December 12, 2017

रोहतास-कैमूर: विधान परिषद चुनाव ः महागठबंधन की निकल गई हवा

By wmadmin123 - Fri Aug 21, 7:11 am

केबी यादव/मनीष कुमार सिन्हा

विधन परिषद के चुनाव में भाजपा ने रोहतास-कैमूर सीट को जदयू से झटक लिया है। भाजपा प्रत्याशी संतोष सिंह ने जदयू के उम्मीदवार अनिल सिंह यादव को छह सौ सतरह मतों से पराजित किया है। भाजपा प्रत्याशी को रालोसपा और लोजपा का समर्थन प्राप्त था, तो जदयू के उम्मीदवार के पक्ष में राजद और कांग्रेस पार्टी खड़ी थी। विधनसभा चुनाव के चंद माह पूर्व हुए इस सेमीपफाइनल इलेक्शन में महागठबंध्न की हार और एनडीए की जीत हुई। पूर्व विधन पार्षद कृष्ण कुमार सिंह ने इस बार कतिपय कारणों से चुनाव नहीं लड़ना चाहा, तो जदयू ने राजनीति के क्षेत्रा में पदार्पण करने वाले एक नए युवा नेता अनिल सिंह यादव को चुनावी समर में उतार दिया। पुराने समाजवादी नेता एवं सूबे के स्वास्थ्य मंत्राी रामध्नी सिंह के मार्गदर्शन में राजनीति के नए खिलाड़ी ने अखाड़े में कदम रखा, लेकिन किस्मत ने दगा दे दिया। मतदान के चंद दिन पूर्व जदयू प्रत्याशी अनिल सिंह यादव एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से जख्मी हो गए। सदर अस्पताल सासाराम में प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें पीएमसीएच ले जाया गया। श्री यादव के सिर में गहरी चोट लगी। उनका बायां हाथ प्रफैक्चर कर गया था। इस हादसे के बाद जदयू प्रत्याशी के सिपहसालार चुनावी मोर्चे को संभाल पाने में नाकाम सि( हुए। राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि सड़क हादसे में जदयू प्रत्याशी के घायल होने के बाद भाजपा के उम्मीदवार संतोष कुमार सिंह को मोर्चा जीतना आसान हो गया। चूंकि विधन परिषद के चुनाव में ध्न बल ज्यादा कारगर सि( होता है, इसलिए भाजपा प्रत्याशी ने सवर्ण पंचायत प्रतिनिध्यिों के साथ-साथ महादलित जन प्रतिनिध्यिों को भी सहजता के साथ अपने पक्ष में कर लिया। जदयू प्रत्याशी के सिपहसालार हर मोर्चे पर कमजोर पड़े। इसके अलावा इस बार विधन परिषद के चुनाव में वाम मोर्चा ने भी उम्मीदवार को खड़ा किया था, इसलिए पिछड़े समुदाय के अनेक पंचायत प्रतिनिध् िलाल झंडा के साथ हो गए। जदयू प्रत्याशी के साथ उनके जाति-समुदाय के कतिपय नेताओं के साथ हुए मनमुटाव ने भी उनके लिए नकारात्मक माहौल बनाया। भाजपा प्रत्याशी के लिए यादवी कलह वरदान सि( हुआ। राजनीतिक हलकांे में यह चर्चा है कि विधन परिषद के चुनाव में मिली शिकस्त और सड़क हादसे में घायल होने से भी जदयू नेता अनिल सिंह यादव के हौसले पस्त नहीं हुए है। वे पुनः विधनसभा चुनाव में भी अपना दमखम दिखाने को तैयार हैं।
सेमीपफाइनल चुनाव के बाद रोहतास जिले के सभी राजनीतिक दलों ने विधनसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। हर दल विधनसभा स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन कर रहे हैं। इन सम्मेलनों में दलों के केंद्रीय एवं प्रदेश स्तरीय नेतागण विशेष रूप से शरीक हो रहे हैं। विधनसभा चुनाव के मद्देनजर कुछ दलों ने बूथ कमेटियां बना ली हैं, तो कुछ कमेटी गठन की प्रक्रिया पूरी करने में जुटे हुए हैं। जिले में सासाराम, डेहरी, काराकाट, करगहर, दिनारा, चेनारी और नोखा यानी कुल सात विधनसभा क्षेत्रा हैं। सासाराम और नोखा सीट पर भाजपा का कब्जा है। करगहर, चेनारी, दिनारा व काराकाट की सीट जदयू के खाते में है। डेहरी विधनसभा क्षेत्रा पर निर्दलीय प्रत्याशी ज्योति रश्मि का कब्जा है। वर्ष 2010 के चुनाव में काराकाट विधनसभा क्षेत्रा से जदयू के प्रत्याशी राजेश्वर राज को विजय श्री मिली थी, लेकिन अब वे बागी होकर पूर्व मुख्यमंत्राी जीतनराम मांझी के साथ एनडीए में शामिल हो गए हैं।
रोहतास जिले में सर्वाध्कि महत्वपूर्ण चुनावी दंगल डेहरी विधन सभा क्षेत्रा में होने की उम्मीद है। पिछले चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी ज्योति रश्मि जोशी ने राजद के उम्मीदवार एवं पूर्व मंत्राी मो. इलियास हुसैन और भाजपा प्रत्याशी अवध्ेश नारायण सिंह को शिकस्त दी थी। ज्योति रश्मि को 43 हजार 634 वोट मिले थे। निकटतम प्रतिद्वंद्वी राजद प्रत्याशी मो. इलियास हुसैन ने 33 हजार 819 मत हासिल किए थे। भाजपा के उम्मीदवार अवध्ेश नारायण सिंह तीसरे पायदान पर रहे। वर्ष 2005 के चुनाव में भी राजद प्रत्याशी इलियास हुसैन को निर्दलीय प्रत्याशी प्रदीप कुमार जोशी ने शिकस्त दी थी। इस बार राष्ट्र सेवा दल के अध्यक्ष एवं पूर्व विधयक प्रदीप कुमार जोशी ने 234 सीटों पर प्रत्याशी खड़े करने और ज्योति रश्मि जोशी को मुख्यमंत्राी बनाने की घोषणा की है। उम्मीद की जा रही है कि 2015 के चुनाव मंे भी डेहरी विधन सभा क्षेत्रा में मुख्य मुकाबला निवर्तमान विधयक ज्येाति रश्मि जोशी और राजद उम्मीदवार इलियास हुसैन के बीच ही होगा। भाजपा के करीब आध दर्जन नेता टिकट हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं। राजद से नाता तोड़कर भाजपा में शामिल हुए पूर्व विधयक सत्यनारायण यादव के अलावा अजय यादव, अजय कुमार सिंह, रिंकू सोनी, प्यारे लाल ओझा और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गोपाल नारायण सिंह के पुत्रा त्रिविक्रम नारायण सिंह भाजपा के संभावित प्रत्याशी हैं। दूसरी तरपफ, एनडीए के घटक दल रालोसपा के प्रांतीय संगठन सचिव पफतेह बहादुर सिंह और इंजीनियर ललन सिंह भी डेहरी विधनसभा क्षेत्रा से चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे हैं। पफतेह बहादुर सिंह रालोसपा के अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्राी उपेंद्र कुशवाहा के बेहद करीबी भी माने जाते हैं।
नोखा विधनसभा क्षेत्रा में इस बार भाजपा नेता रामेश्वर चैरसिया और पूर्व मंत्राी आनंद मोहन के बेटे कृष्ण मोहन चैध्री के बीच मुकाबला हो सकता है। पूर्व मंत्राी के निध्न के बाद राजद उनके बेटे को नोखा का प्रत्याशी बना सकता है। राजद पूर्व मंत्राी के निध्न के बाद उनके बेटे को प्रत्याशी बना कर मतदाताओं की सहानुभूति का लाभ उठाना चाहेगा। श्री चैरसिया से क्षेत्रा के मतदाता ही नहीं बल्कि भाजपा कार्यकर्ता भी बेहद नाराज हैं। पिछले दिनों भाजपा कार्यकत्र्ताओं ने जिले में आने वाले भाजपा के सभी बड़े नेताओं से रामेश्वर चैरसिया की शिकायत की है। माना जा रहा है कि इस बार श्री चैरसिया के लिए कठिन डगर होगी विधनसभा की। चेनारी विधनसभा क्षेत्रा का भी राजनीतिक परिदृश्य बदल चुका है। पिछले चुनाव में जदयू प्रत्याशी श्याम बिहारी राम को चुनौती देने वाले राजद नेता ललन पासवान ने रालोसपा का दामन थाम लिया है। एनडीए खेमे में चर्चा है कि पूर्व विधयक ललन पासवान ही प्रत्याशी होंगे। राजनीतिक हलके में यह भी चर्चा है कि इलाके के मतदाता अपने विधयक श्याम बिहारी राम से कापफी क्षुब्ध् हैं, इसलिए प्रत्याशी नहीं बदलने पर जदयू को यह सीट गंवानी पड़ सकती है।
सासाराम विधनसभा क्षेत्रा पर भाजपा का कब्जा है। भाजपा नेता जवाहर प्रसाद ने पिछले चुनाव में राजद प्रत्याशी अशोक कुमार सिंह को पराजित किया था। इस बार महागठबंध्न की ओर से रोजद नेता अशोक कुमार सिंह के अलावा जदयू के जिलाध्यक्ष ईश्वर चन्द्र कुशवाहा भी भाजपा प्रत्याशी से मुकाबला करने के लिए तैयार हैं। अब महागठबंध्न का प्रत्याशी कौन होगा, यह तो लालू-नीतीश ही तय करेंगे। महासचिव छोटन खान और राध कृष्ण यादव भी चुनावी समर में कूदने को तैयार हैं। जदयू और राजद के बीच महागठबंध्न हो जाने के बाद अगर डेहरी की सीट जदयू के खाते में चली गई तो खुर्शीद अनवर उपर्फ छोटन खान को टिकट मिलने की उम्मीद बढ़ जाएगी।
करगहर विधनसभा क्षेत्रा से निर्वाचित होने वाले बुजुर्ग समाजवादी नेता रामध्नी सिंह सूबे के स्वास्थ्य मंत्राी हैं। पिछले चुनाव में श्री सिंह ने लोजपा प्रत्याशी शिवशंकर सिंह कुशवाहा को पराजित किया था। इसबार लोजपा एनडीए में शामिल हो गई है, इसलिए सीट बंटवारे में करगहर मिलेगा या नहीं यह कहना कठिन हैं। करगहर से भाजपा नेता संतोष पटेल टिकट हासिल करने की जुगत में लगे हुए हैं। वे रोहतास जिला परिषद के उपाध्यक्ष भी हैं। इनके अलावा जिले के एक वरिष्ठ पत्राकार विनोद कुमार तिवारी भी चुनावी दंगल में ताल ठांेकने को तैयार हैं। श्री तिवारी एनडीए के ही किसी घटक दल के प्रत्याशी बनने की कामना के तहत टिकट हासिल करने में लगे हुए हैं। पप्पू यादव के लोक अध्किार मंच के नेता लाल साहेब सिंह भी जदयू प्रत्याशी को पछाड़ने के लिए चुनावी दंगल में उतरेंगे। उनकी पत्नी सीता देवी सिंह प्रखंड प्रमुख हैं।
दिनारा क्षेत्रा में सूबे के सहकारिता मंत्राी जय कुमार सिंह को पिछली बार राजद नेत्राी सीता सुंदरी देवी ने चुनौती दी थी। जदयू और राजद की एकता के बाद इस बार सहकारिता मंत्राी को एनडीए से ही चुनौती मिलेगी। नोखा विधनसभा क्षेत्रा में पिछले चुनाव में भाजपा के रामेश्वर चैरसिया, राजद नेत्राी कांति सिंह और राजद के बागी नेता एवं पूर्व मंत्राी आनंदन मोहन के बीच मुकाबला हुआ था। चर्चा है कि इस बार महागठबंध्न की ओर से पूर्व मंत्राी के पुत्रा कृष्ण मोहन चैध्री इसके अलावा काराकाट की सीट के लिए महागठबंध्न के शीर्षस्थ नेताओं को नए प्रत्याशी का चयन करना होगा। काराकाट विधनसभा क्षेत्रा पर पहले राजद और भाकपा माले का वर्चस्व था। पिछले चुनाव में जदयू प्रत्याशी के रूप में राजेश्वर राज ने राजद के मुन्ना राय को पराजित किया था। राजेश्वर राज बागी हो गए हैं और पूर्व मुख्यमंत्राी जीतनराम मांझी के साथ एनडीए के कुनबे में शामिल हो गए हैं। काराकाट से राजद के प्रदेश उपाध्यक्ष बलिराम मिश्रा और पूर्व प्रत्याशी मुन्ना राय के अलावा बाहुबली विधयक सुनील पाण्डेय के अनुज संतोष पांडेय भी महागठबंध्न का टिकट प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। राजेश्वर राज को महागठबंध्न के अलावा भाकपा माले के प्रत्याशी पूर्व विधयक अरूण कुमार सिंह की चुनौती का भी इसबार सामना करना होगा। वामपंथी खेमें में भाकपा माले लिबरेशन के एक अन्य नेता जवाहर सिंह यादव को भी काराकाट से प्रत्याशी बनने की संभावना प्रकट की जा रही है। विधनसभा चुनाव को लेकर एनडीए और महागठबंध्न के घटक दलों के अनेक छोटे-बड़े नेता प्रत्याशी बनने के लिए पटना-दिल्ली की दौड़ लगा रहे हैं। टिकटार्थियों की इस रेस में कौन-कौन लोग विजेता बनते हैं, यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

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