October 21, 2017

सुपौल-सहरसा-मधेपुरा: हुई नूतन की तूफानी जीत रंग लाया नमो का नाम और विधायक बबलू का काम

By wmadmin123 - Fri Aug 21, 7:43 am

संजय सोनी

स्थानीय निकाय सहरसा, मध्ेपुरा व सुपौल के विधन परिषद सीट से राजग गठबंध्न के उम्मीदवार व छातापुर के जदयू विधयक नीरज कुमार बबलू की ध्र्मपत्नी नूतन सिंह की जीत के बाद एनडीए के हौंसले बुलंद हंै। महागठबंध्न पस्त और मायूस दिख रहा हैं। स्थानीय निकाय के इस सीट को लालू-नीतीश, कांग्रेस तथा एनडीए ने प्रतिष्ठा की सीट बना दी थी। बताया जाता है कि नूतन की यह जीत बिल्कुल बदली परिस्थिति, यादवों का अल्पसंख्यकों से मोह भंग, राजपूतों की आपसी एकजुटता और हर किसी को कठिन से कठिन परिस्थिति में खुद का दास बनाने में सक्षम ‘ललका गांध्ीजी’ की कृपा के कारण हुई है। इस जीत के पीछे विधयक नीरज कुमार सिंह बबलू के उपनाम ‘बबलू सिंह’ और पूर्व के बाहूबली छवि भी आकर्षण बना। गांव के दबे-कुचले त्रिस्तरीय पंचायतीराज जनप्रतिनिध्यिों के वार्ड सदस्यों को लगा कि कम से कम एक ताकत तो साथ निभाएगा और वक्त बे वक्त मदद तो मिलती रहेगी।
मतलब सापफ है कि विधन परिषद चुनाव के कुछ माह पूर्व ही 22 अप्रैल को नूतन सिंह ने भाजपा के प्रदेश कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडे, पूर्व मंत्राी प्रेम कुमार के अलावा सहरसा के पूर्व विधयक संजीव कुमार झा, पूर्व विधयक किशोर कुमार मुन्ना, पूर्व विधयक सुरेन्द्र यादव सहित कई प्रमुख नेताओं के समक्ष भाजपा ज्वाईन की। इसके बाद विधयक बबलू सिंह ने 7 मई 2015 को अपने पफेसबुक पर भी भाजपा की ओर से विधन परिषद के प्रत्याशी बनाये जाने पर हर्ष जताते हुए कहा कि आध्ी आबादी आज भाजपा के साथ है। जब यह सीट गठबंध्न के बिहार में प्रमुख घटक दल लोजपा के पाले चली गयी तो जिस गति से नूतन सिंह को भाजपा ज्वाईन करायी गई उससे ज्यादा गति से लोजपा ज्वाईन कर पार्टी समर्थित उम्मीदवार घोषित हुई। भाजपा नेता एवं छातापुर मुखिया संघ के सचिव मनोज कुमार राय कहते हैं कि बड़े पफासले से नूतन सिंह की जीत इस बात को प्रमाणित करती है कि कोसी में एनडीए की लहर चल रही है। साथ ही माननीय विधयक नीरज कुमार सिंह बबलू के कार्यों पर भी मतदाताओं ने वोट दिया। विधनपरिषद का चुनाव सेमीपफाइनल था जिसे हम जीत चुके हैं। पफाइनल भी हम जीतेंगे ही।
इध्र, राजद से लोजपा और लोजपा से विधन पार्षद बन कर अपने स्वार्थ सि(ि के लिए जदयू का दामन थामने वाले मो. इसराईल राईन के प्रति राजद के लोगों में आक्रोश व असंतुष्टि पहले से ही थी। 2015 में जब यह सीट महागठबंध्न के कांग्रेस की झोली में चली गयी तो श्री राईन ने भी रातों-रात पाला बदल कर कांग्रेस शरणम् गच्छामि हो गये। इस बात का मलाल राजद व कांग्रेस के पुराने व सक्रिय कार्यकर्ताओं को अंदर से था। लिहाजा, राजद के यादवों के साथ-साथ कांग्रेस के भी कई ध्ुरंध्र पराजित करने की जुगत में भीर गये। यादवों की एक मानसिकता यह भी रही है कि इस सीट पर अगर पिफर से श्री राईन की जीत हो जाती है तो सदा के लिए यादव व राजद के हाथ से यह सीट चली जाएगी। इस पेशोपेश में उलझे यादवों ने पहले तो माकपा नेता पूर्व विधन पार्षद का. बलराम सिंह यादव व प्रो. रणध्ीर यादव के प्रति रूझान बनाये रखा। लेकिन रणनीति में अक्षम देख और जीत की रेस से श्री राईन को पीछे ध्केलने के लिए ब्रह्मास्त्रा के रूप राजग गठबंध्न की प्रत्याशी नूतन सिंह दिखी और सबक सीखाने के लिए यादव सहित गैर यादवों के बीच रातों-रात हिन्दू-मुस्लिम के रंग का जहर घोल दिया। एक तरपफ सांप्रदायिकता का जहर, तो दूसरी तरपफ ‘ललका गांध्ीजी’ का खेल त्रिस्तरीय पंचायतीराज जनप्रतिनिध्यिों के बीच इस कदर खेला गया कि देखते ही देखते घरेलू महिला से नूतन सिंह विधन पार्षद बन गयी और इस जीत पर अब राजग गठबंध्न इतराने भी लगे हैं। लेकिन राजग गठबंध्न को यह नहीं भूलना चाहिए कि इस जीत के समीकरण से आसन्न बिहार विधनसभा चुनाव की सेहत पर कोई खास असर नहीं पड़ने जा रही है। रही बात राजपूतों की तो पहली बार राजद, जदयू, कांग्रेस सहित किसी अन्य पार्टी के राजपूत खुलकर नूतन सिंह के पक्ष में अपनी एकजुटता दिखाया और कामयाब भी रहे। अभी हाल यह है कि सहरसा, मध्ेपुरा व सुपौल जिले के विभिन्न विधनसभा सीटों से चुनाव लड़ने को आतुर नवोदित नेता भी अपना सब कुछ विधयक नीरज कुमार बबलू को ही मान बैठे हैं। रातों-रात भाजपा व रातों-रात लोजपा से समर्थन मिल जाना लगता है इनकी सियासी पहुंच सबों से ज्यादा है। अभी तो श्रीमती सिंह के विधन पार्षद बनने पर लोजपा से ज्यादा खुश भाजपा वाले हैं। वैसे भी सांगठनिक रूप से लोजपा इन क्षेत्रों में व्यक्तिवादी रही है। भाजपा की ताकत, लोजपा को एकबार पिफर कोसी में परवान चढा दिया। पहले लोजपा को राजद ने यह स्थान दिलाने में अपनी सांगठनिक शक्ति का खुलकर उपयोग किया था। इसलिए इस जीत पर खासकर कोसी में महागठबंध्न को घबराना नहीं चाहिए और न हीं राजग गठबंध्न को इतराना की जरूरत है।

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