September 23, 2018

धोनी की मगरूर फितरतों ने किया टीम इंडिया का बेड़ा गर्क

By wmadmin123 - Wed Feb 26, 10:46 am

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शिकस्त-शिकस्त-शिकस्त, यही तो है वो लफ्रज जो पिछले कुछ अरसे से टीम इंडिया का पीछा छोड़ने का नाम नहीं ले रहा है। मिशन ‘ब्लैक कैप्स पर गये तो थे बादशाह बनकर पर वहां जीतना तो दूर, गंवा बैठे एक अहम सीरीज और वो तख्त-ओ-ताज जिसे सचिन तेंदूलकर, विरेन्द्र सहवाग, राहुल द्रविड़, गौतम गंभीर, सौरभ गांगुली, जहीर खान, हरभजन सिंह जैसे खिलाडि़यों की मौजूदगी में हमने हासिल किया था। दुख तो इस बात का है कि दुनिया की नंबर आठ की टीम के हाथों ‘àाइट वाश जैसी शिकस्त का हमें सामना करना पड़ा। इस करारी शिकस्त के साथ धेनी का ‘मिशन ब्लैक कैप्स पफेल हो गया। इस हार से न तो सीरीज बचा और न ही टीम इंडिया की विश्व क्रिकेट पर हासिल की हुर्इ बादशाहत, जिसे गंवाते उसे एक साल दो माह से ज्यादा का वक्त भी न लगा।
मौजूदा पांच एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय मैचों की श्रंखला के पहले नेपियर मैच में हमारे खिलाडि़यों ने टीम इंडिया की कटवार्इ नाक, हैमिल्टन की हार ने तोड़े उसके हाथ, आकलैंड मेें हुए ‘टार्इ ने टीम इंडिया के लिए श्रंृखला में खोली राहें, पिफर भी हैमिल्टन में मिली सीरीज की हार और वेलिंगटन के आखिरी मैच में हुआ ‘àाइट वाश! यही तो थी टीम इंडिया की पूरी श्रंृखला की कारकरदगी जिसकी वजह से हमें दुनिया की नंबर आठ की टीम के सामने घुटने टेक देने पड़े। इस तरह टीम इंडिया के सिर लग गया एक और कलंक! कलंक वो भी 0-4 से हार का। साल 2010 के कारनामें दोहराने न्यूजीलैंड गर्इ टीम इंडिया का दुनिया की आठवें नंबर की टीम ने ऐसी दुर्दशा कर डाली जिसकी उम्मीद शायद ही किसी को रही होगी।
सच न्यूजीलैंड के दौरे पर हमारी हार की हद ही हो गर्इ। गये थे ‘कीवीलैंड को पफतह करने पर अपनी ही सल्तनत लूटा बैठे। अब टीम इंडिया न तो चैमिपयन रही और न ही रही उसमें चैंमिपयन वाली वो बात जिसका हमारे खिलाड़ी दम भरा करते थे। इस हार के बाद यह तय हो चुका है कि विदेशी सरजमीं पर हम ‘नंबर वन कहलाने के काबिल नहीं रहे। विदेशी ध्रती पर यही तो है टीम इंडिया का वो खौपफनाक सच जिसकी सिक्रप्ट लिख रहे हैं हमारे वही खिलाड़ी जो अपे घरेलू विकेटोंं पर रनों के अंबार लगाकर तो सिपनिंग ट्रैक पर विकेटों की झड़ी लगाकर इतराते रहे हैं। विदेशी ध्रती पर धेनी की कप्तानी में, कामयाबी हासिल किये हुए आज एक अरसा बीत चुका है। आखिरी मर्तबा 23 जून 2013 को बर्मिंध्म के मैदान पर टीम इंडिया ने मेजबान इंग्लैंड टीम के खिलापफ पांच रनों से जीत हासिल की थी। गुजिस्ता तीन सालों में हम इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया, दक्षिण अप्रफीका और अब न्यूजीलैंड की सरजमीं पर एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों की सीरीज में शिकस्त खा चुके हैं। इस हार ने तो तेज बाउंसी विकेटों पर हमारी नाकामियों को एक बार पिफर से उजागर कर ही दिया है साथ ही बीसीसीआर्इ और उसके द्वारा गठित चयन समिति में शामिल सदस्यों के चयन प्रक्रियाओं पर भी प्रश्नचिन्ह लगा दिये हैं। न्यूजीलैंड दौरे से पहले कप्तान महेन्द्र सिंह धेनी ने गौतम गंभीर और चैतेश्वर पुजारा को एक दिवसीय टीम में शामिल करने की अपनी जोरदार वकालत की थी पर सेलेक्टरों ने उनकी इन बातों को नजरअंदाज करते हुए नये अनुभवहीन खिलाडि़यों के उफपर ‘कीवीलैंड के पफतह करने की जिम्मेदारी सौंप डाली। नतीजा आपके
सामने है। त्र

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