October 21, 2017

फिर फॉर्म में है बड़ी उम्र का बड़ा खिलाड़ी

Photo GalleryBy wmadmin123 - Tue Oct 22, 7:53 am

ढ़लती उमz पर चेहरे पर थकान की जरा-सा भी सिलवटें नहीं! उसकी आंखों में तो बस जुनून है, उफंचाईयों पर ‘ट्राईकलर’ लहराते देखने की। कामयाबियां हासिल करने का भरपूर जज्बा है उसमें, तभी तो वो आज भी ढ़लती उमz के बावजूद कोर्ट पर घंटों पसीना बहाया करता है। उसकी जीत का जश्न मनाने की अदा भी औरों से बिल्कुल ही मुख्तलिपफ है जो टेनिस प्रेमियों को भी एक अजीब-सा लुत्पफ दे जाया करता है। उमz के 40वें दहलीज को पार कर चुके उस खिलाड़ी का नाम है ‘लिएंडर पेस’ जिसने अब तक 31 गैंzड स्लैम खिताब अपने नाम कर लिए हैं। अभी हाल ही में उसने अपने चेक जोड़ीदार रोडेपफ स्टेपनेक के साथ मिलकर यू.एस. ओपन मेन्स डबल्स का 14वां गzैंड स्लैम खिताब जीता है। लिएंडर पेस और स्टेपनेक की जोड़ी जब यू.एस. ओपन में पेया और बzूनों के मे मुकाबिल थी तब कांटेदार मुकाबले की अटकलें लगाई जा रही थीं। लोगों की ये अटकलें शत-प्रतिशत सही साबित भी हुईं। दोनों जोड़ियों के दरम्यान एक सनसनीखेज मुकाबला देखने को मिला। इस मुकाबले में लिएंडर पेस की ध्ुंआधर ‘सर्विस’ और खूबसूरत ‘नेट~स प्ले’ की ऐसी आंध्ी चली की पेया और बzूनों की खिताब जीतने की तमाम उम्मीदें ही नेश्तनाबूद हो गईं। बढ़ती उमz में किसी खिलाड़ी द्वारा ऐसा जीवंत प्रदर्शन करना सचमुच आश्चर्यजनक ही माना जाएगा।

एक जमाना था जब अंतरराष्ट्रीय टेनिस के डबल्स मुकाबले में लिएंडर पेस और महेश भूपति की तूती बोला करती थी।
‘इंडियन एक्सप्रेस’ के नाम से मकबूल इन दोनों जोड़ियों का टेनिस कोर्ट पर का सपफर कुछ आपसी मतभेदों की वजह से छोटा बन कर रह गया। अगर दोनों इकट~ठे मिलकर खेल रहे होते तो न जाने कितने गzैंड स्लैम खिताब इन दोनों जोड़ियों के नाम होते। लिएंडर पेस और महेश भूपति की जोड़ियों ने भारत के लिए कई यादगार जीतें हासिल की है। इनकी जोड़ियों ने मिलकर तीन गzैंड स्लैम जीते पर आपसी मतभेदों की वजह से इन दोनों की जोड़ियां टूट गईं, जिसका खामियाजा हमें डेविस कप, ओलंपिक, बिंवलडन जैसे टूर्नामेंटों में भुगतना पड़ा। टेनिस महारथियों की मानें तो लिएंडर और महेश के दरम्यान दरारें पैदा करने के पीछे रोहन बोपन्ना का बड़ा हाथ रहा है। टेनिस जानकारों के मुताबिक बोपन्ना ने अपने खुद के स्वार्थ के लिए इस स्पेशलिस्ट जोड़ी के बीच दरारें पैदा कीं। हालांकि जिन वजहों से चतुर बोपन्ना ने अपनी चालें चली वो उन्हें खुद भी रास न आईं। महेश के साथ उनकी भी जोड़ी टूटती-बनती रही। जहां तक लिएंडर पेस की बात थी तो वो तमाम विवादों, मतभेदों को दरकिनार करते हुए महेश भूपति के साथ जोड़ी बनाकर खेलते रहे। एक सच्चे भारतीय होने का पफर्ज अदा करने वाले लिएंडर पेस पिछले लंदन ओलंपिक में भी सारे मतभेदों को भुलाकर महेश भूपति, रोहन बोपन्ना के साथ खेलने को तैयार थे, पर इन खिलाड़ियों के अहं के आगे उनकी सारी उम्मीदों पर पानी पिफर गया जिसकी वजह से कम से कम एक शर्तिया ओलंपिक तमगा हमारे हथेलियों से छिटक गया। शायद इस बात का मलाल पूरे मुल्क को तो है ही खुद लिएंडर भी इस टीस को अब तक महसूस करते होंगे।

भारतीय टेनिस का जांबाज सिपहसलार लिएंडर पेस की टेनिस कोर्ट पर आमद ध्माकेदार रही थी। 17 जून 1973 को कोलकता में जन्में लिएंडर ने 1990 में ही जूनियर यु.एस. ओपन तथा जूनियर बिंवलडन खिताब जीतकर पहली मर्तबा अपनी आमद का एहसास लोगों को करा दिया था। वर्ष 1992 में लिएंडर पेस को पहली बार रैंकिंग में पहले नंबर के खिलाड़ी बनने का सम्मान हासिल हुआ। जहां तक प्रोपफेशनल टेनिस एरिना में दस्तक देने की बात है तो उन्हें यह एजाज 1991 में हासिल हुआ। लगभग दो दशक का खेल सपफर सचमुच किसी खिलाड़ी के खेल के प्रति उसकी सच्ची लगन और एकागzता का एहसास कराता है। 1996 के अटलांटा ओलंपिक टेनिस का कांस्य पदक जीतने वाले लिएंडर पेस की उस कामयाबी को खेल प्रेमी शायद ही कभी भुल पायेंगे। अपने 23 वर्षों के इस बेदाग सपफर में लिएंडर ने मुल्क को जो कुछ दिये हैं वह सचमुच युवा खिलाड़ियों के लिए मार्गदर्शन का काम करता रहेगा। ढ़लती उमz की थकानों की परवाह किये बगैर चेहरे पर चिरपरिचित एक पफलसपफी मुस्कान बिखेरते किसी नई कामयाबी को तलाशते लिएंडर पेस को आज भी टेनिस कोर्ट पर मशक्कत करते देखा जा सकता है।

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