September 24, 2018

दाल में कुछ काला तो नहीं

By wmadmin123 - Mon Nov 24, 12:44 pm

अपहरण और बलात्कार बेशक घृणित अपराधें की श्रेणी में आता है। इसके अपराध्ी को जितनी कड़ी से कड़ी सजा दी जाए वह भी कम होगी। लेकिन हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि कोई इसे अपने विरोध्यिों को मात देने के लिए हथियार के रूप में प्रयोग न करे। यदि कोई इसे हथियार के रूप में इस्तेमाल का प्रयास करें तो उसे भी कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। ऐसी बातें आजकल सीवान की सड़कों, चैक-चैराहों पर खूब की जा रही है। इस चर्चे का आधर यह है कि कुछ माह पूर्व 19 वर्षीया एक लड़की ने यह आरोप लगाया था कि उनके कुछ संबंध्यिों सहित अन्य लोगों ने जिसकी संख्या चार थी, उसका अपहरण कर चार दिनों तक एक कमरे में बंद करके रखा तथा उसके साथ बलात्कार करता रहा। घटना की प्राथमिकी के बाद अभियुक्तों को जेल में डाल दिया गया। इस संदर्भ में पुलिस के अनुसंधन में बड़े चैंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस ने अपने अनुसंधन में पाया है कि अपहरण की तिथि जो पीडि़ता बता रही है उसी दौरान उसने काॅलेज में उपस्थित होकर अपना नामांकन भी कराया है। अब सवाल उठता है कि जब वह घर में बंद थी तो पिफर उनका काॅलेज में नामांकन कैसे हुआ? आइए पूरी कहानी विस्तार से जानते हैं।
यह घटना सीवान के पड़ोसी जिले गोपालगंज के माझागढ़ थाना के छितौली गांव की है। यहां के निवासी स्व. झुलनलाल श्रीवास्तव की 19 वर्षीया पुत्राी गुडि़या कुमारी ;काल्पनिक नामद्ध ने आरोप लगाया था कि उनके साथ सामूहिक बलात्कार हुआ है। उसके अनुसार यह घटना बीते 23 जुलाई 2014 को उस समय घटी जब वह स्नातक द्वितीय वर्ष में नामांकन का पता लगाने दारोगा प्रसाद राय काॅलेज सीवान जा रही थी। जैसे ही वह गोपालगंज मोड़ स्थित पार्क के समीप पहुंची, दो मोटर साइकिल पर सवार चार लोगों ने एकाएक मोटर साइकिल रोककर उसे दबोच लिया और जबरन बाइक पर बैठा कर तेजी से मैरवा की ओर ले गया। एक घंटा के बाद वह अपने आप को एक छतदार घर के हाॅलनुमा कमरे में बंद पाई जिसमें खिड़की नहीं थी। उसके अनुसार संतोष और राजेन्द्र ने उसका कपड़ा पफाड़ दिया और उसके साथ चारों ने मिलकर चार दिनों तक बलात्कार करता रहा। पिफर 27 जुलाई की रात्रि लगभग एक बजे राजेन्द्र और संदीप दो टैबलेट घोलकर उसे जबरन पिला दिया और उसके बाद गुडि़या को कुछ पता नहीं चला। पिफर 28 जुलाई को जब होश आया तो वह खुद को रेलवे अस्पताल समस्तीपुर में पाई। उक्त काण्ड की प्राथमिकी दर्ज की गई जिसमें पीडि़ता ने अपने चचरे भाई संतोष श्रीवास्तव, संदीप, अनुप श्रीवास्तव ;भाभी के भाईद्ध के साथ-साथ गांव के ही 58 वर्षीय राजेन्द्र पटेल को अभियुक्त बनाया है। ;काण्ड संख्या 202/14द्ध। बाद में पीडि़ता के ठीक होने पर न्यायालय में उसका 164 के तहत बयान दर्ज कराया गया। जिसमें उसने चारों के द्वारा जबरन अपहरण कर बलात्कार करने की बात बताई। संतोष, संदीप और अनुप को इस इल्जाम में जेल भेज दिया गया। दूसरी ओर सदर अस्पताल के चिकित्सक टीम ने अपनी मेडिकल रिर्पोट में बलात्कार की पुष्टि की है। पीडि़ता के विरोध्ी कह रहे हैं कि उस लड़की का अपफेयर चलता है। संभव है वह अपने ब्वायप्रफंेड के साथ रहकर यह नाटक की हो। पुलिस को इस एंगिल पर भी अनुसंधन करना चाहिए।
घटना की जांच के दौरान महिला थाना अध्यक्ष द्वारा पीडि़ता की मां प्रभावती देवी के नाम से जारी मोबाईल नम्बर 8294358168 का सीडीआर निकाला जिसमें मोबाईल नम्बर 9504948508 से 27 जुलाई 2014 को रात्रि के पौने बारह बजे 166 सेकेंड बात हुई थी। पिफर 30 जुलाई तक लगभग आठ-दस बार बातें हुई। 9504948508 नंबर के बारे में महिला पुलिस द्वारा पता करने पर मोबाइल सिम धरक का नाम मृत्युंजय राय पिता ब्रह्मानन्द राय, ग्राम- डुमरहर, थाना- दारौली, जिला- सीवान का पता चला। इतना ही नहीं पुलिस के अनुसंधन में बड़े चैंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। दर्ज प्राथमिकी के अनुसार 23 जुलाई को उस लड़की का अपहरण हुआ तथा उसे 27 जुलाई तक एक बंद कमरा में रखकर उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया। जबकि पुलिस अनुसंधन में यह तथ्य सामने आया है कि 24 जुलाई को उस लड़की ने शहर के दारोगा प्रसाद राय काॅलेज में नामांकन कराया था। उसका नामांकन रसीद संख्या 20665 है तथा राॅल नंबर 165 है। अब सवाल उठता है कि जो लड़की 23 जुलाई से 27 जुलाई तक अपहर्ता के कब्जे में रही उसने 24 जुलाई को काॅलेज जाकर नामांकन कैसे करा लिया?
इध्र, गुडि़या और उनके परिवार वाले 23 जुलाई की घटना के बाद लक्ष्मीपुर आ गए और एक किराये के एक मकान में रहने लगे। इसी बीच बीते 10 सितम्बर 2014 की रात्रि में गुडि़या अचानक पिफर गायब हो गयी। इस मुतल्लिक गुडि़या की मां प्रभावती देवी द्वारा 12 सितम्बर को नगर थाने में उसके अपहरण की एक और प्राथमिकी दर्ज करायी गयी। ;काण्ड संख्या 385/14द्ध इस अपहरण की प्राथमिकी में पुनः राजेन्द्र पटेल, इंदू देवी, अजय, को अभियुक्त बनाया गया। इध्र, राजेन्द्र पटेल ने सीवान अपर पुलिस अध्ीक्षक विवेकानंद के समक्ष आत्म सर्मपण कर दिया। जिसे बाद में अपहरण के मामले में जेल भेज दिया गया। पिफर बाद में पीडि़ता भी बरामद हो गई। यह सब घटना का एक पक्ष है। लेकिन घटना का दूसरा पक्ष भी है जो इन दिनों सीवान की सड़कों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
राजेन्द्र पटेल और पीडि़ता गुडि़या के पिता झुलनलाल श्रीवास्तव के बीच लगभग साढे़ 3 पफीट जमीन को लेकर विवाद वर्षों से चला आ रहा है। उस जमीन पर पीडि़ता का परिवार जबरन कब्जा कर निर्माण कार्य आरंभ कर रखा है। इस मामले में गौर करने वाली बात यह भी है कि पीडि़ता के चाचा पशुपति लाल 25 मई 2006 को कटहल का पेड़ काटने का मुकदमा पीडि़ता के परिवार वालों पर किया था। उसमें यही राजेन्द्र पटेल पीडि़ता के परिवार वाले के विरोध् में बतौर गवाह गोपालगंज कोर्ट में अपनी गवाही दी थी। इतना ही नहीं रेखांकित करने वाली बात यह भी है कि पीडि़ता का परिवार राजेन्द्र पटेल के पुत्रा के उपर भी 17 जुलाई 2009 को माझागढ़ थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इतना ही नहीं पीडि़ता अपनी भाभी के भाई पर अपहरण कर बलात्कार करने का आरोप लगाई है। जबकि उसकी भाभी दहेज प्रताड़ना को लेकर एक मुकदमा पीडि़ता के परिवार वालों पर पहले से कर रखा है।
गौर करने वाली बात यह भी है कि गुडि़या की भाभी अपने मायके में रह रही हैं और बीते 8 सितंबर 2014 को सीवान कोर्ट में उनकी मां विन्दू देवी के द्वारा परिवारवाद दायर किया गया था। उध्र, 10 सितंबर को पीडि़ता अचानक गुम हो जाती है और 12 सितंबर को उसकी मां गुडि़या के अपहरण का मुकदमा दर्ज कराती है। जिसमें वे अपनी समध्न इंदू देवी को भी अभियुक्त बनाती है। उध्र पीडि़ता की भाभी अंशु कुमारी द्वारा दायर परिवाद में अनुसंधनकर्ता ने प्रताड़़ना के मामले को सही पाया है। इध्र जिले के पुलिस कप्तान विकास वर्मन कहते हैं-‘प्रथम दृष्टया मामला बेहद संदेहास्पद लग रहा है।’ सवाल उठता है कि हकीकत क्या है? यह तो पूरी जांच के बाद ही पता चल पाएगीत्र

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