September 24, 2018

चंपारण में होगी गन्ना अनुसंधान संस्थान की स्थापना

By wmadmin123 - Wed Jul 22, 8:57 am

बीके प्रसाद सोनी

बिहार गन्ना की खेती के लिए सबसे मुपफीद जगह है। इध्र हाल में केंद्र सरकार की गलत नीतियों के चलते गन्ना उद्योग पश्चिम तथा दक्षिण की ओर चला गया तथा बिहार का गन्ना उद्योग पिछड़ गया। मुख्यमंत्राी नीतीश कुमार बीते दिनों पटना के सिंचाई भवन में आक्रोशित कार्यक्रम गन्ना किसान प्रशिक्षण सह सम्मेलन में बोल रहे थे। मुख्यमंत्राी ने सम्मेलन में खुले रूप से स्वीकार किया कि बिहार का चीनी उद्योग संकट के दौर से गुजर रहा है। एक तरपफ गन्ना किसानों का बकाया बढ़ रहा है तो दूसरी ओर मील मालिकों को लागत के अनुसार मूल्य नहीं मिल रहा है। चीनी मिल मालिकों एवं गन्ना किसान दोनों के हितों की रक्षा करना जरूरी है।
मुख्यमंत्राी ने केंद्र सरकार को मिल मालिकों एवं गन्ना किसानों के हित में अपने किए गए घोषणा को पूरा करने की याद दिलायी। मुख्यमंत्राी ने बिहार के चंपारण में गन्ना अनुसंधन संस्थान की स्थापना करने की घोषणा की ताकि बिहार में गन्ना उद्योग का चहुंमुखी विकास हो सके। मुख्यमंत्राी ने केंद्र पर आरोप लगाया कि राॅ सुगर आयात कर रिपफायन करने के नाम पर जो चीनी केंद्र बाहर से मंगाती है उसे वापस पिफर वहीं भेजती है। जिससे देश में उत्पादित चीनी का मांग कम हो रहा है। केंद्र सरकार का चीनी आयात समझ से परे है। मुख्यमंत्राी ने केंद्र से राहत पैकेज की मांग की। सम्मेलन में कृषि जल संसाध्न मंत्राी विजय चैध्री ने गन्ना किसानों तथा मील मालिकों को अपने विभाग से हर संभव सहयोग करने की बात कही तो उफर्जा एवं वित्त मंत्राी विजेन्द्र प्रसाद यादव ने भी यथा संभव सहयोग करने की बात दुहराई। गन्ना मंत्राी डाॅ. रंजू गीता ने कहा कि मुख्यमंत्राी नीतीश कुमार विकास पुरूष हैं। उनके नेतृत्व में बिहार का चहुमुखी विकास हुआ। गन्ना मिल मालिकों तथा गन्ना किसानों का हर समस्याओं का समाधन मुख्यमंत्राी जी करेंगे।
गन्ना मंत्राी ने सम्मेलन में गन्ना जुस पैकिंग में बेचने की सलाह जताई तथा सम्मेलन में पधरे सभी लोगों का अभिवादन किया। सम्मेलन को संबोध्ति करते हुए बिहार-यूपी सुगर मिल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सीबी पटोदिया ने कहा कि सबसे पहले देश में चीनी का उत्पादन बिहार में हुआ। बिहार-यूपी में गन्ना मील तथा किसानों का पिछड़ने का कारण उन्नत तकनीकी का अभाव है। सरकार से मरे हुए चीनी उद्योगों को भरपूर मदद कर जीवित करने का आग्रह किया। हरिनगर सुगर मिल्स के मैनेजिंग डायरेक्टर विवेक एम पीती ने सरकार द्वारा चीनी उद्योग के हित में किए गए प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि चीनी उद्योग तथा गन्ना किसानों का भला सभी विभागों के सहयोग से संभव है। मैं सरकार से अपेक्षित सहयोग की आकांक्षी हूं। तिरूपति सुगर मिल्स लिमिटेड बगहा के मैनेजिंग डायरेक्टर दीपक यादव ने गन्ना सम्मेलन में आये हुए सभी अतिथियों, मंत्रियों, वैज्ञानिकों सहित देश के कई उद्योगपतियों एवं खासकर गन्ना किसानों का आभार प्रकट किया तथा ध्न्यवाद ज्ञापन करते हुए समारोह के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्राी से आग्रह किया कि हम सभी गन्ना मील मालिकों तथा किसानों के अच्छे दिन वापस ला दीजिए। मुख्यमंत्राी ने दीपक यादव को हंसते हुए कहा सब ठीक हो जाएगा।
गन्ना मंत्राी रंजू गीता उच्च अध्किारियों के साथ दिल्ली जाकर केंद्र से बात करेगी। सम्मेलन में गन्ना उद्योग सचिव संजय कुमार सिंह ने सरकार द्वारा गन्ना उद्योग के क्षेत्रा में किए गए कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। ज्ञातव्य हो कि पहले बिहार में 29 चीनी मिल हुआ करते थे जिनमें से मात्रा 11 चीनी मिलें बचा हुआ है और अपनी अस्तित्व की अंतिम लड़ाई लड़ रही है। ये चीनी मिलें हैं-
1. तिरूपति सुगर मिल्स लिमिटेड-बगहा
2. विष्णु सुगर मिल्स-हरखुआ
3. हरिनगर सुगर मिल्स-हरिनगर
4. न्यू स्वदेशी सुगर मिल्स-नरकटियागंज
5. एचपीसीएल सुगर मिल्स-लौरिया
6. एचपीसीएल सुगर मिल्स-सुगौली
7. एचपीसीएल सुगर मिल्स-मंझौलिया
8. सीध्वलिया सुगर मिल्स-सिध्वलिया
9. सासा-मुसा वक्र्स लिमिटेड-गोपालगंज
10. रिगा चीनी मील-सीतामढ़ी
11. हसनपुर चीनी मिल्स-हसनपुर
इस चीनी मिल को केंद्र और राज्य सरकार दोनों के सहयोग से बचाया जा सकता है।

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