December 12, 2017

भाजपा के विश्वासघात रैली में उमड़ी भीड़

Photo GalleryBy wmadmin123 - Tue Oct 22, 10:07 am

भाजपा के विश्वासघात रैली में उमड़ी भीड़ महज भाषण सुनने नहीं बल्कि जदयू से अलग हुए भाजपा के कई कावर नेताओं के चेहरे की लाली को भी परखने आये थे। सरकार में रहने पर नेताओं के चेहरे की चमक व बोली जो बदली-बदली लग रही थी वह बरकरार है या नहीं, उसे भी भांपने आये थे। शायद आम जनता गिरिराज सिंह के तल्ख तेवर और सुशील कुमार मोदी के दबे तेवर में पुन: परिवर्तन को देखने आये थे। इतना ही नहीं आसन्न लोकसभा चुनाव की उम्मीदवारी की मंशा पाले नेताओं की संख्या विश्वासघात रैली की उमड़ी भीड़ पर भारी पड़ गयी। हालांकि रैली में भाजपा दिग्गज गिरिराज सिंह ने जदयू के कावर नेता व राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा मध्ेपुरा के सांसद शरद यादव को भी पार्टी में आने का न केवल न्योता दिया बल्कि तर्क व सवालों के साथ ही कहा कि कहीं इनकी भी हालत जार्ज पफर्णाडीज की तरह न हो जाय।

कोशी प्रमंडलीय मुख्यालय में आहूत इस रैली के आयोजक इतने उतावले नजर आये कि पूर्व केन्दzीय मंत्राी सह पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सांसद सैयद शाहनवाज हुसैन के आने के कुछ क्षण पहले ही सभा की समाप्ति की घोषणा कर डाली। जबकि सांसद शाहनवाज हुसैन को सुनने आये पब्लिक की भीड़ भी थोड़ी देर के लिए असमंजस में पड़ गई कि आखिर यह क्या हो गया। सांसद श्री हुसैन का मंच पर नहीं आना सहरसावासियों को कापफी खला। श्री हुसैन पड़ोसी जिला सुपौल के रहने वाले हैं और इनका सहरसा से कापफी व दिली लगाव रहा है। श्री हुसैन का देर रात भी सहरसा आने पर पार्टी का एक तबका गर्मजोशी से उनका स्वागत करने को आतुर रहता है। इस बार भी उनके स्वागत में कमी तो नहीं रही मगर भाषण के लिए मौका नहीं मिलना लोगों के दिमाग पर बैठ गया है।

इस विश्वासघात रैली में जिस कदर स्वत: संभावित उम्मीदवारों की संख्या दिखी उस कदर भीड़ नजर नहीं आयी। जबकि खुले मंच से सुशील कुमार मोदी ने यहां तक कह डाला कि पार्टी अध्यक्ष व स्थानीय विधयक जब इतनी भीड़ जुटा सकते हैं तो पटना के गांध्ी मैदान में नमो के नाम पर गांध्ी मैदान क्यों नहीं भर सकता है। इससे स्पष्ट है कि सांसद की उम्मीदवारी की कतार में खड़े नेताओं में दम नहीं है या श्री मोदी अब भी नीतीश चालीसा की तरह अब विधयक चालीसा का पाठ करने पर उतारू हो गये हैं। सच तो यह है कि श्री मोदी के इस कथन से भीड़ जुटाने वाले उत्साहित कार्यकर्ता और समर्थकों को झटका लगा है। सहरसा के पटेल मैदान में 21 सितम्बर 2013 को सम्पन्न विश्वासघात रैली के बाद सहरसा, मध्ेापुरा व सुपौल जिले के भाजपा के अंदर ही अंदर एक घमासान शुरू है कि आखिर आसन्न लोकसभा चुनाव में सुपौल व मध्ेपुरा से उम्मीदवारी किसे मिलेगी। पिफलहाल गठबंध्न का खतरा भी नहीं है। गठबंध्न रहने पर पार्टी कैडरों को यह कहकर टाल दिया जाता था कि यह सीट घटक दल के खाते में चली गयी है। अब इस संभावना को लेकर भी संभावित उम्मीदवारों की लंबी कतार नजर आ रही है। सबसे खास बात तो यह रही कि विश्वासघात रैली में जितनी भीड़ जुटनी चाहिये वह जुट नहीं सकी। इसके लिए भाजपा के स्वत: संभावित उम्मीदवारों की भी जवाबदेही बनती है। हालांकि सहरसा का पटेल मैदान पटना के गांधी मैदान से कम नहीं है। इस मैदान को पूर्व प्रधनमंत्राी अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर भी भड़ने में कसक रह गयी थी। जबकि विश्वासघात रैली के लिए मैदान के आंशिक भाग में ही सभा की व्यवस्था की गयी थी। इसलिए कोई यह दावा नहीं कर सकता है कि पटेल मैदान में भीड़ उस तरह उमड़ी थी। मधेपुरा लोकसभा क्षेत्रा से संभावित अव्वल उम्मीदवारों में बिहार के पूर्व काबीना मंत्री सह राजद के वरीय नेता स्व.शंकर प्रसाद टेकरीवाल के पुत्रा प्रभाकर टेकरीवाल, डाW.अनिल यादव, सहरसा जिला भाजपा अध्यक्ष राजीव रंजन, विधयक आलोक रंजन, सुध्ीर राजहंस, पूर्व विधयक संजीव कुमार झा, आरती सिंह, अशोक झा, भाजपा के वरीय नेता स्व.मृत्युंजय नारायण मिश्र के पुत्रा आनंद मिश्र, अरविंद यादव व दिलमोहन सिंह के अलावा सुपौल सीट के दावेदारों में नागेन्दz नारायण ठाकुर, श्रवण चौधरी आदि शामिल हैं। अध्किांश संभावित उम्मीदवारों की हैसियत व पहचान भले ही पार्टी के अंदर सहित बाहर आम जनता के बीच न हो, लेकिन दावेदारी किसी सक्रिय कार्यकर्ता से कम नहीं किया करते हैं। अभी सिर्फ ये लोग एक-दूसरे की टोह लेने में लगे हुए रहते हैं कि किसका किससे काWनटेक्ट चल रहा है। यहां तक कि इस रैली समापन के बाद कुछ कार्यकर्ता सांसद शाहनवाज हुसैन के साथ तो कुछ सुशील कुमार मोदी व गिरिराज सिंह तो कुछ अश्विनी कुमार चौबे के साथ दिखी। स्थानीय नेताओं में भी आपसी एकजुटता नहीं दिखा। ऐसा लग रहा था कि वास्तव में विश्वासघात इनके साथ किसी ने किया नहीं बल्कि ये लोग आपस में ही विश्वासघात करने में लगे हैं। पूर्व विधयक संजीव कुमार झा तो अपने समर्थकों के साथ मंच के नीचे मैदान में बैठे हुए थे। उन्हें प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष मंगल पांडे व गिरिराज सिंह ने ईशारा कर उपर बुलाकर बिठाया। फिर भाषण भी हुआ। अगर ऐसा नहीं होता तो श्री झा को नीचे ही बैठना पड़ता, जो शायद पार्टी प्रोटोकाWल का उल्लंघन होता। अभी वक्त है पार्टी के अंदर बूंद-बूंद से घड़ा भरने की। अगर आपसी एकजुटता नहीं हुई तो आसन्न लोकसभा चुनाव में भाजपा को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। कई खेमों में विभक्त पार्टी कार्यकर्ताओं को समेटने में जिला अध्यक्ष की जो भूमिका होनी चाहिये वह नहीं हो पा रही है। ऐसा लगता है कि आने वाले दिनों में सहरसा संगठन पर प्रदेश नेतृत्व को हस्तक्षेप न करना पड़ जाय। रैली में सहरसा जिले के विभिन्न हिस्सों से आये सक्रिय पार्टी कार्यकर्ताओं में महिषी विधनसभा क्षेत्रा से जीसू सिंह अपना कद बढाने के लिए प्रयासरत दिखे। बैनर साबित कर रहा था कि ये महिषी विधनसभा क्षेत्रा से विधनसभा चुनाव में दावेदार होंगे। संजय कुमार वशिष्ट के साथ पूर्व विधयक संजीव कुमार झा सहित समर्थकों की भीड़ नरेन्दz मोदी जिंदाबाद के नारा लगाते हुए सभा स्थल पर पहुंचे। यानी कुल मिलाकर सबों ने अपने-अपने स्तर से अपनी ताकत व निष्ठा दिखाने का प्रयास किया।

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