September 24, 2018

खेल को खिलाडि़यों के सुपुर्द करने की ‘सर्वोच्च’ पहल

By wmadmin123 - Wed Apr 16, 12:40 pm

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क्रिकेट के खेल के गिरफ्रत में रही भारतीय उपमहाद्वीप के तीन प्रमुख देशों में भारत ऐसा अकेला देश है जहां इसके राष्ट्रीय नियामक संगठन भारतीय क्रिकेट नियामक संगठन ;बीसीसीआईद्ध के अध्यक्ष पद पर आज तक कोई खिलाड़ी काबिज नहीं हुआ था। पाकिस्तान और श्रीलंका के शीर्ष बोर्ड पर दोनों ही देश के पूर्व खिलाडि़यों का चयन हो चुका है। देर से ही सही सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप से आखिरकार बीसीसीआई को एक पूर्व खिलाड़ी अध्यक्ष मिल ही गया। यद्यपि सुनील गावस्कर देश के सर्वोच्च अदालत के द्वारा नियुक्त एक अंतरिम अध्यक्ष हैं जो आईपीएल-7 के आयोजन संपन्न होने तक इससे जुड़ी गतिविध्यिों का प्रशासन देखेंगे। पर सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय से एक ओर जहां घाघ राजनीतिज्ञों और व्यावसायियों की प्रभुत्व से कराह रहे देश विभिन्न खेल संगठनों के शीर्ष पदों पर भी पूर्व खिलाडि़यों की नियुक्ति का रास्ता सापफ होने की संभावना बढ़ी है वहीं दूसरी ओर देश के खेल हित में एक सराहनीय परंपरा का भी श्रीगणेश हो गया है। एक अर्से से खेल प्रेमियों की मांग थी की देश के प्रमुख खेल संगठनों व संघों का प्रधन राजनेता या व्यवसायी के बजाय पूर्व खिलाड़ी हों। इससे खेलों का राजनीतिकरण और व्यावसायीकरण कम होगा। पर इसे एक विडंबना ही कहेंगे कि बीसीसीआई सहित सभी खेलों के राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय संगठनों पर उक्त दो तबके के लोगों का ही कब्जा रहा है, नतीजा सबके सामने है।
यह सच है कि खेलों में पेशेवराना रुख जरूरी होता है पर खेल को ‘पेशा’ बना देना भी खेल के साथ खिलवाड़ ही कहा जाएगा। खेल को कला की तरह मानते हुए इसे आज के पेशेवर युग के अनुरूप ढल जाने में कोई हर्ज नहीं है, परंतु पेशा बन जाने की स्थिति में इसके प्रदर्शन पर पेशागत कुरीतियां यथा-भ्रष्टाचार, पक्षपात, भाई-भतीजावाद और आजकल की नई बीमारी ‘पिफक्सिंग’ का प्रभाव पड़ना स्वाभाविक सा हो गया लगता है। खैर, हम पिफलवक्त बात करते हैं क्रिकेट के अखिल भारतीय संगठन की। क्रिकेट प्रेमियों के लिए बेशक यह उनके दिलों को गुलजार करने वाली खबर है कि इस खेल को खिलाडि़यों के सुपुर्द कर दी गयी है। ‘मैच पिफक्सिंग’ मामले में ‘मुद्गल कमेटी’ की जांच रिपोर्ट पर नजर डालने के बाद भारत के सर्वोच्च न्यायालय की दो सदस्यीय पीठ ने बीसीसीआई अध्यक्ष श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन के संलिप्त होने के कारण पहले स्वयं हटने का सुझाव दिया। ऐसा न होने पर एक दिन बाद अगली सुनवाई में बर्खास्त कर देश के सर्वकालीन महान अंतर्राष्ट्रीय बल्लेबाज सुनील मनोहर गावस्कर को अंतरिम अध्यक्ष पद पर आसीन कर दिया। बोर्ड के प्रशासनिक कार्यों के संचालन की जिम्मेवारी दक्षिण क्षेत्रा से बीसीसीआई के वर्तमान उपाध्यक्ष भारतीय टीम के पूर्व आॅपफ स्पिन गेंदबाज शिवलाल यादव को संभालने का आदेश निर्गत किया गया। इस प्रकार वर्षों से सियासतदानों और कारोबारियों के प्रभाव में रहे बीसीसीआई को अचानक दो-दो पूर्व खिलाड़ी अध्यक्ष मिल गये एक अंतरिम दूसरे प्रभारी। ऐसा लगता है कि मानो खिलाडि़यों के द्वारा किला पफतह कर लिया गया हो।
जिस किसी भी सोच की तहत हुआ हो, सुनील गावस्कर का चुनाव बतौर अंतरिम अध्यक्ष करना सर्वोच्च न्यायालय का एक सराहनीय पफैसला है। गावस्कर क्रिकेट के अपने व्यक्तिगत अनुभवों का पफायदा भारतीय क्रिकेट को अवश्य पहुंचाएंगे, ऐसी अपेक्षा की जानी चाहिए। हर वर्ष आईपीएल का आयोजन बीसीसीआई के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होता। गत वर्ष इस बहुरंगी टी-20 प्रतियोगिता में सट्टेबाजों, मैच पिफक्सरों ने जो कहर बरपाया था, उससे इसकी विश्वनीयता को आघात लगा। देखना होगा कि सुनील मनोहर गावस्कर अपनी दूरदर्शिता और कार्यकुशलता के इस्तेमाल से आईपीएल को बिना किसी विवाद के आयोजित करा पाने में कहां तक सपफल हो पाते हैं। भारतीय क्रिकेट के इस पूर्व सितारे ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय पर खुशी का इजहार किया और कहा ‘मैं आॅपनिंग बल्लेबाज रहा हूं और बतौर ओपनर आपको किसी भी चुनौती के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार होना होता है। सुप्रीम कोर्ट का मुझ पर भरोसा जताने से मैं खुश हूं। कोर्ट का आदेश कौन नहीं मानेगा? मैं इस जिम्मेदारी के लिए तैयार हूं।’

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