September 24, 2018

मुजफ्फरपुर : विलय के बाद राजद-जदयू खेमे में टिकट को लेकर मचेगी भगदड़

By wmadmin123 - Wed Jul 22, 11:12 am

ब्रह्मानंद ठाकुर

समाजवादी दलों के महाविलय की घोषणा के बाद जिले के राजद और जदयू खेमे के नेता और कार्यकर्ताओं में हड़कंप मचता दिखाई दे रहा है। प्रत्यक्ष रूप से तो इस विलय के विरोध् मंे कोई भी अपना मुंह खोलने को तैयार नहीं है लेकिन भीतर ही भीतर असंतोष पैदा हो गया है। आगामी विधनसभा चुनाव में राजद और जदयू के टिकट पर चुनाव लड़ने की उम्मीद पाले हुए नेताओं की उम्मीद पर इस विलय ने पानी पफेर दिया है। मुजफ्रपफरपुर में राजद और जदयू के कई नेता राजग के घटक दलों का दामन थामने के लिए गुप-चुप तरीके से एड़ी-चोटी का जोर लगाये हुए हैं किंतु अब वहां भी इनके लिए दरवाजा बंद हो चुका है। एनडीए का कोई भी घटक दल आगामी विधनसभा चुनाव में टिकट की शर्त पर ऐसे नेताओं को दल में शामिल करने के पक्ष में बिल्कुल नहीं हैं। लिहाजा राजद-जदयू विलय के बाद टिकट कटने की आशंका और दूसरे दलों में प्रवेश का दरवाजा बंद हो जाने से इन नेताओं के चेहरे अभी से ही मुर्झाने लगे हैं। मुजफ्रपफरपुर जिले में गायघाट, औराई, मीनापुर, पारू, साहेबगंज, बरूराज, मुजफ्फरपुर, कुढनी, कांटी, सकरा सुरक्षित और बोचहा सुरक्षित कुल 11 विधनसभा क्षेत्रा हैं। इसमें गायघाट, पारू, औराई और मुजफ्रपफरपुर विधनसभा क्षेत्रा भाजपा के कब्जे में है जबकि एकमात्रा बरूराज विधनसभा सीट पर राष्ट्रीय जनता दल का कब्जा है। शेष छः विधनसभा क्षेत्रा सकरा, बोचहा, कुढ़नी, कांटी, मीनापुर और साहेबगंज जदयू के कब्जे में है। बोचहा विधयक रमई राम और कुढ़नी के मनोज कुमार सिंह प्रदेश सरकार में मंत्राी हैं जबकि सकरा विधयक सुरेश चंचल, कांटी के अजित कुमार, मीनापुर के दिनेश प्रसाद और साहेबगंज विधयक राजु कुमार सिंह कथित दल विरोध्ी गतिविध्यिों के आरोप में जदयू से निष्कासित किए जा चुके हैं। आगामी विधनसभा चुनाव में पार्टी के ये चारो बागी विधयक एनडीए के घटक दलों का दामन थामने को बेताब हैं, लेकिन वहां भी टिकट की शर्त पर इनका प्रवेश असंभव नहीं तो कठिन जरूर लगता है।
पहले हम सकरा सुरक्षित विधनसभा क्षेत्रा की बात करते हैं। 1967 के विधनसभा चुनाव में यह क्षेत्रा सुरक्षित घोषित किया गया। तब से आज तक इस सीट पर अपने को समाजवादी कहने वाले विभिन्न दलों का कब्जा रहा है। 1967 के विधनसभा चुनाव में पहली बार सोपा के नेवालाल महतो यहां से चुनाव जीते थे। इसके बाद 1972 में इसी पार्टी के हीरालाल पासवान, 1977 में जनता दल से शिवनंदन पासवान इस क्षेत्रा से विजयी हुए। 1980 के विधनसभा चुनाव में शिवनंदन पासवान ने सकरा को छोड़ जब पातेपुर सुरक्षित क्षेत्रा से अपनी उम्मीदवारी घोषित की। तब सकरा विधनसभा सीट कांग्रेस के पफकीरचंद राम के कब्जे में आयी। 1962 के बाद यह पहला मौका था जब कांग्रेस ने यहां से चुनाव जीता। पिफर 1985 के चुनाव में जनता दल से ही शिवनंदन पासवान ने यहां से अपनी जीत दर्ज करायी। 1990 और 1995 के चुनाव में क्रमशः जनतादल और राजद के टिकट पर कमल पासवान, 2000 के विधनसभा चुनाव में राजद से ही शीतल राम, 2005 के चुनाव में जदयू से विलट पासवान और पिछले विधनसभा चुनाव मंे जदयू से सुरेश चंचल यहां से चुनाव जीत चुके हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि जनता दल का विभाजन होने के बाद इस विधनसभा सीट से जदयू के मुकाबले राजद उम्मीदवार लगातार तीन बार चुनाव हार चुके हैं। राजद के टिकट पर 2000 में हुए चुनाव में अपनी जीत दर्ज कराने वाले शीतल राम 2005 के पफरवरी में हुए चुनाव मं जदयू प्रत्याशी विलट पासवान से पराजित हो गए थे। पिफर उसी साल नवंबर में हुए उपचुनाव में राजद ने यहां से लाल बाबू राम को अपना उम्मीदवार बनाया। लेकिन जदयू के विलट पासवान ने उन्हें शिकस्त दे दी। पिछले विधनसभा चुनाव में जदयू ने विलट पासवान की जगह सुरेश चंचल को और राजद ने लाल बाबू राम को अपना उम्मीदवार बनाया था। इस चुनाव में राजद प्रत्याशी को करीब 15 हजार वोटों से पराजय का मुंह देखना पड़ा। आज राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बदला हुआ है। कभी राजद के टिकट पर विधयक चुने गए शीतल राम कापफी पहले राजद को छोड़ कर जदयू का दामन थाम चुके हैं। जदयू से दो बार विधयक निर्वाचित हो चुके विलट पासवान आज भाजपा की गोद में बैठे हुए हैं तो जदयू से निर्वाचित विधयक सुरेश चंचल दल से निष्कासन का दंश झेलते हुए एनडीए के घटक दलों में अपने राजनीतिक भविष्य की तलाश करने में जुट गए हैं। इध्र छः समाजवाद, दलों के महाविलय की घोषणा होने के साथ ही राजद और जदयू के संभावित प्रत्याशितयों के बीच अपनी-अपनी दावेदारी को लेकर खींचतान जारी है। हालांकि जदयू के वरिष्ठ और पुराने कार्यकर्ता हरिओम कुशवाहा कहते हैं कि महाविलय की घोषणा स्वागत योग्य है। अब तक समान विचारधरा वाले लोग अलग-अलग दलों में बंटे होने के कारण कुछ कमजोर हो गए थे। विलय से हमारी ताकत काफी बढ़ी है। सकरा विधनसभा क्षेत्रा से सर्व सम्मत और जीतने वाला उम्मीदवार दिया जाएगा, इसमें कोई विरोधभास नहीं है। लगे हाथ वे यह भी बताने से नहीं चूकते कि इस विधनसभा क्षेत्रा से कई लोग टिकट के दावेदार हैं लेकिन समय आने पर इस मामले को आसानी से सुलझा लिया जायेगा। महाविलय के बाद इस क्षेत्रा से टिकट के प्रमुख दावेदारों में राजद के मुजफ्रपफरपुर जिला दलित प्रकोष्ठ के अध्यक्ष सच्चिदानंद सुमन, राजद प्रत्याशी के रूप में जदयू उम्मीदवार से दो बार पराजित हो चुके लालबाबू राम, जदयू के जिला उपाध्यक्ष एवं जिला 20 सूत्राी कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति सदस्य अशोक चैध्री, पूर्व मंत्राी शीतल राम एवं राजद के चक्रध्र पासवान प्रमुख हैं।
बताते चलें कि वर्ष 2000 के विधनसभा चुनाव में सकरा से निर्वाचित होने के बाद प्रदेश सरकार में शीतल राम मंत्राी भी बनाये गए थे। बाद में लालू प्रसाद यादव के बुरे दिन आने पर उन्होंने उनसे किनारा कर जदयू का दामन थाम लिया। गत विधनसभा चुनाव में जदयू ने उन्हें बेटिकट करते हुए सुरेश चंचल को अपना उम्मीदवार बनाया था। सूत्रा बताते हैं कि आगामी विधनसभा चुनाव में उन्हें लालू प्रसाद के कोप का शिकार होकर टिकट से वंचित होना पड़ सकता है। दो-दो बार चुनाव हार चुके राजद के लालबाबू राम को भी उनकी पिछली कसौटी पर परखने की बात क्षेत्रा के राजनीतिक हलके में सुनी जाने लगी है। इसके इतर जदयू नेता अशोक चैध्री अपनी लोकप्रियता और दल के प्रति निष्ठा और वपफादारी के कारण पार्टी कार्यकर्ताओं में गहरी पैठ बनाये हुए हैं। कार्यकर्ताओं का मानना है कि श्री चैध्री पर कभी भी पार्टी विरोध्ी गतिविध् िका कोई आरोप आज तक नहीं लगा है। राजद-जदयू कार्यकर्ताओं के बीच इन दिनों अशोक चैध्री और सच्चिदानंद सुमन को टिकट का प्रबल दावेदार मानते हुए जोर आजमाईश शुरू हो चुकी है। राजद खेमे के चक्रध्र पासवान भी स्वयं को टिकट का दावेदार मानते हुए जन संपर्क अभियान चलाये हुए हैं। कांटी विधनसभा क्षेत्रा की वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति भी सकरा से कुछ अलग नहीं है। यहां के वर्तमान विधयक अजित कुमार अपनी पार्टी से निष्कासित किए जा चुके हैं। जाहिर है कि महाविलय के बाद बनने वाली नयी पार्टी को यहां से कोई ऐसा सर्वमान्य नया उम्मीदवार देना होगा जो यहां सीट बचा सके। इस विधनसभा क्षेत्रा से भी वर्ष 2005 के चुनाव मंे राजद प्रत्याशी मो. हैदर आजाद और 2010 के चुनाव में राजद के ही मो. इसराईल चुनाव हार चुके हैं। इसी तरह 2005 के उपचुनाव में लोजपा के टिकट पर अजित कुमार ने राजद के मो. जमाल को हराया था। दो-दो बार जदयू प्रत्याशी के रूप में कांटी से चुनाव जीतने वाले अजित कुमार अब दल से बाहर हैं। लिहाजा इस सीट के लिए कई दावेदारों के नाम चर्चा में हैं। इनमंे जदयू के वरिष्ठ और पुराने नेता रामाशंकर सिंह, राजद खेमे से मो. इरपफान दिलकश, मो. लालबाबू अंसारी, मो. आलम और हैदर आजाद प्रमुख हैं। सूत्रों का कहना है कि राजद के पिछले प्रदर्शन को देखते हुए रामाशंकर सिंह इस क्षेत्रा से टिकट के सशक्त दावेदार हो सकते हैं। उनकी यह दावेदारी पार्टी हित में मानी जा रही है। जानकार सूत्रों का कहना है कि कांटी विधनसभा क्षेत्रा पर एनडीए का एक घटक दल रालोसपा भी अपनी नजर गड़ाए हुए है। यहां से इसके उम्मीदवार के रूप में रालोसपा के जिलाध्यक्ष शशिकुमार सिंह के नाम की चर्चा हो रही है। वैसे एनडीए जिले के सभी 11 विधनसभा क्षेत्रों में अपना उम्मीदवार देने का निर्णय कर चुकी है। इसमें बोचहा, कांटी और मीनापुर विधनसभा क्षेत्र रालोसपा को देने की संभावना है।
मीनापुर विधनसभा क्षेत्रा जदयू के कब्जे में है। दिनेश प्रसाद यहां के विधयक हैं। वे पूर्व मंत्राी भी रह चुके हैं। उन पर भी बागी होने का ठप्पा लग चुका है। पिछले महीने वे अपने पुत्रा अजय कुमार को उनके समर्थक सहित भाजपा में शामिल भी करा चुके हैं। यहां भी विलय के बाद नयी पार्टी को अपना प्रत्याशी तलाश करना होगा। पूर्व में राजद के मुन्ना यादव दिनेश प्रसाद को कड़ी टक्कर दे चुके हैं। गत चुनाव में मुन्ना यादव के मुकाबले दिनेश प्रसाद को मात्रा 5436 मतों से जीत हासिल हुई थी। इसबार भी यहां से मुन्ना यादव टिकट के सशक्त दावेदार बताये जा रहे हैं। जदयू खेमा से नीतीश कुमार के निकटतम माने जाने वाले और जिला किसान प्रकोष्ठ के अध्यक्ष मनोज कुशवाहा, तेज नारायण सहनी और राजद के ही जयशंकर प्रसाद यादव को इस विधनसभा सीट से टिकट का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। इन तमाम दावेदारों के बीच से सर्वमान्य प्रत्याशी का चयन नयी पार्टी को करना होगा जो कापफी चुनौती भरा होगा। इसी सीट से रालोसपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद कुशवाहा के दावेदारी की भी चर्चा है। इसी तरह पारू विधनसभा सीट से राजद के जिलाध्यक्ष एवं पूर्व विधयक मिथिलेश यादव, जदयू के सुबोध् कुमार सिंह, विभात कुमार और विजय पटेल दावेदार बताये जा रहे हैं। यह सीट भाजपा के कब्जे में है। बरूराज क्षेत्रा पिफलहाल राजद के कब्जे में है। यहां के वर्तमान विधयक बृजकिशेर सिंह हैं। इस सीट से जदयू के नंद कुमार राय भी दावेदार हो सकते हैं। साहेबगंज विधयक राजु कुमार सिंह पिछले चुनाव में जदयू के टिकट पर निर्वाचित हुए थे। कथित दल विरोध्ी गतिविध्यिों के आरोप में वे भी पार्टी से निष्कासित किए जा चुके हैं। यहां राजद के पूर्व विधयक रामविचार राय एक मात्रा दावेदार बताये जा रहे हैं। इसलिए इस सीट पर नयी पार्टी के सामने प्रत्याशी चयन में कोई खास परेशानी नहीं होने की बात कही जा रही है। औराई विधनसभा क्षेत्रा में भाजपा विधयक रामसूरत राय के मुकाबले में पिछले चुनाव में राजद के सुरेंद्र कुमार मैदान में थे। इसबार यहां से राजद के सुरेंद्र कुमार और जदयू के अर्जुन राय सशक्त दावेदार माने जा रहे हैं। सुरेंद्र कुमार औराई के पूर्व विधयक रह चुके हैं जबकि अर्जुन राय सीतामढ़ी के पूर्व सांसद हैं। विधनसभा चुनाव होने मंे अभी करीब छः माह का विलंब है लेकिन ये दोनों दावेदार अपने क्षेत्रा में सघन जनसंपर्क अभियान चलाये हुए हैं। सूत्रों का कहना है कि जहां सुरेंद्र राय को राजद नेता और पूर्व सांसद रघुवंश प्रसाद सिंह का वरदहस्त प्राप्त हैं, वहीं अर्जुन राय जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव के कापफी नजदीकी हैं। ऐसे में यहां से नये दल के लिए उम्मीदवार का चयन करना उतना आसान नहीं होगा। गायघाट विधनसभा क्षेत्रा भी भाजपा के कब्जे में है। गत विधनसभा चुनाव में भाजपा की वीणा देवी ने राजद के महेश्वर यादव को करीब 16 हजार मतों से पराजित किया था। महेश्वर यादव गायघाट के पूर्व विधयक रह चुके हैं। आगामी विधनसभा चुनाव में महेश्वर यादव नयी पार्टी के एक मात्रा दावेदार हैं लेकिन जदयू के निरंजन राय भी इस सीट से अपनी दावेदारी के लिए निरंतर शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में बताये जाते हैं। मुजफ्रपफरपुर विधनसभा सीट से जदयू के विजेन्द्र चैध्री ;पूर्व विधयकद्ध डाक्टर हरेंद्र कुमार, विवेक कुमार ;दोनो ंराजदद्ध के नाम की जोरदार चर्चा दावेदार के रूप में होने लगी है। जिले के कुल 11 विधनसभा क्षेत्रों में बोचहा ;सुरक्षितद्ध और कुढनी विधनसभा क्षेत्रा जहां के विधयक रमई राम और मनोज कुमार सिंह प्रदेश सरकार में मंत्राी हैं वहां नये दल को प्रत्याशी के चयन में शायद कोई मुश्किल नहीं होगा क्योंकि वहां सीटिंग-गेटिंग का पफार्मूला लागू हो सकता है। बहरहाल, महाविलय की घोषणा के बाद नये दल से चुनाव लड़ने के लिए टिकट के दावेदारों में नये सिरे से हड़कंप मचा हुआ है। कौन किसकी टांग खींचेगा यह आने वाला समय ही बतायेगा।

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