदेशालय में वित्तीय अनियमितता की राशि अब लाख नहीं बल्कि करोड़ों में पहुंच चुकी है जिसमंे दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के पूर्व निदेशक के अलावा कई कर्मियों की संलिप्त्ता उजागर हुई है। वहीं ताजातरीन मामला निवर्तमान निदेशक डाॅ. अरविन्द कुमार झा के कार्यकाल में नौ कर्मियांे को आउट सोर्सिंग पर बहाली का खुलासा हुआ है। इन मामलांे में श्री झा के द्वारा कहां और कैसे चूक हुई ये तो जांच के बाद ही सापफ हो पायेगा। उध्र, चन्द्रधरी मिथिला विज्ञान महाविद्यालय से जुड़ा एक मामला तब सामने आया जब विश्वविद्यालय के एक पदाध्किारी समेत तीन, चार महाविद्यालय के वर्तमान के प्रधनाचार्यों के द्वारा लगभग तीन दशक पूर्व महाविद्यालय के पुस्तकालय से लिये गये पुस्तक का अबतक वापस नहीं किये जाने का मामला प्रकाश में आया है। इन पुस्तकों में कुछ ऐसी भी पुस्तक हैं जो वर्तमान में बाजार मंे भी उपलब्ध् नहीं हो पा रही है। इन सभी मामलों को अगर देखा जाय तो एक तरह से विश्वविद्यालय के वर्तमान प्रशासन के सामने कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो गयी है आखिर इन मुद्दों का समाधन किस प्रकार किया जाय। वैसे अगर देखा जाय तो इन समस्याओं के पीछे का एक कारण प्रदेश में स्थायी रूप से कुलाध्पिति की नियुक्ति नहीं होना भी है। जिस वजह से भी प्रदेश के उच्च शिक्षा में अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो गयी है। समस्तीपुर काॅलेज के बाद सीएम साईंस काॅलेज एवं बाद में हर्षपति सिंह महाविद्यालय मध्ेपुर में छात्रांे के द्वारा किये जा रहे कदाचार से उत्पन्न समस्याआंे को देखते हुए वर्तमान में चल रहे स्नातक द्वितीय खंड की परीक्षाओं में कदाचार से निपटने के लिए वर्तमान में चल रहे विश्वविद्यालय प्रशासन के द्वारा परीक्षा केन्द्रों पर प्रतिकुलपति समेत कई पदाध्किारियों का लगातार निरीक्षण कार्य किया जा रहा है। अगर देखा जाय तो परीक्षा के दौरान छात्रांे के द्वारा कदाचार किये जाने का एक कारण महाविद्यालय में शिक्षकों की कमी के कारण नियमित रूप से वर्ग संचालन नहीं हो पाना भी देखा जा रहा है। विश्वविद्यालय की इन सभी समस्याओं से निपटने के लिए कुलपति डाॅ. साकेत कुशवाहा के द्वारा लगातार पदाध्किारियों के साथ बैठक कर समस्या समाधन का सुझाव दिये एवं शिक्षक एवं कर्मियों से सुझाव लिये जाते रहे हैं। अब देखना है कि आनेवाले समय में इसका क्या प्रभाव देखने को मिल पाता है। रही बात दुरस्थ शिक्षा निदेशालय के पूर्व निदेशक डाॅ. सुनील चन्द्र मिश्रा के कार्यकाल के दौरान निदेशालय मंे हुई वित्तीय अनियमितता की बात तो ये जांच के बाद ही स्पष्ट हो पायेगा। श्री मिश्र अब सेवानिवृत भी हो चुके हैं लेकिन उनके दौरान दूरस्थ शिक्षा निदेशालय में की गयी गांध्ी सदन की स्थापना की गरिमा दीर्घकाल तक याद रखी जायेगी।

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