September 23, 2018

कन्या बन गई मां, फिर भी न मिली राशि, रहता है मुर्दे को यहां, कफन का इंतजार!

By wmadmin123 - Mon Nov 24, 12:43 pm

अपनी ही कसौटी पर पफेल हो चुकी है बिहार सरकार। नहीं हो रहा कतिपय लोक सेवा अध्किारों के निर्धरित समय-सीमा का अनुपालन। मां बन चुकने के बाद भी नही ंमिल पाती मुख्यमंत्राी कन्या विवाह योजना मद की राशि और मुर्दे को भी करना पड़ता है कपफन-दपफन के लिए कबीर अंत्येष्टि मद की राशि का इंतजार। यह किसी प्रतिपक्षी नेता का राजनीतिक बयान नहीं, सरकार द्वारा जनहित में चलायी जा रही मुख्यमंत्राी कन्या विवाह योजना और कबीर अंत्येष्टि जैसी लोक लुभावन कार्यक्रमों की जमीनी हकीकत है। आज से करीब 7 वर्ष पूर्व सूबे के तत्कालीन मुख्यमंत्राी नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्राी कन्या विवाह येजना की शुरूआत की थी। तब इस मद में प्रति लाभार्थी 5 हजार की राशि दिये जाने का प्रावधन किया गया था। अब यह राशि बढ़ा कर दो गुणी यानी 10 हजार कर दी गई है। इसी तरह कबीर अंत्येष्टि मद में दी जाने वाली राशि डेढ़ हजार से बढ़ा कर तीन हजार कर दिया गया है। सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के उद्देश्य से इन मदों में राशि की बढ़ोतरी तो कर दी गई लेकिन लाभार्थियों को इसका कोई पफायदा नहीं हो रहा है। आवंटन के अभाव में लाभुकों को भुगतान नहीं हो रहा है। चार-चार सालों से प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगाने के बाद लाभार्थी थक-हार कर घर बैठ गये हैं। इन योजनाओं से उनका भरोसा उठ गया है।
मुजफ्रपफरपुर जिले के पूर्वी सीमा पर अवस्थित है मंदरा प्रखंड। इस प्रखंड का एक पंचायत है बड़गांव। यहां के मुखिया हैं नीतेश कुमार। वे बताते हैं कि उनके पंचायत में कबीर अंत्येष्टि योजना से संबंध्ति दो सौ से ज्यादा मामले लंबित हैं। 2011 में हुए पंचायत चुनाव के बाद से अब तक इस मद में मात्रा दो बार राशि मिली है। पहली बार 12 हजार और दूसरी बार 34 हजार। कुल 46 हजार रुपये इस पंचायत को कबीर अंत्येष्टि मद में दिये गये। विगत ढाई वर्षों से इस मद में पंचायत को राशि प्राप्त नहीं हुई है। लिहाजा आकस्मिक मौत की स्थिति में किसी मृतक के परिजन जब मुखिया से कबीर अंत्येष्टि मद से राशि की मांग करते हैं तो उन्हें हाथ खड़ा कर लेना पड़ता है। नीतेश कुमार बताते हैं कि उनके सामने कुछ ऐसे भी मामले आये हैं जिसमें उन्हें अपने पास से कपफन-दपफन के लिए हजार-पांच सौ रुपये देना पड़ा है। मुख्यमंत्राी कन्या विवाह योजना की बावत वे बताते हैं कि उनके पंचायत में इस योजना के तहत अब तक सवा तीन सौ लड़कियों के विवाह का निबंध्न हुआ है। इससे संबंध्ति भुगतान का सभी आवेदन पत्रा आरटीपीएस काउंटर के माध्यम से प्रखंड कार्यालय में जमा है। अब तक मात्रा 75 लाभार्थियों को ही भुगतान हो पाया है। शेष सभी मामले राशि के अभाव में लंबित है। इसी पंचायत के विष्णुपुर मेहसी निवासी पफकीरा राय की पुत्राी रंजु कुमारी का विवाह आज से चार वर्ष पूर्व हुआ था। उसकी एक बेटी ढ़ाई साल की है। शादी के तत्काल बाद रंजु ने मुख्यमंत्राी कन्या विवाह योजना का लाभ लेने के लिए अपना आवेदन आरटीपीएस काउंटर के माध्यम से प्रखंड कार्यालय में जमा कर दिया लेकिन आज तक उसे इस योजना का लाभ नहीं मिला है। रंजु कोई अकेला उदाहरण नहीं है। इस पंचायत में अनेक ऐसी लड़कियां हैं जिनका विवाह दो- तीन वर्ष पहले हुआ। अब वे मां भी बन चुकी हैं लेकिन उन्हें अब तक इस योजना का लाभ नहीं मिला है। यह पफेहरिस्त कापफी लंबी है। इसी पंचायत के विष्णुपुर मेहसी निवासी रामसेवक पासवान की बेटी पूनम देवी, नारायण सिंह की बेटी बिट्टु कुमारी, मोहन राम की पुत्राी सीमा देवी, नंदकिशोर पंडित की पुत्राी शोभा कुमारी और परशुराम की बेटी चंदा कुमारी एवं रेखा कुमारी को विवाह के कई वर्ष बाद भी मुख्यमंत्राी कन्या विवाह योजना की राशि का इंतजार है। इनमें से कई लड़कियां मां भी बन चुकी है। पंचायत के मुखिया से लेकर प्रखंड विकास पदाध्किारी तक उन्हें स्पष्ट रूप से यह बताने की स्थिति में नहीं है कि आखिर कब तक उनको इस योजना का लाभ मिल पायेगा? लोक सेवाओं के अध्किार से संबंध्ति प्रखंड कार्यालय की दीवार पर जो सूचनायें और जानकारियां अंकित हैं उसमें विभिन्न सेवा प्रदान करने की समय सीमा निर्धरित है। मुख्यमंत्राी कन्या विवाह योजना संबंध्ी आवेदन के निष्पादन की समय सीमा 15 कार्य दिवस निर्धरित है। इसमें यह पेंच भी पफंसाया हुआ है कि निध् िकी उपलब्ध्ता पर ही प्रखंड विकास पदाध्किारी के स्तर से निर्धरित समय सीमा के अंदर इस योजना के दावे का निष्पादन किया जायेगा। जब निध् िही उपलब्ध् नहीं हो तो ऐसी सेवाओं के निष्पादन हेतु निर्धरित समय सीमा की सार्थकता पर बहस तलब हो सकती है। बंदरा के चंदा देवी का मामला भी कुछ ऐसा ही है। मुख्यमंत्राी कन्या विवाह योजना के तहत चंदा देवी द्वारा आरटीपीएस काउंटर पर जमा किये गये आवेदन पत्रा ;दिनांक 29.11.13 संख्या 01021114111300489द्ध की पावती रसीद में सेवा प्रदान करने की प्रस्तावित तिथि 16.12.2013 अंकित है। अब साल भी पूरा होने को है लेकिन यह मामला आज तक निष्पादित नहीं हो पायी है। मुख्यमंत्राी कन्या विवाह योजना से संबंध्ति मामले इसी कोटि के हैं। सरकार घोषायें तो करती हैं लेकिन उसके अनुरूप राशि का आबंटन नहीं होने से इन योजनाओं से आम लोगों का विश्वास उठता जा रहा है। इसी प्रखंड के रामपुरदयाल पंचायत के मुखिया पफेकू राम के अनुसार कबीर अंत्येष्टि योजना के 80 आवेदन उनके पंचायत में निध् िके अभाव में लंबित हैं। अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में इस पंचायत की एक महादलित ;मुसहरद्ध महिला की आकस्मिक मौत और कपफन की व्यवस्था नहीं होने के कारण 24 घंटे बाद शव को दपफनाये जाने को लेकर यह पंचायत सुर्खियों में आया था। इस पंचायत की महादलित महिला सुकनी देवी की गांव में ही बोलेरो की ठोकर लगने से मौत हो गयी थी। सुकनी देवी अपनी विध्वा बहु के साथ खेतों में मजदूरी कर किसी तरह जीवन-यापन कर रही थी। परिवार में पुरूष सदस्य के रूप में 11 साल का एक विकलांग पोता था। घोर गरीबी उस पर यह दुर्घटना। दरवाजे पर विध्वा सास की लाश पड़ी छोड़ कर विध्वा बहू लीलावती मृतका के दाह संस्कार वास्ते मदद की भीख मांग रही थी। ऐसे ही असहाय के लिए बनी है कबीर अंत्येष्टि योजना। पंचायत में पहले से ही इस योजना के 80 मामले लंबित चल रहे थे लिहाजा, मुखिया ने भी हाथ खड़ा कर लिया। बंदरा के तत्कालीन बीडीओ ने पंचायत सचिव से डेढ़ हजार रुपये देने को कहा। खैर, किसी तरह लाश दपफनायी गई। चर्चा रही कि बिना कपफन के ही सुकनी की लाश दपफन की गई है। इस मामले की जांच समाज कल्याण विभाग के सहायक निदेशक से करायी गई। तब पंचायत की सड़कों पर यह बात तैर रही थी कि आनन-पफानन में मुखिया जी ने मामले को मैनेज किया। मृतिका सुकनी की बहू लीला देवी से बयान दिलवा दिया गया कि लाश को कपफन दी गई। गाजे-बाजे के साथ दपफनाया गया। जांच पदाध्किारी ने अपने जांच प्रतिवेदन में लिखा कि बिना कपफन के लाश दपफनाने की खबर बेबुनियाद है। महादलित के नाम पर राजनीति करने वाले लोग भी महादलित मुखिया के पंचायत में एक महादलित महिला की वाहन दुर्घटना में मौत और उसके बाद उत्पन्न परिस्थितियों से पूरी तरह आंखें मूंदे रहे। यही सत्ता का वर्ग चरित्रा है। अब रुख करते हैं जिले के मुरौल प्रखंड की तरपफ। इस प्रखंड का एक पंचायत है मीरापुर। 1974 के छात्रा आंदोलन में सक्रिय रहे मोहन मुकुल दो टर्म से इस पंचायत के मुखिया और प्रदेश मुखिया संघ के प्रवक्ता भी हैं। मुख्यमंत्राी कन्या विवाह योजना से संबंध्ति ग्राम पंचायत के मुखिया के दायित्व के बारे में वे बताते हैं कि ऐसे विवाह का निबंध्न पंचायतों में होता है। मुखिया अपने पंचायत के विवाह निबंध्न अध्किारी होते हैं। यह योजना 2008 से लागू है। सभी बीपीएल परिवारों और 60 हजार रुपये से कम वार्षिक आय वालों को इस योजना का लाभ दिया जाना है। पहले यह राशि प्रति लड़की 5 हजार रुपये थी जो अब बढ़ाकर दस हजार रुपये कर दिया गया है। पंचायत में निबंध्न के क्रम में बिना तिलक-दहेज की शादी का शपथ-पत्रा, उम्र प्रमाण-पत्रा, आय प्रमाण-पत्रा, बीपीएल धरी होने का प्रमाण-पत्रा और विवाह की संयुक्त तस्वीर आवेदन के साथ देना होता है। उम्र का प्रमाण-पत्रा नहीं होने की स्थिति में कन्या के माता-पिता को अपनी पुत्राी की उम्र से संबंध्ति शपथ-पत्रा देना होता है। इस प्रक्रिया को पूरा करने में तीन सौ से चैर सौ रुपये ;दो दिनों की मजदूरीद्ध का खर्च लाभार्थी के अभिभावक को हो जाता है। शादी के बाद एक माह तक निःशुल्क निबंध्न किया जाता है। एक माह से ज्यादा समय होने पर प्रतिमाह 50 रुपये अध्कितम एक हजार रुपये निबंध्न शुल्क लिये जाने का प्रावधन है। यह राशि पंचायत के खाते में जमा होती है। निबंध्न के पश्चात इसकी एक प्रति अवर निबंध्क ;विवाह उप महानिरीक्षकद्ध को भेजा जाता है। सारे वांछित कागजातों के साथ उक्त योजना से संबंध्ति आवेदन आरपीएल काउंटर के माध्यम से जब प्रखंड में संबंध्ति सेक्सन में जाता है तो किसी न किसी तकनीकी त्राुटि के कारण आवेदन का क्रम आगे-पीछे कर दिया जाता है। इससे लाभार्थी को परेशानी होती है। वे बताते हैं कि मुख्यमंत्राी कन्या विवाह योजना का 2012 ई. का 50 आवेदन इस पंचायत का लंबित है। 2013 में 86 विवाहों का निबंध्न हुआ। इस साल अब तक 19 रजिस्ट्रेशन हुआ है। राशि के अभाव में सारे मामले लंबित पड़े हुए हैं। इस पंचायत के कुम्हरा पाकड़ निवासी महेश पासवान की पुत्राी सुमित्रा देवी का विवाह कई साल पहले हुआ। उसे एक लड़की ;सुमनद्ध भी है लेकिन आज तक कन्या विवाह योजना का लाभ नहीं मिला। इसी तरह मां बन चुकी मोहनपुर के शिवचंद्र साह की बेटी रूपा, बोअरिया के मो. मंजूर की बेटी रिजवाना खातुन ;दो बच्चों की मांद्ध को आज भी योजना का लाभ नहीं मिल सका है। इसी तरह इस प्रखंड के विष्णुपुर श्रीराम के राम एकबाल महतो की पुत्राी पूजा कुमारी को एक बच्चा भी हो चुका है लेकिन कन्या विवाह योजना का लाभ उसके लिए आकाश-कुसुम बना हुआ है। इस पंचायत में 2011 में मृत 28 व्यक्तियों के परिजनों को अब तक कबीर अंत्येष्टि योजना का लाभ नहीं मिला है। मुखिया बताते हैं कि इस साल पफरवरी में कबीर अंत्येष्टि मद में 18 मृतकों के परिजनों को राशि दी गई है। इनमें अध्किांश की मृत्यु आज से करीब 3 वर्ष पहले हो चुकी थी। राशि के अभाव में ससमय इस योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। सकरा के प्रखंड विकास पदाध्किारी दीपक राम मुख्यमंत्राी कन्या विवाह योजना की स्थिति के बारे में पूछने पर झल्लाते हुए कहते हैं कि सरकार को चाहिए कि वह इस योजना को बंद कर दे। जब समय से पैसा नहीं उपलब्ध् कराया जा सकता तो ऐसी योजना चलाने से क्या पफायदा? वे अपने कक्ष में प्रखंड नाजिर को बुला कर योजना की स्थिति बताने को कहते हैं। नाजिर वापस अपने कक्ष में जाते हैं और कुछ ही देर में बीडीओ के चेम्बर में एक रजिस्टर के साथ हाजिर होते हैं। वे बताते हैं कि पूर्व में मैनुअल तरीके से आवेदन लिया जाता था जिसकी संख्या करीब 6 हजार है। इसका निष्पादन नहीं हुआ है। 2012 से आरटीपीएस काउंटर के माध्यम से कन्या विवाह योजना का आवेदन लिया जाने लगा। 2012-13 और 2013-14 में 1130 तथा 2014-14 में 1032 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इस प्रकार इस प्रखंड में मुख्यमंत्राी कन्या विवाह योजना का आरटीपीएस काउंटर के माध्यम से जमा 2162 आवेदन लंबित है। इसमें इससे पूर्व मैनुअल तरीके से जमा किया गया आवेदन शामिल नहीं है। बीडीओ का कहना है कि 56 लाख रुपये का विपत्रा कोषागार में भेजा गया है। विपत्रा पारित होने के बाद लाभार्थियों को भुगतान किया जायेगा। यहां ध्यान देने की बात है कि प्रति लाभार्थी यदि 5 हजार रुपये की दर से ही भुगतान होता है तो इस मद में 1 करोड़ 8 लाख 10 हजार रुपये की जरूरत होगी, अन्यथा आध से ज्यादा लाभार्थी पिफर मुंह ताकते रह जायेंगे। इसी प्रखंड के सकरा वाजिद पंचायत के मुखिया जयकरण पासवान बताते हैं कि उनके पंचायत में मुख्यमंत्राी कन्या विवाह योजना का तीन सौ से ज्यादा आवेदन लंबित है। तीन साल से कोई भुगतान नहीं हुआ है। इस पंचायत के वार्ड नंबर 6 नरसिंहपुर की रेखा कुमारी, चंपा कुमारी, रंजना देवी, आभा रानी, सायरा खातुन और नजराना खातुन 2-3 वर्ष पूर्व विवाह बंध्न में बंध् चुकी हैं। मां भी बन गई, लेकिन योजना का लाभ इनमें से किसी को अब तक नहीं मिला है। इन सबों ने प्रखंड कार्यालय में आरटीपीएस काउंटर के माध्यम से अपना आवेदन जमा किया हुआ है। पावती रसीद संभाल कर रखे हुए है। बावजूद इसके कब मिलेगा इस योजना का लाभ, यह समझना इनके लिए टेढ़ी खीर है। मुरौल प्रखंड के ही विलखी जगपति पंचायत की मुखिया सीता देवी बताती हैं कि उनके पंचायत में मनीषा, नीलम, रेखा, नितु, पिंकी समेत अनेक ऐसी लड़कियां हैं जिनकी शादी दो-तीन साल पहले हुई। बच्चा भी हो गया लेकिन कन्या विवाह योजना की राशि आज तक नहीं मिली। इसी जिले का एक प्रखंड है गायघाट। इस प्रखंड का एक पंचायत है बखरीकेशो। घुनटुन पासवान यहां के मुखिया हैं। इस पंचायत में 2012 में 39, 2013 में 71 और 2014 में 60 विवाह निंबध्न हुआ। वे बताते हैं कि निबंध्न के पश्चात उनकी कोई भूमिका नहीं होती है। लाभार्थी या उसके अभिभावक दलाल या विचैलिये के सहारे प्रखंड में आवेदन जमा कराते हैं। ये बिचैलिए उनकी अज्ञानता और सीध्ेपन का पफायदा उठाते हुए जम कर उनका शोषण करते हैं। इसकी कोई शिकायत भी वे मुखिया से नहीं करते हैं। इस पंचायत में 2012 के पूर्व का तमाम अभिलेख पिछले वर्ष हुए भीषण अग्निकांड में नष्ट हो गया। मुखिया का घर बहादुरपुर गांव में है। बहादुरपुर, बखरी, रेला, ककडि़या, बढ़मोतरा, पकड़ी, बेला, और लादी गांव इस पंचायत मंे शामिल है। 2012 से अब तक पंचायत में किये गये वर्ष वार विवाह निबंध्न का ब्योरा देते हुए वे बताते हैं कि 2012 में 39, 2013 में 71 और 2014 में 60 विवाह रजिस्ट्रेशन किया गया। रेखा देवी, कबुतरी देवी, अनिता देवी, निभा देवी और संगीता देवी का विवाह 2011 से 2013 की अवध् िमें हुआ। योजना के तहत इनका भुगतान अभी तक नहीं हुआ है। बहरहाल, जिले के चार प्रखंडों से बानगी के तौर पर कुछ पंचायतों में मुख्यमंत्राी कन्या विवाह और कबीर अंत्येष्टि योजना की विपफलता तथाकथित कल्याणकारी राज्य की असलियत उजागर करने के लिए कापफी है। त्र

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