December 12, 2017

पश्चिम चंपारण: विधानसभा चुनाव 2015 ः टिकट के लिए दम लगा रहे नेता

By wmadmin123 - Fri Aug 21, 7:32 am

पवन कुमार पाठक

बिहार विधनसभा के चुनाव की तैयारी करीब सभी दलों की ओर से शुरू कर दी गई है। स्थानीय निकाय क्षेत्रा से विधन परिषद के हाल में संपन्न चुनाव में कांगे्रस प्रत्याशी राजेश राम की जीत से महागठबंध्न के नेता-कार्यकर्ता उत्साहित हैं। दूसरी ओर 25 जुलाई 2015 को मुुजफ्रपफरपुर की परिवर्तन रैली मंे प्रधनमंत्राी नरेन्द्र मोदी के भाषण के बाद भाजपा एवं उसके घटक दलों के कार्यकर्ता भी जोश में आ गये हैं। तीसरी ओर इन दोनों गठबंध्नों को चुनौती देने के लिए वाम मोर्चा ने भी कमर कस लिया है। हालांकि तीनों गठबंध्नों में सीटों के बंटवारे की स्थिति स्पष्ट नहीं है। पिफर भी जिताउफ उम्मीदवारों की तलाश में सभी पार्टियां लगभग समान जोश से लगी हुई हैं।
वाल्मीकिनगर विधनसभा क्षेत्रा से विधयक राजेश सिंह को जदयू का टिकट मिलना तय है। वे बसपा-राजद होते हुए जदयू में टिके हुए हैं। इस क्षेत्रा से राजग एवं वामदलों को ताकतवर प्रत्याशी की खोज है। बसपा भी प्रत्याशी की तलाश में है। पिछली बार राजद से किस्मत आजमाए मुकेश कुशवाहा को नयी पार्टी की दरकार है। भाजपा श्याम नारायण यादव या उनके किसी चहेते पर दांव लगाने की पिफराक मेें है। बगहा सीट पर जदयू का कब्जा है। विधयक प्रभात रंजन को जदयू का टिकट मिलना निश्चित है। भाजपा के द्वारा पूर्व मंत्राी रामप्रसाद यादव, रवीन्द्र श्रीवास्तव तथा मध्ुकर राय, रिंकू सिंह समेत किसी अन्य को प्रत्याशी बनाये जाने की चर्चा है। वामदलों की ओर से अभी तक किसी का नाम सामने नहीं आया है। रामनगर ;सुरक्षितद्ध क्षेत्रा पर भाजपा की भागीरथी देवी काबिज हैं। भागीरथी पांचवीं बार विधयक बनने के लिए अपनी किस्मत आजमायेंगी। राजद की ओर से पूर्व विधयक सतीश पासवान टिकट के सबसे बड़े दावेदार हैं। भाकपा ने ठाकुर राम के नाम का एलान कर रखा है। नरकटियागंज सीट पर भाजपा का कब्जा है। यहां के भाजपा विधयक सतीश चंद्र दुबे के लोकसभा के लिए चुन लिये जाने के बाद खाली हुई सीट पर हुए उपचुनाव में रश्मि वर्मा ने जीत दर्ज करायी। इस बार भी भाजपा उन्हीं को टिकट देगी ऐसा माना जा रहा है। उपचुनाव मंे कांग्रेस प्रत्याशी पफखरूद्दीन खां ने भाजपा को टक्कर दी थी। लेकिन कांग्रेस के मुक्तिनाथ उपाध्याय और राजद के मजहर आलम भी टिकट के लिए जोर लगा रहे हैं। वामदलांे की ओर से भाकपा माले के प्रत्याशी उतारने की संभावना है।
लौरिया क्षेत्रा से निर्दलीय जीते विनय बिहारी पूर्व मुख्यमंत्राी जीतनराम मांझी के खेमंे में हैं। लिहाजा, वे राजग के उम्मीदवार होंगे। राजद पुराने खिलाड़ी शंभू तिवारी को तो जदयू पूर्व विधयक प्रदीप सिंह को चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी में है। कांग्रेस पूर्व मंत्राी विश्वमोहन शर्मा के लिए यह सीट मांग सकती है। वामदलों के प्रत्याशी का चेहरा उजागर नहीं हो सकता है।
चनपटिया विधनसभा क्षेत्रा पर भाजपा के चंद्रमोहन राय आसीन है। उन्होंने सन्यास लेने की घोषणा तो की है, लेकिन अपने पुत्रा के लिए भाजपा की टिकट मांग सकते हैं। वैसे भाजपा की ओर से यहां बागियों की कतार भी छोटी नहीं है। यहां से विजय रंजन ठाकुर, राजकिशोर प्रसाद तथा दीपेन्द्र सर्रापफ भी चुनावी टिकट के लिए एड़ी-चोटी एक किए हुए हैं। राजद एजाज हुसैन या विनोद आर्य में से किसी को प्रत्याशी बना सकता है। यदि राजद ने कोई नया खेल शुरू किया तो यहां आश्चर्यजनक ढंग से किसी अन्य को भी प्रत्याशी बना सकता है। उध्र, चुनावी पंडितों का कहना है कि यहां से जदयू भी अपना कोई उम्मीदवार खड़ा कर सकता है, कतार में कई लोग हैं। यदि बेतिया सीट राजद के पास गई तो चनपटिया से जदयू अनिल कुमार झा, पूर्व प्रमुख वसंत सिंह अथवा किसी अन्य को अखाड़े में उतार सकती है। उध्र, कांगे्रस की ओर से नरेन्द्र शर्मा भी यहां से टिकट के लिए लंबे समय से दौड़ लगा रहे हैं। वैसे भाकपा ने अपने जिला सचिव ओमप्रकाश क्रांति के नाम की घोषणा की है।
सिकटा सीट पर निर्दलीय दिलीप वर्मा काबिज हैं। वे कभी भाजपा का समर्थन करते हैं तो कभी विरोध्। पिछले लोकसभा चुनाव मंे उन्होंने निर्दलीय ताल ठोक दी थी। अब देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इन्हें गले लगाती है या दूसरे यो(ा को टिकट थमाती है। जदयू पूर्व विधयक खुर्शीद आलम पर ही दांव लगायेगी। भाकपा ने यहां से सुबोध् मुखिया को प्रत्याशी बनाने की ठानी है। तो भाकपा माले अपने बड़ें नेता वीरेन्द्र प्रसाद गुप्ता को लड़ाने के लिए अडिग दिखती है। वैसे यहां से करीब आध दर्जन निर्दलीय उम्मीदवार भी पहले से ही प्रचार-प्रसार में जुटे दिखते हैं, इनमें प्रमुख उद्योगपति ध्नेश प्रसाद उपर्फ ध्नेश पटेल, प्रभु शरण उपर्फ मुन्ना श्रीवास्तव, वर्तमान प्रमुखपति मुन्ना सिंह, पूर्व सांसद पफैयाजुल आजम का पौत्रा रपफीउल आजम समेत अन्य की चर्चा है।
बेतिया विधनसभा क्षेत्रा से भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्षा रेणु देवी भी पांचवी बार विधयक बनने के लिए जोर लगा रही हैं। जदयू ने पिछले चुनाव के निकटतम प्रतिद्वंद्वी अनिल कुमार झा को उम्मीदवार बना सकता है। पार्टी के जिला अध्यक्ष रहे डा. एनएन शाही बेतिया या चनपटिया से टिकट के लिए टकटकी लगाए हुए हैं। पूर्व सांसद वैद्यनाथ प्रसाद महतो भी अपने लिए सीट की जुगाड़ में लगे हैं। राजद की ओर से पूर्व विधयक बीरबल यादव, इंद्रजीत यादव, महेन्द्र यादव राजेश यादव पिफलवक्त दावेदारी कर रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि पूर्व कांगे्रस प्रत्याशी रहे शमीम अख्तर के छोटे भाई तथा वाल्मीकिनगर से पूर्व प्रत्याशी रहे मो. इरशाद यहां से जोर आजमाइश कर सकते हैं। भाकपा ने अध्विक्ता जवाहर प्रसाद को टिकट देने का पफैसला किया है। माकपा अपने जिला सचिव प्रभुराज नारायण राव को टिकट देना चाहती है। नौतन में जदयू की डा. मनोरमा प्रसाद का कब्जा है। पार्टी इस बार भी उन्हीं को उम्मीदवार बनायेगी। लेकिन पूर्व सांसद वैद्यनाथ प्रसाद महतो अपने और पुत्रा के लिए एक साथ दोहरी प्रयास जारी रखे हुए हैं। लिहाजा राजद, कांगे्रस का कोई नेता खुलकर इस सीट पर पूरी दावेदारी नहीं कर रहा है। भाजपा इस सीट पर पूरी दावेदारी के साथ उतरने का मन बनायी है, लेकिन उसके घटक दल लोजपा से इंजीनियर संजय कुमार के नाम का प्रस्ताव गया है। हालांकि यहां से पूर्व विधयक नारायण प्रसाद भी भाजपा व उसके घटक दलों में राह तलाश रहे हैं। वैसे भाजपा को सीट मिली तो उम्मीदवारों में सत्येन्द्र शरण, बबुआ जी दुबे, दीपेन्द्र सर्रापफ, रालोसपा से जिलाध्यक्ष कैलाश प्रसाद के पुत्रा, नंदकिशोर कुशवाहा, अमित गिरी, अजय गिरि तथा समाजसेवी राजकुमार कुशवाहा के नामों की चर्चा है। उध्र, जिले में इस बार ‘हम’ के प्रत्याशी भी लौरिया के अलावा वाल्मीकिनगर तथा नौतन से सीट लेने की पिफराक में हैं। दूसरी ओर शिवसेना के प्रत्याशी जिले के सभी सीटों से चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे हैं। नौतन से शिवसेना के उम्मीदवार की दावेदारी में मुखिया पति नवल किशोर पाठक के नाम की चर्चा है।
पिछले लोक सभा चुनाव की तस्वीर पर नजर डाले तो जदयू का नरकटियागंज और चनपटिया को छोड़कर कहीं भी अच्छा प्रदर्शन नहीं रहा। राजद और कांगे्रस के मतों को जोड़ने के बाद बराबरी का आंकड़ा दृष्टिगोचर होगा। विधन सभा के पिछले चुनावों में इस जिले से राजद, कांग्रेस और वामदलों की विदाई हो गई थी। लेकिन वक्त के साथ गठबंध्नों के बदलते रंग-ताल से कार्यकर्ताआंे में उत्साह का नया संचार हुआ है। परंतु प्रायः सभी दलों के टिकटार्थियों की उमड़ी भीड़ के सामने टिकट बांटने वालों की स्थिति ठीक नहीं है। जिस नेता को टिकट नहीं मिलेगा वह तो चुनाव में गुल खिलायेगा ही। पफलतः कभी-कभी गठबंध्न मजाक बन जाता है। सीट के बंटवारे के साथ टिकटार्थियांे के पलटी मारने की कथा का आगाज होता है और चुनाव प्रक्रिया की समाप्ति के बाद कथा का अंतिम अध्याय समाप्त होता है। अब नेताआंे की निष्ठा टिकट में है। इनके लिए दल कोई मायने मतलब नहीं है।

Leave a Reply

Powered By Indic IME