September 24, 2018

पूर्वी चंपारण प्रभारी मंत्री इस्तीफा प्रकरण रमई राम के इस्तीफे के मायने

By wmadmin123 - Wed Jul 22, 11:34 am

ब्रह्मानंद ठाकुर

सूबे के वरिष्ठ काबिना मंत्राी रमई राम ने आखिरकार पूर्वी चंपारण जिले के प्रभारी मंत्राी पद से इस्तीपफा दे ही दिया। उनके द्वारा दिया गया यह इस्तीफा अनायास नहीं है। पार्टी सूत्रों की माने तो कथित सामंती मिजाज वाले नीतीश कुमार की सरकार में सूबे के कद्दावर दलित नेता रमई राम को अपमानित करने की घटनायें कई बार घट चुकी है। रमई ने पिछले दिनों प्रभारी मंत्राी पद से जो इस्तीपफा दिया उसे भी इसी कड़ी से जोड़ कर देखा और समझा जा रहा है। बतौर प्रभारी मंत्राी रमई राम हाल ही में नेपाल में आये विनाशकारी भूकंप से प्रभावित मोतिहारी में राहत और बचाव कार्य  में पूरी मुस्तैदी से जुटे हुए थे। उनके परिवहन विभाग का पूरा महकमा उनके साथ था। भूकंप पीडि़तों के राहत और बचाव कार्य में कहीं से कोई कोताही की खबर भी नहीं थी कि मुख्यमंत्राी नीतीश कुमार ने जल संसाध्न मंत्राी विजय कुमार चैध्री को वहां का विशेष प्रभारी मंत्राी बना दिया। रमई राम ने नीतीश कुमार के इस कदम को प्रभारी मंत्राी के रूप में अपनी अक्षमता  करने वाला मानते हुए इस्तीपफा दे दिया। हद तो तब हो गई जब उनके इस्तीपफे पर नीतीश कुमार ने सपाट लहजे में यह कह दिया कि इस विपदा की घड़ी में यदि कोई इस्तीपफा देता है तो वे उसे तत्क्षण स्वीकार कर लेंगे। आखिर वह कौन-सा कारण था कि एक प्रभारी मंत्राी के रहते हुए दूसरे विशेष प्रभारी मंत्राी को नियुक्त किया गया। अंतर्कलह से जूझ रहे जदयू खेमे में यह प्रश्न हवा में तैरने लगा है। स्वयं रमई राम इसे अपना अपमान समझ रहे हैं। थोड़ा पीछे लौटने पर हम पाते हैं कि रमई राम के साथ ऐसा कोई पहली दपफा नहीं हुआ है। पाठकों को याद होगा कि गत साल नीतीश कुमार के मुख्यमंत्राी पद से इस्तीपफे की घोषणा के बाद बैठक से निकलते हुए नीतीश कुमार के खास समझे जाने वाले कुछ लोगों ने रमई राम के साथ ध्क्का-मुक्की की थी। तब उस घटना की तस्वीर अखबारों में भी छपी थी। नीतीश कुमार इस पर चुप्पी साध् गये थे। पूर्व मुख्यमंत्राी जीतनराम मांझी के इस्तीपफे के उपरान्त नीतीश कुमार के द्वारा पुनः सत्ता संभालने के बाद रमई राम ने अपने को दलित नेता के रूप में उपमुख्यमंत्राी बनाने की मांग की थी जिसे अनसुनी कर दी गई। इससे पूर्व उनके सरकारी आवास का रास्ता बंद कर दिया गया था। गत लोकसभा चुनाव में हाजीपुर संसदीय सीट से वे टिकट के दावेदार हुए थे। उनकी वह मंशा भी पूरी नहीं की गई। बिना उनको बताए उनके परिवहन मंत्रालय के प्रधन सचिव शशि शेखर शर्मा को हटा दिया गया। ऐसी स्थिति पैदा कर दी गई कि रमई राम को प्रभारी मंत्राी पद से इस्तीपफा देना पड़ गया। उनके इस इस्तीपफे पर भाजपा नेता सुशील मोदी ने तो यहां तक कह दिया कि नीतीश कुमार महादलितों का अपमान कर रहे हैं। अब यहां रमई राम के राजनीतिक सपफरनामे की चर्चा कुछ लाजिमी लगती है। दलित नेता रमई राम का राजनीतिक सपफर एक वार्ड कमिश्नर से प्रदेश के काबिना मंत्राी तक का सपफर है। इससे पहले वे नगर पालिका स्कूल में शिक्षक हुआ करते थे। 1965 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के सदस्य बने। इसके बाद जिले के तत्कालीन कांग्रेस नेता रघुनाथ पाण्डे की प्रेरणा से राजनीति में आये। 1969 में अपने मुजफ्रपफरपुर शहर के वार्ड संख्या 13 से वार्ड कमिश्नर चुने गए। आज भी रमई राम स्वयं को राजनीति में आने का श्रेय स्वर्गीय रघुनाथ पाण्डेय को ही देते हैं। वार्ड कमिश्नर के बाद वे पहली बार 1972 में बोचहा सुरक्षित विधनसभा क्षेत्रा से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े और जीत हासिल की। नक्सल प्रभावित मुशहरी प्रखंड में जेपी के नेतृत्व में चलाये जा रहे विकास कार्यक्रमों में स्थानीय कुछ दबंग कार्यकर्ताओं द्वारा किए जा रहे लूट-खसोट का विरोध् करने और विधनसभा में इसके विरू( आवाज उठाने के कारण उनकी गिनती जेपी के विरोध्यिों में की जाने लगी। इस कारण 1977 के विधनसभा चुनाव में उन्हें टिकट नहीं मिला। वे चुनाव नहीं लड़े तब यहां से कमल पासवान चुने गये। 1980 के विधनसभा चुनाव में जनता पार्टी, 1985 में लोकदल, 1990 में जनता दल, 1995 में जनता दल, पिफर 2000 ई. में राजद के टिकट पर बोचहा विधनसभा क्षेत्रा से वे निर्वाचित होते रहे। 2005 में पफरवरी और नवम्बर में दो विधनसभा चुनाव कराये गए जिसमें रमई राम राजद उम्मीदवार  के रूप में विजयी हुए। इसके बाद 2009 में विधयक पद से इस्तीपफा देकर कांग्रेस के टिकट पर गोपालगंज से लोकसभा का चुनाव लड़े लेकिन सपफलता नहीं मिली। इसके बाद बोचहा के उनके इस्तीपफे के कारण रक्त सीट पर कराये गये चुनाव में उन्हें पराजय का मुंह देखना पड़ा। उस  चुनाव में राजद के मुसापिफर पासवान जीते थे। इसके बाद पिफर गत विधनसभा चुनाव में जदयू प्रत्याशी के रूप में उन्होंने अपनी जीत दर्ज करायी। इस तरह वे बोचहा विधनसभा सीट से अब तक नौ बार चुनाव जीत चुके हैं। केवल एक उप चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा है। 1992 में अविभाजित बिहार में राजद के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर आज तक प्रदेश सरकार में खाद्य आपूर्ति, परिवहन, कल्याण, ग्रामीण विकास, विद्युत और राजस्व मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभालने वाले मंत्राी रमई राम का पूर्वी चंपारण के प्रभारी मंत्राी पद से इस्तीपफा देने की परिस्थति पैदा करना उनके क्षेत्रा में चर्चा का विषय बन गया है।

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