October 21, 2017

बीजेपी के घर में घमासान

Photo GalleryBy wmadmin123 - Mon Oct 21, 10:46 am

महाभारत काल में एकलव्य और दzोणाचार्य की गुरु-शिष्य परंपरा की तरह ही मोतिहारी के चिरैया विधनसभा क्षेत्रा के भाजपा विधयक अवनीश कुमार सिंह अपने राजनीतिक गुरु एवं पार्टी के भीष्म पितामह स्व. कैलाशपति मिश्र के साथ गुरु-शिष्य परंपरा का निर्वहन करने के कारण दल में हाशिये पर रहे। लिहाजा, कैलाशपति मिश्र के दिवंगत होते ही अवनीश सिंह के दिल का गुबार पफुट पड़ा और उन्होंने पार्टी के खिलापफ बगावत का बिगुल पफूंकते हुए आग उगलना शुरू कर दिया है। यही नहीं, अवनीश सिंह ने भाजपा सांसद राधमोहन सिंह के परंपरागत मोतिहारी संसदीय क्षेत्रा से चुनाव लड़ने का ऐलान कर राधमोहन सिंह की परेशानी बढ़ा दी है। लिहाजा, जिला भाजपा में राधमोहन सिंह के समर्थकों ने अवनीश सिंह के खिलापफ मोर्चा खोल दिया है। लेकिन अवनीश सिंह अकेले सभी विरोध्यिों पर भारी पर रहे हैं। मोतिहारी संसदीय क्षेत्रा से चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके अवनीश सिंह पार्टी लाईन से अलग हटकर मुख्यमंत्राी नीतीश कुमार का गुणगान कर रहे हैं और जदयू में शामिल होने का उन्होंने स्पष्ट संकेत भी दे दिया है।

छात्र जीवन से जनसंघी रहे अवनीश कुमार सिंह 35 सालों से भगवा पार्टी के झंडाबरदार रहे हैं। साथ ही पांच टर्म से भाजपा के विधयक हैं। चार दपफा ढाका विधनसभा क्षेत्रा का भाजपा विधयक के रूप में प्रतिनिध्त्वि कर चुके अवनीश सिंह ने वर्ष 2009 में चिरैया विधनसभा क्षेत्रा से जीत दर्ज ‘यादवी’ किला को ध्वस्त किया था। वर्ष 1985 में पहली बार ढाका विधनसभा क्षेत्रा से अवनीश सिंह ने चुनाव लड़ा था और 19 हजार से चुनाव हारकर वे दूसरे नंबर पर रहे थे। जिले के पताही थाना क्षेत्रा के जिहुली गांव के रहने वाले अवनीश कुमार सिंह के परिवार पर सरस्वती और लक्ष्मी दोनों देवियों का आशीर्वाद रहा है। उनके पिता स्व. विन्ध्याचल सिंह रांची में प्रशासनिक सेवा में थे। बाद के दिनों में उन्होंने नौकरी छोड़कर ढाका विधनसभा क्षेत्रा से दो बार निर्दलीय चुनाव लड़ा। लेकिन वे मामूली अंतर से चुनाव हारे थे। लिहाजा, छात्रा जीवन से ही भगवा पार्टी की राजनीति कर रहे अवनीश सिंह ने पिता के सपनों को साकार करने के लिए चुनाव लड़ा और अपने दूसरे प्रयास में वर्ष 1990 में पचास हजार से अधिक मतों से जीतकर विधयक बने। वर्ष 1998 में अवनीश सिंह ने सीतामढ़ी लोकसभा क्षेत्रा से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था जिसमें वे हार गये। उस चुनाव में उनका स्थान दूसरा था। मोतिहारी स्थित मुंशी सिंह काWलेज से साईंस गzेजुएट अवनीश सिंह ने पार्टी के अंदर अपने 35 वर्षों के राजनैतिक जीवन में राजनीतिक गुरु कैलाशपति मिश्र के कहने पर अपनी महत्वाकांक्षा को दबाये रखा। लेकिन भाजपा के भीष्म पितामह कैलाशपति मिश्र के दिवंगत होने के बाद उनकी महत्वाकांक्षा ने परवाज भरना शुरू कर दिया है। लिहाजा, उन्होंने संसदीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर पार्टी के अंदर खलबली मचा दी है और वह भी कभी उनके भगवान राम की तरह ज्येष्ठ भाई रहे मोतिहारी के भाजपा सांसद एवं अनुशासन समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह उत्तराखंड प्रभारी राधमोहन सिंह के खिलापफ। दरअसल, एक जमाने में अवनीश कुमार सिंह और राधमोहन सिंह की जोड़ी राम-लक्ष्मण की जोड़ी के रूप में मशहूर थी। अवनीश सिंह कोई भी कपड़ा एक जोड़ा खरीदते थे। एक अपने लिए तथा एक राधमोहन सिंह के लिए। यहां तक की वर्ष 1989 के संसदीय चुनाव में भाजपा के टिकट पर भाग्य आजमा रहे राधमोहन सिंह के इलेक्शन एजेंट अवनीश सिंह ही थे और उन्हें अपना कुर्ता पहनाकर दिल्ली ले गए थे। चुनाव जीतने के बाद राधमोहन सिंह ने अवनीश सिंह के मां के बारे में कहा था कि ‘हमारी मां जिहुली में रहती है।’ इन दोनों नेताओं में रही ऐसी भाईचारगी में थोड़ी-सी लकीर वर्ष 1989 में टिकट बंटवारे के समय ही खींच गयी थी। जब टिकट के लिए कैलाशपति मिश्र के पास गए दोनों नेताओं को श्री मिश्र ने बताया कि मोतिहारी संसदीय क्षेत्रा से अवनीश सिंह को टिकट मिलेगा। लेकिन अवनीश सिंह ने राधमोहन सिंह के नाम का जब प्रस्ताव रखा तो पहले तो श्री मिश्र नहीं मानें, लेकिन बाद में अवनीश सिंह को श्री मिश्र ने ये कहा था कि ‘टिकट तो राधमोहन सिंह को दे रहा हूं लेकिन राधमोहन को जिताकर तुमको लाना है।’ बाहर निकलने पर जब राधमोहन सिंह ने अवनीश सिंह को ये कहा कि ‘आपने अपने लिए टिकट क्यों नहीं ले लिया?’ तब अवनीश सिंह का माथा ठनका। क्योंकि कैलाशपति मिश्र के सामने राधमोहन सिंह ने इसका जिक्र भी नहीं किया था। हालांकि अपने गुरु को दिया वचन निभाते हुए अवनीश सिंह ने राधमोहन सिंह को उस चुनाव में जिताने के लिए ऐंड़ी-चोटी एक कर दी और राधमोहन सिंह को जिताकर संसद में भेजा। बाद में दोनों के बीच मनमुटाव की लकीर तब और ज्यादा गहरी हो गयी जब विपक्षी दल के रहे रघुनाथ झा ने विधनसभा चुनाव के दरम्यान मध्ुबन विधनसभा क्षेत्रा से भाजपा द्वारा कोई प्रत्याशी नहीं देने के एवज में जनता दल द्वारा विभिन्न चार विधनसभा क्षेत्राों से एक भी प्रत्याशी नहीं खड़ा करने का प्रस्ताव रखा था। जिसपर अवनीश सिंह ने अपनी सहमति देते हुए पार्टी के अंदर रघुनाथ झा के प्रस्ताव को रखा। लेकिन राधमोहन सिंह नहीं माने, और मध्ुबन विधनसभा क्षेत्रा से रामजी सिंह को पार्टी के टिकट पर उतार दिया। जहां से पार्टी की हार भी हुई थी। इसके बाद से ही दोनों के रिश्तों में आई दरार दिन-प्रतिदिन चौड़ी होती गयी। उसके बाद से दोनों एक ही पार्टी में रहते हुए भी एक दूसरे पर प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से अपनी भड़ास निकालते रहे हैं। जिसके परिणामस्वरूप ही अवनीश कुमार ने मोतिहारी संसदीय सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। साथ ही गुरु स्व. कैलाशपति मिश्र के स्वर्गवास के बाद अपने सपने को हकीकत में बदलने को बेकरार है। इसके अलावा पार्टी से उनको शिकायत यही है कि 35 वर्षांे से भाजपा की सेवा वे लगातार करते आ रहे हैं लेकिन उन्हें अब तक न ही कोई मंत्राी पद सरकार में रहने के दौरान मिला तथा न ही पार्टी के अंदर वरिष्ठ होने के बावजूद कोई सम्मान ही मिला। लिहाजा, पार्टी छोड़ने का उन्होंने मन बनाते हुए जदयू में शामिल होने की शुभ घड़ी का इंतजार कर रहे हैं। मुख्यमंत्राी नीतीश कुमार ने अवनीश सिंह को हरी झंडी देते हुए मोतिहारी लोकसभा क्षेत्रा से टिकट देने का वादा भी किया है। दरअसल, भाजपा से गठबंध्न टूटने के बाद नीतीश कुमार को मोतिहारी लोकसभा क्षेत्रा के लिए भाजपा सांसद राधमोहन सिंह को चुनौती देने के लिए एक कíावर नेता की आवश्यकता थी जो भाजपा के खिलापफ दहाड़ सके। साथ ही भाजपा को तोड़ना भी नीतीश के लिए जरूरी था। जो अवनीश कुमार सिंह के रूप में खुद-ब-खुद उनकी झोली में टपकने को तैयार है। चर्चा है कि कुछ दिनों पूर्व अवनीश कुमार सिंह ने अपने विधनसभा क्षेत्रा की एक समस्या के बहाने नीतीश कुमार से मुलाकात कर अपनी सारी शर्तों पर मुहर लगवाई थी। वैसे इनकी खिचड़ी तो पहले से पक रही थी।

बताया तो यहां तक जा रहा था कि लालू प्रसाद यादव से भी अवनीश कुमार की बात हुयी थी। लेकिन लालू प्रसाद यादव से उनकी डील नहीं हो पाई। लिहाजा, अवनीश सिंह ने नीतीश कुमार के तरपफ पींगे बढ़ाना शुरू किया, जिसमें उन्हें सपफलता मिलती दिख रही है। इस पूरे मामले पर अवनीश कुमार सिंह ने बताया कि उनका उठ रहा यह कदम सही है और वक्त आने पर लोगों को खुद पता चल जायेगा। दरअसल, हिंदूवादी छवि होने के बावजूद अल्पसंख्यकों में भी अवनीश कुमार की पैठ है। क्योंकि, चंपारण के अल्पसंख्यकांे के सर्वमान्य नेता मरहूम मोतिउर्रहमान का बरदहस्त रहा है, और अब उनके पुत्रा मो. पफैसल रहमान की नजदीकी अल्पसंख्यकों को लुभाने में उनके काम आ रही है। इसी विश्वास की बदौलत अवनीश सिंह हुंकार भर रहे हैं। पार्टी से बगावत के पीछे अवनीश सिंह की बढ़ी महत्वाकांक्षा तो है ही, इसके अलावा चंपारण में भाजपा के अंदर राधमोहन सिंह की तानाशाही व्यवहार को चुनौती देना भी है। दरअसल, राधमोहन सिंह चंपारण में अपने इर्द-गिर्द पफटकने नहीं देते हैं जो अपने क्षेत्रा में राWबिन हुड की छवि रखने वाले अवनीश सिंह के लिए बर्दाश्त होना मुश्किल है। इध्र भाजपा के एक विधयक ने अवनीश सिंह द्वारा मोतिहारी से चुनाव लड़ने की घोषणा करने पर ‘आWपफ द रिकाWर्ड’ यह कहा था कि ‘अब राधमोहन जी को पता चलेगा, हिम्मत है तो अवनीश सिंह को जवाब देकर दिखाए।’

भाजपा से अवनीश कुमार सिंह की बगावत की बात पर पार्टी के अनुशासन समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह सांसद राधमोहन सिंह मोतिहारी में पत्राकारों को देखकर बिदकते रहे, बाद मंे पटना जाकर राधमोहन सिंह ने बयान जारी करते हुए कहा कि अवनीश सिंह का यह पूर्व का इतिहास है। पहले भी राजद एवं कांगzेस में हाथ-पांव तो मार ही चुके हैं, साथ ही उन्हांेने विपक्षी दलों के प्रत्याशियों के लिए भी चुनाव में काम किया है। राधमोहन सिंह के बयान पर पलटवार करते हुए अवनीश सिंह ने राधमोहन सिंह को मोतिहारी का ‘आसाराम बापू’ तक कह डाला। भाजपा के जिलाध्यक्ष सुनील मणि तिवारी ने राधमोहन सिंह की ही भाषा बोलते हुए अवनीश कुमार सिंह को नीतीश का एजेंट बताया तथा कहा कि नीतीश कुमार ने उन्हें लालच देकर पार्टी के खिलापफ उनसे बुलवा रहे हैं। सुनील मणि तिवारी के अनुसार अवनीश कुमार की बगावत का चुनाव में कोई असर नहीं पड़ने वाला है।

जदयू जिलाध्यक्ष प्रमोद सिन्हा से जब अवनीश सिंह के अगले कदम की जानकारी दी गयी तो पहले वे उत्साहित दिखे लेकिन प्रतिक्रिया के नाम पर चुप्पी साध् गए। इससे तो यही प्रतीत होता है कि जिला जदयू के नेता इस इंतजार में हैं कि कब अवनीश सिंह पार्टी ज्वाइन कर रहे हैं। वहीं राजद के जिलाध्यक्ष बच्चा यादव ने अवनीश सिंह के इस कदम पर बताया कि अवनीश कुमार सिंह पहले लालू यादव के पास गए थे। लालू यादव ने जब भाव नहीं दिया, तो उन्होंने जदयू की ओर रुख कर लिया। जबकि कांगzेस के नेताओं का मानना है कि अवनीश सिंह भाजपा को बारगेन कर रहे हैं। कांगzेस नेताअेां के अनुसार हर चुनाव में अवनीश सिंह पार्टी पर दवाब की राजनीति के तहत यह नौटंकी करते हैं। बहरहाल, अवनीश कुमार सिंह का अपनी पार्टी के खिलापफ पफूंके गए बिगुल का क्या हश्र होता है यह तो आगामी लोकसभा चुनाव का परिणाम बतायेगा। लेकिन अगर समय रहते बागी रुख अख्तियार कर चुके अवनीश सिंह को पार्टी द्वारा नहीं मनाया गया तो निश्चित रूप से अवनीश अपने बागी तेवर से भाजपा के भावी प्रधनमंत्राी के उम्मीदवार नरेंदz भाई मोदी के सपने को तोड़ने की कड़ी साबित हो सकते हैं।

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