December 12, 2017

मुखिया मो. युसूफ हत्या-प्रकरण ः अपराधियों की धमक से धधक रहा सुपौल

By wmadmin123 - Fri Aug 21, 7:39 am

रीतेश कुमार मिश्र

सुपौल जिला के राघोपुर प्रखंड स्थित परमानंदपुर पंचायत के मुखिया मो. युसूपफ का अपहरण कर निर्मम हत्या कर दी गई। घटना ने जहां पुलिस प्रशासन की व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है वहीं विपक्ष इसे जंगलराज टू का आगाज बता रहे है। पहले हम यहां घटना क्रम पर नजर डालते हैं। गत 21 जुलाई की देर शाम करीब आठ बजे मुखिया मो. युसूपफ अपनी बाईक से करजाईन बाजार से घर हरि चकला जा रहे थे। घर से करीब आध किलोमीटर पूर्व गम्हरिया उपशाखा नहर के पास पूर्व से घात लगाए बैठे अपराध्यिों ने हथियार का भय दिखा कर अपहरण कर लिया। स्थानीय लोगों एवं परिजनों द्वारा तत्काल इसकी सूचना पुलिस का दी गई। दो दिन बाद गुरुवार को मध्ुबनी जिला के लोकही थाना क्षेत्रा के खरक नदी के किनारे से शव बरामद की गई। शव के हाथ-पैर बंध्े थे एवं गला रेत कर निर्ममता पूर्वक हत्या की गई थी। इध्र अपहरण की घटना के बाद से ही करजाईन बाजार स्वतः स्पफुर्त बंद हो गया। व्यवहार कुशल, मिलनसार मुखिया के साथ घटित घटना को लेकर आक्रोशित लोग रह रह कर उबाल मारने लगे। मुखिया की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगायी जा सकती है कि लगातार तीन दिनों तक करजाईन बाजार की दुकानें नहीं खुली। जनाजे के रोज शुक्रवार को राघोपुर एवं प्रतापगंज प्रखंड क्षेत्रा की कई बाजारे बंद रहीं।
वास्तव में यह घटना आम लोगों को झकझोड़ कर रख दिया। लोगों के बीच सवाल उठने लगे कि जब जनप्रतिनिध् िसुरक्षित नहीं है तो आम लोगों का क्या होगा। मामले में पुलिस की लापरवाही भी सामने आई है। दिवंगत मुखिया के परिजनों की माने तो अपहरण के पांच-सात दिन पूर्व से ही एक काले रंग की चार पहिया वाहन से मुखिया की रेकी की जा रही थी। करजाईन थानाध्यक्ष प्रशांत कुमार मिश्र को मुखिया मो. युसूपफ ने इसकी सूचना दी थी। अगर पुलिस इस सूचना पर अमल करती तो यह घटना घटित नहीं होती और संभव था कि घटना से पूर्व ही अपराध्ी पकड़े जाते। अपहरण की सूचना के बाद भी पुलिस द्वारा तत्परता नहीं दिखाई गई। परिजनों व स्थानीय लोगों के अनुसार पुलिस तत्पर होकर विभिन्न सड़कों को शील कर छापेमारी करती तो मुखिया के सकुशल वापसी संभव थी। अपहरणकर्ता काले रंग की चारपहिया वाहन से सिमराही एनएच 57 होते हुए पश्चिम लोकही थाना क्षेत्रा की ओर गए जबकि पुलिस, परिजन व स्थानीय लोग तलाश में सिमराही से पूरब की ओर प्रस्थान कर गये। वास्तव में पुलिस सहित परिजन को किसने दिगभ्रमित किया यह सवाल अब भी बना हुआ है। हालांकि मामले में पुलिस तीन लोगों को गिरफ्रतार कर मामले में अनुसंधन जारी रखने की बात कर रही है। जिला पुलिस कप्तान पंकज कुमार राज बताते हैं कि अनुसंधन में कई और बातों का खुलासा होना संभव है। गिरफ्रतार किये गये लोगों में मुखिया के पड़ोसी मो. नईम की पत्नी बीबी सबरुण भी शामिल है।
मुखिया के अपहरण के बाद ही घटना को लेकर तरह-तरह के कयास लागये जाने लगे। कई लोग इस घटना को मुखिया की बढ़ रही में मुखिया के बढ़ रहे प्रभाव को भी लोग घटना का कारण मान रहे हैं। चर्चा के अनुसार मुखिया द्वारा पंचायत में लिये गए निष्पक्ष निर्णय भी घटना का कारण हो सकता है। बताया जाता है कि जात व ध्र्म से इतर मुखिया मो. युसूपफ पंचायत में आये विवादों का निष्पादन किया करते थे। संभावना यह व्यक्त की जा रही है कि निर्णयों से विक्षुब्ध् कुछ लोगों ने मिलकर घटना को अंजाम दिया। बहरहाल पुलिस अनुसंधन में ही मामला का खुलासा हो सकेगा। इध्र घटना के तुरंत बाद ही पुलिस व प्रशासन का महकमा तत्पर हो गया। लोगों के पफूट रहे आक्रोश से किसी अप्रिय घटना की आशंका से प्रशासन चिंतित दिख रहा था। करजाईन थाना परिसर को पुलिस कैंप में तब्दील कर दिया गया। दरभंगा प्रक्षेत्रा के आईजी अमित कुमार जैन, सहरसा डीआईजी नागेन्द्र प्रसाद सिंह, सुपौल डीएम लक्ष्मी प्रसाद चैहान, एसपी पंकज कुमार राज हर छोटी बड़ी घटनाक्रम पर नजर बनाये हुए थे। अप्रिय घटना से निपटने के लिए करजाईन में एसएसबी के जवान तैनात कराये गये। आईजी, डीआईजी सहित अन्य अध्किारियों का दौड़ा करजाईन में होने लगा। इध्र घटना से राजनीतिक महकमा में भी सरगर्मी तेज हो गई। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन क्षेत्राीय सांसद रंजीत रंजन, मध्ेपुरा के सांसद राजेश रंजन उपर्फ पप्पू यादव, पूर्व सांसद विश्वमोहन कुमार, क्षेत्राीय विधयक अनिरु( प्रसाद यादव, छातापुर विधयक नीरज कुमार बबलू, पूर्व विधयक किशोर कुमार मुन्ना, यदुबंश यादव आदि ने परिजनों से मुलाकात कर ढ़ांढस बंधया। नेतागण ने पुलिस की निष्क्रियता पर जमकर बरसे।
घटना के एक सप्ताह बाद एसपी पंकज कुमार राज ने करजाईन थाना में प्रेस वार्ता कर मामले का खुलासा किया। बताया कि मुखिया मो. युसूपफ के पड़ोसी मांे.नईम द्वारा व्यक्तिगत दुश्मनी के कारण घटना को अंजाम दिया गया। मामले में मो. नईम की पत्नी बीबी सबरुण सहित मध्ुबनी जिला के लोकही थाना क्षेत्रा के खड़गपुर निवासी मो. मुख्तार एवं सुपौल जिला के निर्मली थाना क्षेत्रा के मंझारी गांव निवासी मो. अयुब को गिरफ्रतार किया गया। एसपी ने बताया कि घटना को अंजाम देने में 8-10 अपराध्ी शामिल थे जिसकी गिरफ्रतारी के लिये छापेमारी की जा रही है। उन्होंने बताया कि अनुसंधन के क्रम में कई और खुलासे हो सकते हैं। घटना के उदभेदन के लिये वीरपुर डीएसपी दुध्ेश्वर नाथ पांडेय, निर्मली डीएसपी नेशार अहमद साह एवं त्रिवेणीगंज डीएसपी चंद्रशेखर विद्यार्थी के नेतृत्व में तीन अलग-अलग टीम गठित की गई। पुलिस सूत्रों की माने तो काॅल डिटेल्स के आधर पर वैज्ञानिक पुख्ता सबूतों के साथ पुलिस पफूंक-पफूंककर कदम रख रही है। बहरहाल, घटना में संलिप्त अन्य अपराध्यिों कीे गिरफ्रतारी का इंतजार लोगों को है। इस जघन्य अपराध् के कारणों का खुलासा भी लोग चाहते है। सवाल अब भी लोगों के जेहन में तैर रहा है कि नईम कब गिरफ्रतार होगा। क्या इस घटना में किसी सपफेदपोश का भी हाथ है। अपहरण के लिये प्रयोग किया गया काले रंग का चार पहिया वाहन किसका था। पूरे घटना को अंजाम देने के लिए रुपये का प्रबंध् किसने किया।

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