September 23, 2018

गोपालगंज : चुनाव के बाद की चुनौतियां

By wmadmin123 - Fri Jul 25, 1:14 pm

वैसे तो जिले की अनेकों समस्याएं हैं जिनके समाधन की आश में कई सरकारें आई और चली गई। परंतु समस्या विक्रम बेताल की तरह आज भी पेड़ पर ही टंगी है। जिले के लोगों ने इस संसदीय चुनाव में बड़ी ही आशा और आकांक्षा से भाजपा एवं नरेंद्र मोदी के उम्मीदवार जनक चमार को पूरे बिहार में सर्वाध्कि मतों से विजयी बनाकर भेजा ताकि उनसे उन चिर लंबित समस्याओं का, जिसका संबंध् केंद्र सरकार से है, निदान हो सके।
वैसे जिले की प्रमुख समस्याओं में राष्ट्रीय उच्च पथ 28 एवं 85 की जर्जर स्थिति के अलावा करीब बारह वर्षांे से कच्छप गति से चल रही रेलवे को थावे छपरा अमान परिवर्तन की योजना शामिल है। इन दोनों योजनाओं का सीध संबंध् केंद्र सरकार से है तथा इनके पूरा हुए बिना इस क्षेत्रा का विकास संभव नहीं है। ये योजनायें इस जिले की लाइपफ लाइन है। वैसे दो दशकों से ज्यादा समय से बंद पड़ी मीरगंज चीनी मिल तथा डिस्टीलरी को पुनः चालू कराना गन्ना किसानों के बकाये का भुगतान कराना तथा गंडक नदी के कटाव से सुरक्षा जैसी कई महत्वपूर्ण समस्यायें अपने समाधन की बाट देख रही है।
इस जिले की सबसे बड़ी समस्या सड़क और रेल मार्ग की जर्जर तथा घटिया स्थिति है। सन 2002 में तत्कालीन रेल मंत्राी नीतीश कुमार ने थावे-छपरा रेल खंड के अमान परिवर्तन कार्य का शिलान्यास किया। लेकिन गत बारह वर्षांे में इस अमान परिवर्तन के कच्छप गति को देखकर लगता है कि बिना किसी विशेष प्रयास के यह कार्य पूरा नहीं हो सकेगा। जबकि नीतीश के बाद इसी जिले के लाल लालू प्रसाद यादव रेल मंत्राी बने पिफर भी यह कार्य पूरा नहीं हो सका।
पोरबंदर से सिलचर तक जाने वाली राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या 28 की बथनाकुटी से मिर्जापुर तथा 42 किलोमीटर लंबी सड़क अपने निर्माण कार्य प्रारंभ होने के एक दशक बाद भी पूरा नहीं हो सका है। इस सड़क पर करीब चार वर्षांे में सड़क दुर्घटना में 250 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। इसका निर्माण कार्य भूतल परिवहन मंत्रालय द्वारा 2005 में हैदराबाद की कंपनी पीसीएल को निर्माण कार्य करने के लिए आवंटित की गई। कंपनी को निर्माण कार्य 2008 तक पूरा करना था। परंतु कंपनी द्वारा निर्धरित अवध् िमें मात्रा बारह प्रतिशत काम ही किया गया। जिसके कारण 2008 में कंपनी का ठेका रद्द कर दिया गया। पुनः शर्तों में ढ़ील देते हुए कंपनी को 2010 में कार्य आवंटित कर दिया गया। परंतु कंपनी द्वारा कार्य में वांछित प्रगति नहीं दिखलाने पर पुनः 2012 में इसका ठेका रद्द कर दिया गया। भाजपा राष्ट्रीय परिषद के सदस्य उमेश प्रधन ने इस सड़क की जर्जर स्थिति के संबंध् में बताया कि बथना कुटी से सासामुसा यानी कुल बारह किलोमीटर की यात्रा में एक से दो घंटे लग जाते हैं। पहाड़पुर, कुचाइकोटि रेलवे ढाला तथा पहाड़पुर गांव के पास जाम लगना तो प्रतिदिन की बात है।
जनप्रतिनिध्यिों के आंदोलन तथा जिला प्रशासन के गुहार के बाद कंेद्र सरकार ने इस सड़क को जब तक काम किसी सक्षम एजेंसी को नहीं सौंप दी जाती तब तक मिर्जापुर से बथनाकुटी तक सड़क को मोटरेबुल करने के लिए बिहार सरकार को 30 करोड़ रुपये उपलब्ध् कराये। यह सभी बिहार राज्य रोड डेवलपमेंट काॅरपोरेशन को दी गई। काॅरपोरेशन ने यह काम दिल्ली की कंपनी एचआर बिल्डर्स को सौंपी। 34 करोड़ रुपये में। कंपनी ने 24 जनवरी को मिर्जापुर में तत्कालीन शिक्षा मंत्राी पीके शाही पथ निर्माण विभाग के प्रधन सचिव प्रत्यय अमृत तथा विधयक मंजीत सिंह की उपस्थिति में समारोह पूर्व कार्य प्रारंभ किया। विभाग ने कंस्ट्रक्शन कंपनी को मेटेरियल क्रय करने के लिए पांच करोड़ रुपये अग्रिम भी दिये गये। कंपनी को यह काम अगस्त माह तक पूरा करना है। लेकिन कार्य शुभारंभ की औपचारिकता के बाद कंपनी ने काम बंद कर दिया। जिला प्रशासन के दबाव पर कंपनी ने मार्च माह में जैसे-तैसे काम शुरू किया। काम की कच्छप गति को देखकर नहीं लगता कि कंपनी काम पूरा कर सकेगी निर्धरित समय में। कंपनी के रवैये को देखकर राष्ट्रीय उच्च पथ 28 निर्माण संघर्ष समिति के बैनर तले ओम प्रकाश सिंह एवं सचिन सिंह के नेतृत्व में लोगों ने एक आंदोलन शुरू किया। इस पर जिलाध्किारी गोपालगंज कृष्ण मोहन प्रसाद ने एनएचआई के प्रोजेक्ट मैनेजर तथा ठेकेदार को तलब किया। मई माह के अंतिम सप्ताह में की गई समीक्षा बैठक में यह बात उभर कर सामने आई कि अभी तक कंपनी द्वारा मात्रा दस प्रतिशत काम किया गया है। इससे क्षुब्ध् जिलाध्किारी ने पथ निर्माण विभाग के सचिव को पत्रा लिखकर प्रगति पर असंतोष जाहिर करते हुए यह स्पष्ट चेतावनी दी कि कंपनी द्वारा समय पर काम पूरा नहीं करने की दशा में बरसात में यह सड़क पूरी तरह बंद हो जाएगी। गोपालगंज ने नवनिर्वाचित सांसद जनक चमार ने इन दोनों समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए बतया कि-थावे छपरा रेल खंड के अमान परिवर्तन के संबंध् में वे रेल राज्यमंत्राी मनोज सिन्हा से मुलाकात की जिस पर मंत्राी महोदय ने शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया है। इसके साथ ही उन्होंने पथ निर्माण मंत्राी नीतिन गडकरी को पत्रा लिखकर एनएच 28 की पैकेज नौव की दुर्दशा से अवगत कराते हुए मिलने का समय मांगा है। उन्होंने कहा आगामी संसद के सत्रा में उनका प्रयास इन समस्याओं को उठाने के साथ ही बंद पड़ी मीरगंज चीनी मिल तथा गन्ना किसानों के मूल्य भुगतान का मुद्दा भी उठाउंगा जनता ने मुझ में जो विश्वास व्यक्त किया है उस पर खरा उतरने का प्रयास करूंगा।त्र

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