- lokprasang - http://lokprasang.in -

भागलपुर: आरएसएस के जरिए बीजेपी बिछा रही नयी बिसात

Posted By wmadmin123 On July 22, 2015 @ 8:49 am In ज़िलानाम | No Comments

अजय कुमार झा

भागलपुर को आरएसएस का गढ़ माना जाता रहा है। लेकिन बीते दो चुनावों ; लोकसभा चुनाव एवं विधनसभा उपचुनावद्ध के परिणामों ने आरएसएस के चेहरे पर चिंता की लकीरें बढ़ा दी है। लोकसभा चुनाव में जहां भाजपा के उम्मीदवार शाहनवाज हुसैन को मुंह की खानी पड़ी वहीं विधनसभा उपचुनाव में भी महगठबंध्न के कांग्रेसी उम्मीदवार अजित शर्मा ने अपनी जीत दर्ज कराकर आरएसएस एवं भाजपा को यह संकेत दे गया कि अब यहां से उनके पैर उखड़ चुके हैं। लिहाजा, आरएसएस ने भागलपुर पर अपनी खास नजर गड़ा दी है। बीते 14 अप्रैल 2015 को अम्बेदकर जयंती के अवसर पर आरएसएस के सरसंघ चालक मोहन भागवत भागलपुर पधरे थे। यहां छः दिवसीय कार्यकर्ता विकास वर्ग सह प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया था। वे तीन दिनों तक भागलपुर में रहे भी। सूत्रा बताते हैं आरएसएस प्रमुख मोहन राव भागवत संघ की शहरी पहचान को बदल कर ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाले दलित व आदिवासी समाज के बीच में इसे प्रतिष्ठित करना चाहते हैं। माना जा रहा है कि संघ प्रमुख की यह सोच आगामी बिहार विधनसभा चुनाव के लिए लाभदायक साबित होगी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आगामी बिहार विधनसभा चुनाव में भाजपा को दो-तिहाई बहुमत दिलाने हेतु वातावरण तैयार करने की मंशा से संघ प्रमुख भागलपुर आये थे।
भागलपुर शहर में आहूत इस प्रशिक्षण शिविर में 254 स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित किया गया। भागलपुर जिले का प्रतिनिध्त्वि करने के लिए टीएनबी काॅलेज के प्राध्यापक प्रो. राणा प्रताप सिंह, जिला संघ चालक और कहलगांव निवासी मदन कुमार को जिला कार्यवाहक के रूप में चयन किया गया था। ज्ञात हो कि आरएसएस ने अविभाजित बिहार को पुराने समय से ही दो भागों में विभक्त कर रखा है। उत्तर बिहार एवं दक्षिण बिहार के नाम से अविभाजित बिहार को आरएसएस के लोग पहचानते हैं। इसलिए दोनों भाग के करीब 254 प्रतिनिध्यिों ने इस कार्यक्रम में बतौर प्रशिक्षणार्थी प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षिन देने हेतु सभी जिलों के जिला संघ चालक एवं जिला कार्यवाहक को चयनित किया गया था। संप्रति भागलपुर के नगर प्रचारक का स्थान रिक्त है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भागलपुर नगर स्थित अलीगंज मुहल्ले के निवासी बाल मुकुन्द गुप्ता को इस आयोजन के संयोजन की जिम्मेवारी दी गई थी। बालमुकुन्द गुप्ता कहलगांव में रेलवे में कार्यरत हैं और दक्षिण बिहार प्रांत के बौ(िक प्रमुख हैं उनके अनुज पवन गुप्ता भी आरएसएस के सक्रिय सदस्य हैं, लेकिन संप्रति वे भाजपा के सक्रिय नेता हैं। कार्यक्रम के दौरान पवन गुप्ता संघ प्रमुख मोहन राव भागवत से मिलकर भागलपुर विधनसभा क्षेत्रा से टिकट दिलाने की प्रार्थना की, लेकिन संघ प्रमुख ने उनके अनुरोध् को गंभीरतापूर्वक नहीं लिया। चर्चा तो यह भी है कि सर संघचालक मोहन राव भागवत ने संघ से जुड़े लोगों से आम चुनाव को लेकर गुप्त ढंग से चर्चा भी की है। मोहन भागवत भागलपुर से पूर्व परिचित हैं। वे 1998 में यहां बतौर क्षेत्राीय प्रचारक काम कर चुके हैं। उस समय उनके पास दोहरी जिम्मेवारी थी। वे अखिल भारतीय शारीरिक प्रमुख भी थे। क्षेत्राीय प्रचारक होने के नाते कार्यक्षेत्रा बिहार-झारखंड था। इसके बावजूद वे महीने में एक बार भागलपुर आते थे। भागलपुर में उनका प्रवास यदा-कदा डाॅ. सीएस साहा, डाॅ. एलके सहाय एवं प्रसून कुमार मिश्र के घर हुआ करता था। इस प्रकार संघ से जुड़े कई स्वयंसेवक सीध्े संघ प्रमुख मोहन राव भागवत के संपर्क में रहे हैं। भागलपुर में छः दिवसीय कार्यकर्ता विकास वर्ग सह प्रशिक्षण शिविर के कई निहितार्थ हैं। वर्ष 1998 के सांप्रदायिक दंगा के कारण हिन्दू-मुस्लिम की भावना को उभार कर हिन्दू मतों का ध््रुवीकरण किया जा सकता है। भागलपुर के सटे संतालपरगना, भागलपुर के पीरपैंती प्रखंड में तथा बांका जिले के दक्षिणी-पूर्वी भाग में ईसाई मिशनरियां सक्रिय हैं। हाल के दिनों में भागलपुर के रास्ते तस्करी कर गाय को बांग्लादेश भेजने की घटना में वृ(ि हुई है।
चर्चा है कि भागलपुर के ग्रामीण क्षेत्रा में संचालित प्राइवेट काॅलेजों में बांग्लादेश के छात्रों ने अपना नाम व पता बदल कर दाखिला बड़े पैमाने पर लिया है। सीमांचल में बांग्लादेशी घुसपैठियां तेजी से बस रहे हैं। इस क्षेत्रा में मानव तस्करी में वृ(ि हुई है। भागलपुर तथा आस-पास जिले के बाजारों में चीन निर्मित वस्तुओं का प्रभुत्व बाजार पर हो गया है। ये सामान नेपाल व बांग्लादेश के रास्ते मंगवाये जाते हैं। इसके अलावे सीमांचल के जिलों में संप्रदाय विशेष के धर्मिक आयोजनों में वृ(ि हुई है। अकेले भागलपुर जिले में विगत दस वर्ष के अंदर दर्जनों मिशनरी द्वारा संचालित स्कूल खोले गये हैं। भागलपुर जिला में मिशनरी स्कूल का प्रभुत्व कायम हो गया है। इस सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिस्थिति में आरएसएस का यह आयोजन अत्यंत ही महत्वपूर्ण है। ज्ञात हो कि भागलपुर से पहले किशनगंज में संघ प्रमुख मोहन राव भागवत का कार्यक्रम हो चुका है। किशनगंज बांग्लादेश से सटा हुआ है।
उल्लेखनीय है कि विगत लोकसभा के चुनाव में अल्पसंख्यक मुस्लिम, यादव, गंगोता जातियों के मतों के ध््रुवीकरण के कारण आरएसएस से मध्ुर संबंध् रखने वाले एवं भाजपा के मुस्लिम चेहरा के प्रतीक पूर्व केंद्रीय मंत्राी सैयद शाहनवाज हुसैन राजद प्रत्याशी बुलो मंडल से दस हजार से भी अध्कि मतों के अंतर से पराजित हो गये थे। इस पराजय से अभी भाजपा उबर नहीं पाई थी कि बिहार विधनसभा के उपचुनाव में भी भाजपा बुरी तरह हार गयी। भाजपा एवं आरएसएस का गढ़ भागलपुर को माना जाता था। भागलपुर की जीत का श्रेय आरएसएस लिया करता था। लेकिन उपचुनाव में भागलपुर विधनसभा क्षेत्रा से भाजपा की हार का जवाब आरएसएस के पास नहीं है। इस बार के उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी नभय कुमार चैध्री ;अध्विक्ताद्ध की हार को आरएसएस पचा नहीं पा रही है। ज्ञात हो कि भाजपा प्रत्याशी नभय कुमार चैध्री पेशा से भारतीय स्टेट बैंक के अध्विक्ता और जाति से कान्यकुब्ज ब्राह्मण हैं। वे अश्विनी कुमार चैबे के निकट संबंध्ी हैं। श्री चैध्री की छवि एक सज्जन अध्विक्ता के रूप में ख्यात है। लेकिन सामाजिक व सांस्कृतिक अवदान अथवा जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर संघर्ष का इतिहास इनके साथ जुड़ा हुआ नहीं है। बताया जाता है कि नभय कुमार चैध्री को अश्विनी कुमार चैबे ने ही भाजपा का जिला अध्यक्ष बनवाया था। जब श्री चैबे बक्सर संसदीय क्षेत्रा से लोकसभा के प्रतिनिध् िके रूप में निर्वाचित हुए तब उन्होंने भागलपुर विधनसभा निर्वाचन क्षेत्रा से त्याग पत्रा दे दिया। चर्चा यह भी है कि अश्विनी कुमार चैबे ने उपचुनाव में नभय कुमार चैध्री का साथ नहीं दिया। वे अपने ज्येष्ठ सुपुत्रा अर्जित शाश्वत चैबे को अपने बदले में प्रत्याशी बनाना चाहते थेऋ लेकिन भाजपा नेतृत्व ने उनकी नहीं सुनी और अंतिम समय में नभय कुमार चैध्री ;भाजपा जिलाध्यक्षद्ध को टिकट दे दिया। उस समय श्री चैध्री को प्रत्याशी बनाये जाने के निर्णय का संघ के कार्यकर्ता सह पूर्व भाजपा नगर अध्यक्ष निरंजन साह ने खुले तौर पर विरोध् किया था। चुनाव के समय में वैश्य मतदाताओं ने नभय कुमार चैध्री के बदले संयुक्त विपक्ष के कांग्रेस प्रत्याशी अजीत शर्मा के पक्ष में बढ़-चढ़कर मतदान किया। लिहाजा, श्री चैध्री चुनाव हार गये। उल्लेखनीय है कि निरंजन साह तथा वर्तमान नगर अध्यक्ष विजय साह वैश्य जाति से आते हैं और दोनों ही भागलपुर विधनसभा निर्वाचन क्षेत्रा से भाजपा के टिकट के दावेदार हैं।
भागलपुर के वैश्य मतदाताओं की भावना को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने संपन्न प्रशिक्षण शिविर के आयोजन का दायित्व बाल मुकुन्द गुप्ता को सौंपा था और वैश्य जाति से आने वाले आरएसएस के स्वयंसेवक सह भाजपा नेता निरंजन साह को कापफी महत्व दिया गया। निरंजन साह भाजपा में रहते हुए भी पटना के गांध्ी मैदान में आयोजित भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की रैली में जाना अपने हक में नहीं समझा और संघ प्रमुख मोहन राव भागवत की गणेश परिक्रमा में लगे रहे। मोहन राव भागवत के साथ निरंजन साह की तस्वीर समाचार पत्रों में प्रकाशित हुई, जो कि भाजपा के कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों के बीच में चर्चा का विषय बन गया। निरंजन साह के बाद दीपक घोष आरएसएस के स्वयंसेवक हैं जो कि संघ प्रमुख मोहन राव भागवत के इर्द-गिर्द घूमते रहे। ये जाति से राढ़ी कायस्थ हैं। राढ़ी कायस्थ की भी भागलपुर में अच्छी आबादी है। इसका वोट पुराने समय से ही भाजपा के पक्ष में गिरता रहा है। राढ़ी कायस्थ के एक सामाजिक कार्यकर्ता शैलेश कुमार दास का कहना है कि इस बार भाजपा एवं आरएसएस भागलपुर विधनसभा निर्वाचन क्षेत्रा से पूर्व वार्ड पार्षद दीपक घोष को बना कर राढ़ी कायस्थ जाति को सम्मानित करना चाहिए। क्योंकि राढ़ी कायस्थ को कभी भी किसी भी निर्वाचन क्षेत्रा से भाजपा ने टिकट नहीं दिया है। आज तक इस जाति का एक भी एमएलए अथवा एमएलसी नहीं बना है। जबकि भागलपुर, बांका, कहलगांव, तारापुर, बिहपुर इत्यादि विधनसभा क्षेत्रों में राढ़ी कायस्थों की निर्णायक आबादी है। दीपक घोष की छवि एक समर्पित सामाजिक कार्यकर्ता की है। इनकी ईमानदारी की चर्चा भी खूब होती है। इसलिए अगर भागलपुर शहरी विधनसभा निर्वाचन क्षेत्रा से दीपक घोष को भाजपा ने टिकट नहीं दिया तो राढ़ी बांध्व समिति भाजपा को समर्थन देने पर पुनर्विचार करेगी। ज्ञात हो कि वर्तमान समय में भागलपुर जिले के बिहपुर एवं पीरपैंती से भाजपा के विधयक हैं।
भागलपुर विधनसभा क्षेत्रा के वर्तमान विधयक अजित शर्मा आर्थिक रूप से संपन्न व्यक्ति हैं और भागलपुर शहर के वैश्य, मारवाड़ी, भूमिहार, मैथिल ब्राह्मण एवं अल्पसंख्यक मुस्लिम मतदाताओं के बीच में उनकी पैठ भी है। रिपोर्ट संकलन के दौरान संघ के स्वयंसेवक रहे एक बुजुर्ग स्वयंसेवक ने बताया-‘भागलपुर से भाजपा प्रत्याशी के रूप में किसी वैश्य को ही उतारने का मन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बना चुका है। पूर्व नगर विधयक अश्विनी कुमार चैबे के क्रियाकलापों के कारण भागलपुर में निवास करने बल्कि वैश्य एवं अतिपिछड़ी जाति ;जैसे जुलाहा, कहार, बढ़ई, धेबीद्ध ब्राह्मण प्रत्याशी को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है।’ वहीं, ब्राह्मण जाति के एक कट्टर भाजपा समर्थक ने कहा जब वैश्य लोग एक ब्राह्मण उम्मीदवार बरदास्त नहीं कर सकते तो हमलोग सुशील कुमार मोदी और नरेंद्र मोदी को मुख्यमंत्राी व प्रधनमंत्राी कैसे स्वीकार कर सकते हैं।’ इसी क्रम में एक प्रौढ़ व्यक्ति ने कहा कि भाजपा एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को भागलपुर विधनसभा सीट कांग्रेस से छिनना है और अपनी प्रतिष्ठा बचानी है तो सैयद शाहनवाज हुसैन अथवा सुशील कुमार मोदी को ही यहां से प्रत्याशी बनाना होगा अन्यथा इसबार पुनः भाजपा यहां से हार जायेगी।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार संघ प्रमुख मोहन भागवत भागलपुर में प्रवास के दौरान संघ पृष्ठभूमि से जुड़े व्यक्तियों को भोजन पर आमंत्रित कर उनसे पफीडबैक लिया। इसमें दो राय नहीं कि भाजपा के साथ-साथ आरएसएस के कार्यकर्ता भागलपुर में जातिगत भावना के तहत विभक्त हो चुके हैं। देखना है कि आरएसएस का शीर्ष नेतृत्व इस खाई को पाट कर भागलपुर जैसे प्रतिष्ठित सीट को कांग्रेस से छिनने में सपफल होने के साथ-साथ भाजपा को दो-तिहाई बहुमत दिलाने में कहां तक सपफल होता है।त्र


Article printed from lokprasang: http://lokprasang.in

URL to article: http://lokprasang.in/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0-%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a4%8f%e0%a4%b8%e0%a4%8f%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%ac%e0%a5%80/

Copyright © 2013 News World. All rights reserved.