December 12, 2017

खगडि़या-बेगूसराय विधान परिषद चुनाव ः मात खा गया महागठबंधन

By wmadmin123 - Fri Aug 21, 7:17 am

खगडि़या-बेगूसराय निकाय चुनाव में राजग प्रत्याशी रजनीश कुमार भले ही महागठबंध्न प्रत्याशी डा. संजीव कुमार से एक कड़े मुकाबले में 66 मतों से विजयी हुये हों लेकिन सत्ता का सेमीपफाइनल कहा जाने वाला यह चुनाव इस क्षेत्रा में दोनों ही गठबंध्नों को सचेत कर गया है। राजग की एकजुटता और महागठबंध्न के आंतरिक गुटबाजी के बावजूद भाजपा के रजनीश कुमार यदि कम अंतर से अपनी सीट बरकरार रख पायें हैं तो यह राजग के लिये कतई शुभ संकेत नहीं माना जा सकता है। इस चुनाव में राजग प्रत्याशी के 2994 मतों के मुकाबले महागठबंध्न प्रत्याशी को 2448 मत प्राप्त हुये। कुल 5752 मतों में से 513 मतों को अवैध् घोषित किया गया था। अवैध् घोषित इन मतों में से 148 मतों पर जिच की स्थिति बनी रही जिसके कारण परिणाम के लिये देर रात तक अपफरा-तपफरी के माहौल के साथ चर्चाओं का बाजार भी गर्म रहा था। महागठबंध्न के प्रत्याशी डा. संजीव की मानें तो उन्हें प्राप्त वैध् मतों को भी मतगणना पदाध्किारियों ने चुनाव आयोग के नियमों की अवहेलना कर अवैध् करार दिया है, वे री-चेकिंग के लिये इस मामले को लेकर कोर्ट की शरण में जायेंगे। दूसरी तरपफ डा. संजीव के इस आरोप पर खगडि़या भाजपा जिलाध्यक्ष रामानुज चैध्री कहते हैं कि-‘आमजन को बड़गलाने का उस परिवार का एक पुराना तरीका है। 2010 के परबत्ता विधनसभा चुनाव में जब डा. संजीव के पिता जदयू उम्मीदवार और एनके सिंह जब राजद प्रत्याशी सम्राट चैध्री से हार गये थे तो उस वक्त भी वे कोर्ट जा रहे थे।’ राजग प्रत्याशी के कम अंतर से जीत अर्जित करने के एक सवाल पर खगडि़या भाजपा जिलाध्यक्ष कहते हैं कि-‘भले ही प्रदेश सरकार के एक मंत्राी और स्थानीय प्रशासन के दबाव में जीत का अंतर कम कर दिया गया हो लेकिन यह जीत ध्नबल पर जनबल की जीत है। विरोध्यिों के द्वारा तमाम हथकंडे अपनाने के बाद भी यदि यह जीत नसीब हुई है तो इसका श्रेय खगडि़या और बेगूसराय के तमाम भाजपाई कार्यकर्ताओं एवं यहां की जनता को जाता है, जिनके दबाव में आकर लंबे इंतजार के बाद परिणाम की घोषणा की गयी। अन्यथा परिणाम को प्रभावित करने की रूप-रेखा तैयार कर ली गई थी।’ परिणाम की घोषणा तक ध्ूप और बारिस में अपने साथियों के साथ मतगणना स्थल के बाहर प्रदर्शन करने वाले चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता सह भाजपा के युवा नेता बाबू लाल शौर्य के अनुसार इस चुनाव में लोकतंत्रा की हत्या करने की साजिश थी, जिसे कार्यकर्ताओं की तत्परता व सजगता से विपफल कर दिया गया।
राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के दायें-बायें ना देखकर सिपर्फ जनता परिवार के प्रत्याशी को देखने की पफरमान के बाद स्थानीय राजद नेताओं का साथ अंतिम वक्त में डा. संजीव को जरूर मिला लेकिन स्थानीय जदयू के ही कुछ नेता जदयू प्रत्याशी को इस चुनाव में दगा दे गये। सूत्रों की मानें तो खगडि़या और अलौली के क्षेत्रों में डा. संजीव पिछड़ गये जबकि दोनों ही विधनसभा सीटों पर जदयू का वर्तमान में कब्जा है। लोक प्रसंग से एक खास बातचीत में महागठबंध्न के पराजित उम्मीदवार डा. संजीव ने खगडि़या सदर जदयू विधयिका पूनम देवी यादव, अलौली जदयू विधयक रामचंद्र सदा तथा जदयू के एमएलसी सोनेलाल मेहता पर इस चुनाव में पार्टी गाईड लाईन से इतर पार्टी उम्मीदवार के विरोध् में कार्य करने का आरोप लगाते हुये कहा कि सारी बातों की जानकारी मुख्यमंत्राी नीतीश कुमार को दे दी गई है। जदयू विधयकों की गुटबंदी और चुनाव कम्पेंनिंग के लिये मिले कम वक्त को डा. संजीव अपनी हार का मुख्य वजह मानते हें। युवा राजद के जिलाध्यक्ष अमित कुमार पप्पू की मानें तो जनता परिवार के कार्यकर्ता अपने मतदाताओं को जागरूक नहीं कर पाये जिसके कारण उनका मत अवैध् करार हो गया, यह भी महागठबंध्न उम्मीदवार के हार की एक प्रमुख वजह बनी। राजद के प्रदेश महासचिव सह पूर्व विधन परिषद प्रत्याशी डा. उर्मिला ठाकुर के अनुसार डा. संजीव का चुनावी कम्पेंनिंग सही नहीं रहने व परिवारवाद की राजनीति के कारण उन्हें शिकस्त खानी पड़ी। खगडि़या जदयू के जिलाध्यक्ष साध्ना देवी का मानना है कि महागठबंध्न के उम्मीदवार को अनुभव की कमी, राजद का पूरा सहयोग नहीं मिलने और पार्टी के आंतरिक गुटबाजी के कारण हार का मुंह देखना पड़ा है। वहीं खगडि़या जदयू के उपाध्यक्ष बबलू मंडल की मानें तो इस चुनाव में कुछ स्थानीय जन प्रतिनिध्यिों ने निज स्वार्थ के लिये पार्टी की प्रतिष्ठा को ध्ूमिल कर दिया है। खगडि़या जिला परिषद के उपाध्यक्ष सह जदयू नेता सुनील कुमार के अनुसार जनता परिवार के कार्यकर्ताओं के आपसी समन्वय की कमी के कारण इस चुनाव में ऐसा परिणाम सामने आया है। वामपंथियों का गढ़ माना जानेवाला बेगूसराय में गत विधन परिषद चुनाव में दूसरे स्थान पर रहने वाली वाम दल प्रत्याशी उषा सहनी को इस चुनाव में महज 470 मत प्राप्त करना इस क्षेत्रा में वामपंथियों की वर्तमान स्थिति को बयां करती है। बहरहाल, भले ही खगडि़या-बेगूसराय निकाय चुनाव के परिणाम के बाद राजग में जीत के जश्न का आलम और जनता परिवार में मायूसी छायी हुई हो लेकिन सत्ता के पफाइनल के पूर्व दोनों ही गठबंध्नों को आत्ममंथन की दौर से गुजरना होगा।

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