September 19, 2018

गया नगर निगम: महापौर की कमान सोनी को अब महासंग्राम उपमहापौर के लिए

By wmadmin123 - Fri Sep 19, 7:16 am

बीते तीन महीनों से गया नगर निगम में चल रही रस्साकशी के बाद 28 अगस्त 2014 को मेयर का चुनाव संपन्न हो गया। इसमें वार्ड नं. 8 की पार्षद सोनी कुमारी ने 27 मतों से अपनी जीत दर्ज कर बाजी मार ली। इसके साथ ही निगम में चल रहे ध्ुंध्लका पिफलहाल छट तो गया है लेकिन डिप्टी मेयर के लिए अभी और जंग होना बाकी है। निगम के इस महासमर में पूर्व मेयर शगूफ्रता प्रवीण भी दौड़ में शामिल थी किंतु वे 22 मत पाकर पिछड़ गयी। विदित हो कि मेयर की दौड़ में शामिल शगूप्ता प्रवीण के समर्थन में यौन शोषण के आरोप से घिर चुके निवर्तमान डिप्टी मेयर ओंकारनाथ श्रीवास्तव उपर्फ मोहन श्रीवास्तव भी रहे। वे पटना के एक होटल में नावालिग युवतियों के साथ रंगरेलियां मनाते जनवरी 2014 में पकड़ लिये गये थे। इनके साथ निगम के दो अन्य पार्षद भी थे। इसी बीच उनकी कुर्सी छिन गयी। जेल से जमानत पर छूटने के पश्चात इन्होंने निगम के पूर्व मेयर विभा देवी को भी अपदस्थ कराने के लिए एड़ीचोटी एक कर दी और बीते 23 जुलाई को अविश्वास का प्रस्ताव लाकर 30 पार्षदों ने मिलकर अपदस्थ कर दिया। तब से निगम असहाय था और वहां गुटबाजी प्रारंभ हो गयी। ऐसे में हर कोई अपने लायक मेयर बनाने की जुगत में भिड़ गये। ऐसे मंे कई वार्ड पार्षदों के नाम मेयर के लिए सामने आये लेकिन किसी पर सर्वसम्मति नहीं बन पायी। अंततः निगम को चुनाव कराने पड़े। ऐसे में वार्ड नं. 45 की शगूप्ता प्रवीण जो पूर्व में भी निगम की मेयर रह चुकी थी को हरा कर सोनी कुमारी ने अपनी जीत दर्ज की और मेयर की कुर्सी हथिया ली।
कौन है सोनी?
गया नगर निगम की नयी मेयर बनी सोनी कुमारी आखिर कौन है और अचानक सुर्खियों में किसकी बदौलत पहुंची? यह सवाल शहरवासियों को कौंध् रहा है। जानकार बताते हैं कि 2010 में जब गया नगर निगम का चुनाव हो रहा था तब शहर के वार्ड नं. 8 से निवर्तमान डिप्टी मेयर ओंकारनाथ श्रीवास्तव की पत्नी मनीषा श्रीवास्तव के मुकाबले सोनी चुनाव मैदान में उतरीं और मनीषा को परास्त कर अपनी जीत दर्ज की थी। पूर्व मेयर विभा देवी के खिलापफ लाये गये अविश्वास प्रस्ताव में मेयर की कुर्सी छिन जाने के बाद पार्षद सोनी का नाम जब उछाला गया तो इनके विरोध्यिों के कान खड़क गये। लेकिन इनके समर्थकों ने साहस दिखाया और मेयर की कुर्सी तक पहुंचा दिया। ऐसे में किंग मेकर के रूप में पार्षद चितरंजन प्रसाद वर्मा एवं लालजी प्रसाद की भूमिका सक्रिय रही। गया शहर के ही एक विद्यालय से मैट्रिक एवं मगध् विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल करने वाली सोनी कुमारी सामाजिक बंध्नों को तोड़ कर शहर के ही एक बहुचर्चित शख्स विक्की शर्मा की दूसरी पत्नी हैं। सोनी के पति विक्की शर्मा निगम के अपदस्थ डिप्टी मेयर मोहन श्रीवास्तव का प्रतिद्वंद्वी भी रहा है। इस दौरान उन पर कई आपराध्कि मुकदमें भी हुए। इसके अलावे इनकी पूर्व पत्नी ने भी मुकदमा दायर कर रखा है।
महागठबंधन को भी नकारा
अक्सर देखा जाता है कि निगम की राजनीति में सत्ता से जुड़े राजनीतिक दल हावी होते हैं। गया नगर निगम भी इससे अछूता नहीं रहा है। लेकिन निगम के कई वार्ड पार्षदों ने दलीय सीमा को पार कर गये हैं और राज्य में मौजूदा सरकार जदयू-राजद के महागठबंध्न को नकार दिया है। गौरतलब है कि सूबे के मुख्यमंत्राी जीतनराम मांझी का यह गृह जिला भी है और उनकी ही बेटी सुनैना देवी वार्ड नं. 1 की पार्षद हैं। अप्रत्यक्ष तौर पर सुनौना देवी भी मेयर की चाहत में थी। इसी के मद्देनजर मेयर चुनाव के दौरान मुख्यमंत्राी लगातार चार दिनों तक गया प्रवास पर भी रहे और निगम के चुनाव पर नजर गड़ाए रहे। लेकिन गोटी पिफट बैठते नहीं देख अपना रुख बदल लिया और मेयर की दौड़ में रहे शगुफ्रता प्रवीण को समर्थन देना उचित समझा। लेकिन उनकी राजनीति वहां भी नहीं चली और हार का मुंह देखना पड़ा। दूसरे मगध् सम्राट के रूप में मशहूर राजनीतिक गलियारे के एक दबंग राजनेता के इर्द-गिर्द रहने वाले व उनके ही स्वजातीय वार्ड पार्षदों ने भी दलीय सीमा तोड़ कर सोनी कुमारी के समर्थन में अपना मतदान किया। इस बात को लेकर राजनीतिक गलियारे में सियासी तापमान बढ़ा हुआ है। आने वाले दिनों में इस तरह के बदलते समीकरण, निगम की राजनीति के साथ-साथ सत्ता से जुड़े राजनीतिक दलों में क्या गुल खिलायेगा वह समय ही बताएगा।
धुुंधलका अभी छंटा नहीं
गया नगर निगम में मेयर का चुनाव संपन्न हो जाने के बाद भी अभी छायी ध्ुंध्लका छंट नहीं पायी है। यहां डिप्टी मेयर का चुनाव होना शेष है। कहते हैं निगम की राजनीति में किंग मेकर की भूमिका निभाने वाले वार्ड सं. 36 के पार्षद चितरंजन वर्मा एवं वार्ड सं. 22 के पार्षद लालजी प्रसाद ने भले ही सोनी कुमारी को मेयर की कुर्सी पर बैठा दिया हो और पूर्व मेयर शगूप्ता प्रवीण के सिपहसलारों को शिकस्त देने में कामयाबी हासिल कर ली हंै। लेकिन मेयर के चुनाव से पहले 35 पार्षदों के समर्थन का दावा करने वाले पार्षद चितरंजन वर्मा 28 पार्षदों का ही समर्थन जुटा पाये। हालांकि वे स्वयं निकट भविष्य में होने वाले डिप्टी मेयर के चुनाव में दावेदार बने हैं। कहा जा रहा है कि यदि यही गोलबंदी कायम रहीं तो श्री वर्मा के लिए आगे का रास्ता सापफ हो सकता है अन्यथा डिप्टी मेयर की मंशा पाले उक्त पार्षद के लिए मुसीबत खड़ी हो सकती है। चूंकि निवर्तमान डिप्टी मेयर मोहन श्रीवास्तव भी इनके पीछे पड़े हैं। वे अब भी डिप्टी मेयर के लिए मंशा पाले हुए हैं। अब यह भी देखना है कि इस खेल में कौन बाजी मार पाता है।
पिफलवक्त, नये मेयर ने निगम का पदभार संभाल लिया है और नगर निगम को नये तोहपफे के रूप में नये नगर आयुक्त डीएन रामचंद्र भी बनाये गए हैं। अभी निगम के समक्ष अनेक गंभीर चुनौतियां है। वर्तमान में पितृपक्ष मेला प्रारंभ होने को है और अन्य प्रदेशों से आये पिंडदानियों को स्वच्छ पानी, बिजली, सड़क, सुरक्षा समेत अन्य संसाध्नों का प्रबंध् करना है। अल्पावध् िमें नये मेयर इस जिम्मेवारी को कितना निभा पाती हैं, यह तो समय ही बताएगा। पिफलहाल अब इस बात की चर्चा जोर पकड़ रही है कि नगर निगम गया का उपमहापौर कौन होगा? कौन से वार्ड पार्षद किसके पक्ष में खड़े होंगे? जैसा कि सभी जानते हैं नगर निगम गया में कुल 53 वार्ड हैं। इन 53 वार्ड पार्षदों की रणनीति क्या होगी, जिस रणनीति के तहत ये सभी इसबार गोलबंद हुए क्या उपमहापौर के चयन में भी इसी तरह गोलबंद रहेंगे? क्या होगा यह तो आने वाला समय बताएगा। ;यहां प्रस्तुत है सभी 53 वार्ड पार्षदों की तस्वीरें।द्धत्र

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