December 12, 2017

मधुबनी विधान परिषद चुनाव ः कायम रहा नमो का जादू

By wmadmin123 - Tue Aug 18, 10:08 am

प्रो. अरुण कुमार

मध्ुबनी स्थानीय प्राध्किार निर्वाचन क्षेत्रा के विधन परिषद चुनाव परिणाम ने साबित कर दिया है कि नरेंद्र मोदी के जादू का असर अभी भी कम नहीं हुआ है। जबकि राजद-जदयू और कांग्रेस गठबंध्न अभी तक कार्यकर्ता और समर्थकों में स्वीकार्य नहीं है।
गत 7 जुलाई 2015 को सम्पन्न उक्त चुनाव के मतदान के बाद 10 जुलाई को हुई मतों की गिनती में भाजपा उम्मीदवार सुमन महासेठ विजयी घोषित किये गये। प्रथम मतों की गिनती में वैध् 5305 मतों में श्री महासेठ को 2435 मत प्राप्त हुए, जबकि निकटतम प्रतिद्वंद्वी राजद-जदयू, कांग्रेस महागठबंध्न के घोषित उम्मीदवार एवं निवर्तमान विधन पार्षद विनोद कुमार सिंह को 1602, राजद के बागी एवं सांसद पप्पू यादव समर्थित उम्मीदवार राजकुमार यादव को 837 तथा वामदल समर्थित उम्मीदवार उमेश चन्द्र दास को 257 मत प्राप्त हुए। इसके अतिरिक्त निर्दलीय प्रत्याशी अखिलेश कुमार साहु को 35, अविनाश रंजन झा को 11, कमल कुमार झा को 11, छेदी राम को 7, मो. रपफीक को 26, राजीव कुमार को 46 और लाल बहादुर सिंह को 38 मत प्राप्त हुए।
राजनीति के जानकार बताते हैं कि इस चुनाव में जनबल पर ध्नबल भारी पड़ा है। ध्नबल मैनेजमेंट इस चुनाव में एक प्रभावी कारक रहा है। यही कारण है कि चुनावी राजनीति में नौसिखीए माने जाने वाले भाजपा समर्थित उम्मीदवार सुमन महासेठ बाजी मार ले गये जबकि चुनावी राजनीति में माहिर माने जाने वाले महागठबंध्न उम्मीदवार विनोद सिंह और वामपंथ की राजनीति की उपज राज कुमार यादव पीछे छूट गये। कहा जा रहा है कि मतों की खरीद-पफरोख्त का कार्य भाजपा समर्थकों ने मतदान के तकरीबन 5 दिन पहले शुरू कर दिया था। जबकि महागठबंध्न के कार्यकर्ताओं ने यह कार्य 6 जुलाई के सुप्रीम कोर्ट का पफैसला देखने के बाद मतदान से एक दिन पहले दूसरे हापफ में शुरू किया था। नतीजा हुआ कि कार्यकर्ता महागठबंध्न समर्थित सभी वोटरों तक पहुंच भी नहीं पाया और समय बीत गया, जिसका पफायदा सीध भाजपा प्रत्याशी को मिला। जानकारों का कहना है कि पैसा, मैनेजमेंट का यह मंत्रा भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्राी सुशील कुमार मोदी ने मध्ुबनी के एक गुप्त बैठक मंे दिया था, जिसपर अमल कारगर साबित हुआ।
वैसे चुनाव के शुरूआत में भाजपा में व्याप्त अंतर्कलह सापफ उजागर हो रहा था। शुरूआती दौर में इसी कारण भाजपा प्रत्याशी को तीसरे नंबर पर माना जा रहा था। बाद में पार्टी के शीर्ष नेताओं के लगातार दौरा और नमो की चमक ने कमाल दिखाया तथा पार्टी नेता और कार्यकर्ता एकजुट होकर पूरे दम-खम से मैदान में आ जुटे। यही कारण है कि शुरू में प्रत्याशी चयन को लेकर छायी उदासी एकाएक खत्म हो गई और भाजपा ने महागठबंध्न को पटखनी दे दी। राजनीति के जानकार बताते हैं कि आगामी विधनसभा चुनाव में भाजपा की बढ़ती संभावना ने भी नेता और कार्यकर्ता में न सिपर्फ एकजुटता कायम कर दी बल्कि जोश और उफर्जा का संचार भी कर दिया।
इध्र, महागठबंध्न प्रत्याशी की हार का एक प्रमुख कारण प्रत्याशी के विरू( आम नाराजगी और इन्कम्वेंसी पफैक्टर बताया जा रहा है। जानकारों का मानना है कि महागठबंध्न के उम्मीदवार और निवर्तमान विधन पार्षद विनोद कुमार सिंह का विगत 6 वर्ष का कार्यकाल निराशाजनक रहा है। जिसका खामियाजा इस चुनाव में उन्हें भुगतना पड़ा। जानकारों का कहना है कि महागठबंध्न अगर यहां प्रत्याशी बदल देता तो परिणाम बदल भी सकता था। लोगों का कहना है कि श्री सिंह के बदले अगर राजद के बागी प्रत्याशी राजकुमार यादव को यहां उम्मीदवार बनाया जाता वो जीत पक्की हो सकती थी।
जानकारों का कहना है कि महागठबंध्न का आम मतदाताओं में स्वीकार्यता नहीं होना भी हार का एक कारण है। इस गठबंध्न के विरोध् में राजद के एक कद्दावर नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्राी देवेन्द्र प्रसाद यादव और राज्य के पूर्व काबिना मंत्राी नीतीश मिश्रा का ‘हम’ के साथ चले जाना भी हार का एक कारण है। इसके अलावा राजद के कई आला नेताओं का भितरघात भी हार का कारण बना है जैसा की राजनीति के जानकार बताते हैं। कहा जा रहा है कि इस चुनाव के शुरूआती दौर में निर्दलीय प्रत्याशी राजकुमार यादव एक नम्बर पर चल रहे थे। उनके गत दो चुनावों में कम मतों के अंतर से हार से उपजी सहानुभूति की लहर थी। उफपर से राजद के कई बड़े नेताओं का भी अंदर से समर्थन था। उस वक्त भाजपा प्रत्याशी दूसरे नंबर पर तथा महागठबंध्न प्रत्याशी तीसरे नंबर पर थे। बाद में जब महागठबंध्न के प्रदेश स्तरीय नेताओं का दौरा शुरू हुआ तो स्थिति बदलने लगी।
जानकारों का मानना है कि राजद के विधयकगण भी शुरू से अंतरंग बातचीत में मतदाताओं के शुरूआती रूझान को देख सहमें नजर आ रहे थे और कह रहे थे ‘महागठबंध्न मजबूरी है राजकुमार जरूरी है।’ हालांकि राजद के विधयकगण इस बात से सापफ इंकार करते हैं। इध्र जानकारों का कहना है राजद के पूर्व सांसद एवं कद्दावर नेता मंगनी लाल मंडल का भी निर्दलीय प्रत्याशी राजकुमार यादव को परोक्ष समर्थन था। ऐसा इसीलिए कहा जाता है कि श्री यादव श्री मंडल के नेतृत्व में ही सीपीआईएम छोड़ राजद में आये थे। गत लोकसभा चुनाव में राजकुमार यादव श्री मंडल के प्रमुख सिपहसलार माने जाते थे। हालांकि मंगनी लाल मंडल के समर्थक इस बात से सापफ इंकार करते हैं। उनलोगों का कहना है कि पूर्व सांसद श्री मंडल एवं उनके समर्थक दिलोजान से महागठबंध्न प्रत्याशी के पक्ष में काम किया है। जानकारों का मानना है कि राजद के नेतागण चाहे जितनी सपफाई दें लेकिन यह तय है कि चुनाव के शुरूआती दौर में बरती गई ढि़लाई आखिरकार महागठबंध्न की सेहत बिगाड़कर ही छोड़ा।
कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि महागठबंध्न का खेल उसके बागी उम्मीदवार ने ही बिगाड़ा। चुनाव के अंतिम दौर में राजद-जदयू और कांग्रेस नेताओं का एकजुट प्रयास रंग नहीं पकड़ सका। नीतीश कुमार एवं लालू प्रसाद का मतदाताओं से मोबाइल से सीध संवाद और मैसेज के दौर के बावजूद बागी उम्मीदवार अपने खाते में आखिरकार 837 वोट झटक ले ही गये और विजयश्री व्यापार से राजनीति में आये सुमन महासेठ के गले आन पड़ी। भाजपा के विजयी उम्मीदवार सुमन कुमार महासेठ कहते हैं कि यह जीत पंचायत प्रतिनिध्यिांे, जन प्रतिनिध्यिों, नगर पार्षदों एवं आम भाजपा कार्यकर्ताओं की जीत है। जीत के लिए आभार प्रकट करते हुए वे कहते हैं कि पंचायत प्रतिनिध्यिों के मान-सम्मान की रक्षा के लिए वे सदैव तत्पर रहेंगे। उनके हितों और अध्किारों के लिए संघर्षशील रहेंगे। निवर्तमान विधन पार्षद एवं महागठबंध्न उम्मीदवार विनोद कुमार सिंह मतदाताओं के पफैसले को शिरोधर्य बताते हुए कहते हैं कि बीते 6 वर्षों में पंचायत प्रतिनिध्यिों के हित का भरसक प्रयास किया है। उनके ही विशेष आग्रह एवं सुझाव पर पंचायत प्रतिनिध्यिों के मानदेय में मुख्यमंत्राी ने वृ(ि की घोषणा की और बीमा लाभ का प्रस्ताव लाया। उन्होंने कहा कि वे सदैव विधन परिषद में जनप्रतिनिध्यिों की आवाज को बुलंद किया। हालांकि आज चुनाव परिणाम उनके पक्ष में नहीं है। बावजूद इसके वे आगे भी पूरी निष्ठा से पंचायत प्रतिनिध्यिों की सेवा में जुटे रहेंगे। अपनी हार पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि आठ सौ से उफपर मतपत्रा अवैध् हुआ। इसका कारण उनके समर्थक मतदाताअेां को मतदान करने की टेªेनिंग में कमी रहना है। इध्र, तीसरे स्थान पर रहे निर्दलीय प्रत्याशी राजकुमार यादव कहते हैं कि महागठबंध्न की हार का कारण प्रत्याशी चयन है। अगर गठबंध्न उन्हें प्रत्याशी बनाता तो जीत निश्चित थी। उनका कहना है कि विनोद सिंह से बेहद नाराज तकरीबन तीन-चार सौ मत वे प्राप्त करने में सपफल नहीं रहे क्योंकि लालू प्रसाद यादव का मोबाइल से सीध मतदाताओं से संवाद ने उन्हें तीसरे स्थान पर ढकेल दिया, जिस कारण सीटिंग प्रत्याशी से नाराज वोट धरा के विपरीत उसे हराने के लिए भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में चला गया। उन्होंने कहा कि हार के बावजूद वे सेवा कार्य अनवरत करते रहंेगे।

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