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होगा कौन सीवान का ‘साहब’

Posted By wmadmin123 On April 16, 2014 @ 1:00 pm In राज्य | | No Comments

Shri-Om-Prakash-Yadav [1]

लोेकसभा चुनाव को लेकर सीवान की राजनीतिक तपिश मौसम की गर्मी के साथ ही बढ़ती जा रही है। हालांकि सीवान लोकसभा कई मायनों में गत लोकसभा चुनाव जैसा ही है। इस चुनाव में भी मुख्य मुकाबला पूर्व राजद सांसद मो. शहाबुद्दीन की पत्नी व राजद उम्मीदवार हिना शहाब और निवर्तमान सांसद व भाजपा प्रत्याशी ओमप्रकाश यादव के बीच ही बताया जा रहा है। ऐसे जदयू ने इस बार बाहरी उम्मीदवार की जगह पूर्व भाजपा नेता और विधन पार्षद मनोज कुमार सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया है। राजनीतिज्ञों की मानें तो भाजपा के कुछ नेता भीतर ही भीतर मनोज सिंह की मदद करेंगे। वैसे भी वर्षों भाजपाईयों के साथ रहे श्री सिंह का भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं से अच्छे संबंध् हैं। वहीं गत लोकसभा चुनाव में निर्दलीय सांसद बने श्री यादव भाजपा नेताओं से ज्यादा और भाजपा कार्यकर्ताओं से कम परिचित हैं। विदित हो कि जदयू प्रत्याशी श्री सिंह ने पहले श्री यादव को भाजपा का टिकट न देने का दबाव भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर बनाया था। हालांकि श्री सिंह की इस मुहिम में सीवान भाजपा के अध्किांश कद्दावर नेता शामिल थे। लेकिन जब भाजपा नेतृत्व ने श्री यादव को ही भाजपा का टिकट देने की बात दुहरायी तो थकहार कर श्री सिंह ने अपना सुरक्षित ठिकाना जदयू के रूप में तलाश लिया। यूं कहें कि सीवान ने पिफर से अपना इतिहास दुहराया है। गत लोकसभा चुनाव में श्री यादव जदयू ;एनडीएद्ध के टिकट के प्रबल दावेदार थे। लेकिन जदयू के नेतृत्व ने जनभावनाओं की अनदेखी कर जदयू के कद्दावर नेता वृषिण पटेल को सीवान से उम्मीदवार बना दिया था। जिससे व्यथित होकर श्री यादव जदयू से बगावत कर बतौर निर्दलीय लोकसभा चुनाव में कूद पड़े थे। जनता के भरपूर समर्थन व मो. शहाबुद्दीन के विरोध्ी मतों के ध््रुवीकरण व सहानुभूति वोट से श्री यादव के माथे पर सांसद का ताज चढ़ा था। श्री यादव के बगावती तेवर का समर्थन पिछले चुनाव में सीवान की जनता ने किया था। तभी तो जदयू प्रत्याशी श्री पटेल की शर्मनाक हार हो गयी थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जदयू प्रत्याशी श्री पटेल को एक लाख या उससे अध्कि वोट मिल गया होता तो यह पासा पलट सकता था और श्री यादव की जगह राजद प्रत्याशी हिना शहाब सीवान की सांसद होती। लेकिन सीवान की जनता ने जदयू प्रत्याशी श्री पटेल को नकार-सा दिया। इस प्रकार श्री यादव का बगावत पफार्मूला कामयाब हो गया। जिस राह को अख्तियार कर श्री यादव ने मैदान मारा था उसी राह को अख्तियार कर श्री सिंह ने बगावती तेवर में चुनावी मैदान में हैं। अब देखना यह है कि बगावत का यह सिलसिला जीत में तब्दील होता है या नहीं। गत लोकसभा चुनाव में जब श्री यादव ने जदयू से बगावत कर बतौर निर्दलीय उम्मीदवार चुनावी जंग में कूदे थे तो मनोज सिंह ने भी एनडीए ;भाजपाद्ध से बगावत कर श्री यादव की भरपूर मदद की थी। लेकिन गत लोकसभा चुनाव में एक-दूसरे की मदद करने वाले आज एक-दूसरे के आमने-सामने हैं व सीध्ी टक्कर दे रहे हैं। राजनीतिज्ञों की मानें तो मो. शहाबुद्दीन विरोध्ी व हिन्दू-मानसिकता वोटों के सहारे सांसद बने श्री यादव ने जब यूपीए को अपना समर्थन दे दिया तो जनता की नाराजगी भी बढ़ गयी थी। अलबत्ता श्री यादव ने देश की कथित लहर को भांपते हुए चुनाव से ठीक छह माह पूर्व यूपीए से समर्थन वापस ले लिया और भाजपा में शामिल हो गए। इतना ही नहीं, श्री यादव ने भाजपा का टिकट भी हासिल कर लिया। अलबत्ता कल तक श्री यादव का विरोध् कर रहे सीवान भाजपा यूनिट ने हाई-कमान का आदेश मिलते ही श्री यादव की प्रचार की कमान संभाल लिया है।
अलबत्ता, भाकपा ;मालेद्ध के पूर्व विधयक गत लोकसभा के पूर्व प्रत्याशी अमरनाथ यादव इस बार पूरे दमखम के साथ चुनावी मैदान में हैं। वहीं ‘आप’ पार्टी के बैनर पर शहीद उमाकांत सिंह के पौत्रा व हाल ही में कांग्रेस छोड़कर आप में शामिल राहुल कृति सिंह चुनावी जंग में हैं। जबकि बसपा ने टिकट गणेश राम को दिया है। इस प्रकार इस बार का चुनाव गत लोकसभा चुनाव से अलग होने की संभावना जतायी जा रही है। माना जाता है कि भाकपा ;मालेद्ध के प्रत्याशी अमरनाथ यादव का पश्चिमांचल में अच्छी पकड़ है। साथ ही भाकपा ;मालेद्ध को अपने कैडर वोट का भी भरोसा है। वहीं ‘आप’ के प्रत्याशी राहुल के पीछे आप की सापफ-सुथरा चेहरा है तो बसपा के श्री राम वर्षों से चुनाव की तैयारी में जुटे हैं।
यदि दलीय स्तर पर समीकरणों की बात करें कि राजद का एमवाई समीकरण, जदयू का अतिपिछड़ा, कुर्मी व पसमांदा मुसलमानों का समीकरण और भाजपा का सवर्ण, वैश्य और अन्य का समीकरण आदि बिहार के प्रमुख समीकरण रहे हैं। सीवान में इन समीकरणों की बात की जाय तो मुसलमान का एक तबका पसमांदा एमवाई समीकरण में दरार डालता नजर आ रहा है। लेकिन राजद नेताओं का मानना है कि एमवाई समीकरण सीवान में कापफी मजबूत है। वहीं सीवान संसदीय क्षेत्रा में दो यादवों क्रमशः ओमप्रकाश यादव ;भाजपाद्ध व अमरनाथ यादव ;भाकपा मालेद्ध के चुनावी मैदान में रहने से यादव मतों में बिखराव तय माना जा रहा है। इसका थोड़ा नुकसान राजद को हो सकता हैं लेकिन ये दोनों प्रत्याशी गत लोकसभा में भी प्रत्याशी थे तब भी राजद की हिना शहाब करीब 67 हजार से हारी थीं। इध्र चर्चा यह है कि मनोज सिंह की जगह पूर्व काबीना मंत्राी व जदयू के प्रांतीय उपाध्यक्ष अवध् बिहारी चैध्री, जदयू के प्रत्याशी होते तो पसमांदा मुसलमान ज्यादा संख्या में उनका साथ देते। अलबत्ता मनोज सिंह के चुनावी मैदान में होने से भाजपा का समीकरण भी प्रभावित हो सकता हैं वैसे तो इस चुनाव में भाजपा के साथ पिछड़ों के कापफी संख्या में होने की बात बतायी जा रही है। वहीं बसपा के गणेश राम भी महादलितों के वोट बैंक में सेंध् लगा सकते हैं जिसे जदयू अपना वोट बैंक मानता रहा है। चोहरमल विकास मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष व लोजपा नेता शिव कुमार मांझी के चलते सीवान में जदयू को पफायदा मिलने की उम्मीद जतायी जा रही है। लेकिन लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान के भाजपा के साथ गठबंध्न कर लेने से दलित मुसलमानों के भाजपा के साथ होने की बात बतायी जा रही हैं। बहरहाल, जदयू के प्रत्याशी के साथ ही आप प्रत्याशी भी राजपूत बिरादरी से आते हैं। ऐसे में ‘आप’ के समर्थक वोट के साथ ही ‘आप’ प्रत्याशी राहुल कृति सिंह के व्यक्तित्व का वोट उन्हें जरूर मिल सकता है। बहरहाल, यदि जदयू प्रत्याशी श्री सिंह की जैसे-जैसे मजबूत स्थिति होगी अर्थात् लड़ाई को त्रिकोणीय बना पते हैं तो लड़ाई कापफी रोचक हो जायेगी। हालांकि, इस बार के चुनाव को चतुष्कोणीय होने की संभावना जतायी जा रही है। लेकिन चूंकि चुनाव में कापफी देर है। ऐसे में चुनावी तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं हो पायी है। ज्यों-ज्यों चुनाव नजदीक आती जायेगी व विभिन्न दलों के स्टार प्रचारक जनता के बीच आयेंगे, चुनावी तस्वीर निखरती जायेगी।त्र


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